दिल्ली में चुनाव का दांव खेल सकती है भाजपा
महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव नतीजों का सीधा असर दिल्ली की राजनीति पर पड़ने वाला है। पड़ोसी हरियाणा में अपने दम पर बहुमत और महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरने के बाद भाजपा दिल्ली में सरकार बनाने के बदले चुनाव मैदान में उतरने का विकल्प आजमा सकती है।
उधर भाजपा को दिल्ली की सत्ता से दूर रखने केलिए आप और कांग्रेस फिर से हाथ मिलाने की संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं। इस संबंध में दोनों ही दलों में अंदरखाने विचार विमर्श शुरू भी हो चुका है।
मगर आम आदमी पार्टी के सामने मुश्किल यह है कि अरसे से वह दिल्ली में चुनाव कराने की मांग करती आ रही है। उधर दोनों ही राज्यों से सकारात्मक नतीजे आने के बाद भाजपा की निगाहें अब झारखंड और जम्मू-कश्मीर पर है, जहां जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं। इसी कड़ी में भाजपा लगे हाथ दिल्ली में भी चुनाव करा कर मैदान मार लेना चाहती है।
हालांकि इस बारे में पार्टी नेतृत्व ने अंतिम फैसला नहीं लिया है, मगर पार्टी के शीर्ष नेताओं में से ज्यादातर नेताओं की राय दिल्ली में सरकार बनाने के बदले सीधे चुनाव मैदान में उतरने का है। इनका मानना है कि खासतौर से हरियाणा में मिली चुनावी सफलता का सीधा असर दिल्ली पर पड़ेगा।
भाजपा लड़ सकती है चुनाव
दोनों राज्यों के चुनाव आने के साथ ही दिल्ली की राजनीति में हलचल शुरू हो गई है। पहले दो बार सरकार बनाने का मन बनाने वाले भाजपा अब सकरात्मक नतीजे आने के बाद चुनाव मैदान में उतरने का मन बना रही है।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक फिलहाल इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है, मगर अब ज्यादातर नेताओं की राय है कि यहां सरकार बनाने के बदले पार्टी को चुनाव मैदान में जाना चाहिए।
उक्त नेता का कहना था कि नतीजे ने देश में मोदी का करिश्मा कायम रहने और पड़ोसी हरियाणा में बहुमत दे कर दिल्ली में भी परिस्थितियां बदलने का संकेत दिया है। खासतौर से हरियाणा के चुनाव नतीजों का असर दिल्ली में पड़ना तय है। इसलिए बहुत संभव है कि भाजपा अब सरकार बनाने का फैसला करने के बदले सीधे चुनाव मैदान में उतरने का फैसला करे।
कांग्रेस दे सकती है 'आप' को समर्थन
उधर नई परिस्थितियों में कांग्रेस के स्टैंड में भी परिवर्तन होने की संभावना दिख रही है। पार्टी के अंदरखाने भाजपा को दिल्ली की सत्ता में आने से रोकने के लिए आप के साथ फिर से खड़ा होने पर कांग्रेस में नए सिरे से मंथन शुरू होने की उम्मीद है।
सूत्रों का दावा है कि इस बारे में प्रारंभिक स्तर पर मंथन का सिलसिला शुरू भी हो चुका है। इसमें तब तेजी आएगी जब भाजपा अपना रुख साफ करेगी। हालांकि अगर एक बार भाजपा ने चुनाव में जाने की घोषणा की तो बार बार चुनाव कराने की मांग कराने वाली आम आदमी पार्टी कांग्रेस के साथ खड़ा होने में संकोच करेगी।
हालांकि यह भी बड़ी सच्चाई है कि दोनों ही दलों में पहले भी इस दिशा में विचार विमर्श तो हुआ था मगर यह किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाया था।