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'असम में सत्ता में नहीं आएगी भाजपा'

Tue, 01 Mar 2016 05:14 PM IST
Updated Tue, 01 Mar 2016 05:14 PM IST
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BJP will not come to power in Assam

असम विधानसभा चुनाव के गणित में मौलाना बदरुद्दीन अजमल किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं। उनकी पार्टी यूडीएफ विधानसभा की 126 में से 60 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। मौलाना अजमल ने कहा कि उनकी तैयारी पूरी है। उन्होंने कहा कि इस बार का चुनाव वे आधुनिक और वैज्ञानिक ढंग से लड़ेंगे।

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इस मामले में सबसे पहले नीतीश कुमार ने कोशिश की, प्रशांत (किशोर) ने भी कोशिश की लेकिन राज्य की कांग्रेस सरकार इस मामले में अड़ी हुई है कि उन्हें किसी से गठबंधन नहीं करना है।
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इसकी बड़ी वजह कांग्रेस के एक मुसलमान मंत्री हैं जिन्हें डर है कि अगर अजमल का, यूडीएफ का ग्राफ बढ़ता है तो उनका वजूद खत्म हो जाएगा।

इसलिए वह यह गठबंधन नहीं होने देना चाहते।
हालांकि हम चाहते थे कि किसी तरह यह गठबंधन हो जाता तो दोनों पार्टियों को फयदा होता और बीजेपी को सीधा नुकसान।

मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से आपके निजी मतभेद हैं?

BJP will not come to power in Assam

मुख्यमंत्री से कोई मतभेद नहीं है लेकिन सरकार के एक मुसलमान मंत्री हमसे निजी दुश्मनी पाले बैठे हैं। वे वन मंत्री थे तो उन्होंने हमारे व्यवसाय को बर्बाद कर दिया और आज भी वह हमें ख़त्म करने पर आमादा हैं।

तरुण गोगोई राजीव गांधी सरकार में मंत्री रह चुके हैं, तीन बार राज्य में पार्टी को जिता चुके हैं इसलिए उनका गांधी परिवार पर असर भी है। वह पार्टी को गारंटी दे रहे हैं कि 74+ सीटें लेकर आएंगे, जो पिछली बार की 78 सीटों के आसपास ही रहेगा।

हमारी पार्टी की ओर से नीतीश कुमार ने कांग्रेस से गठबंधन के लिए बात की थी। प्रशांत किशोर भी आए थे और उनकी एक ही शर्त थी कि गठबंधन करो तो जीत की गारंटी है।

लेकिन तरुण गोगोई ने इससे इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मैं तीन बार जीता हूं और मुझे किसी प्रशांत की ज़रूरत नहीं पड़ी, इस बार भी नहीं पड़ेगी।


जहां तक हमारी बात है हम कांग्रेस से गठबंधन के लिए बिल्कुल तैयार हैं लेकिन छोटी पार्टी होने के नाते हम कांग्रेस के पास नहीं जा सकते, बड़ी पार्टी को ही पहल करनी होती है।

बीजेपी से आपकी नजदीकी के आरोप कितने सही हैं?

BJP will not come to power in Assam

ऐसे आरोप सिर्फ कांग्रेस लगा रही है, जो बिल्कुल बेबुनियाद हैं। लोगों ने हमें तीन सांसद दिए हैं, 18 विधायक दिए हैं तो क्या अब हम बीजेपी के साथ जाकर राजनीतिक आत्महत्या कर लें। वैसे चाहे गठबंधन हो या न हो एक बात तो तय है कि बीजेपी कितनी भी कोशिश कर ले असम में वह सत्ता में नहीं आएगी।

हकीकत यह है कि राज्य में हमारी सीधी टक्कर कांग्रेस से है क्योंकि हमारे यहां बीजेपी का वोट ही नहीं है। लेकिन जब हम यह बात कहते हैं तो कांग्रेसी कहते हैं कि हम बीजेपी के एजेंट हैं।

हमने कांग्रेस से कहा कि हम 65 सीट आपको देते हैं आप वहां चुनाव लड़िए क्योंकि हम लड़ेंगे तो बीजेपी हमसे आगे निकल जाएगी। इस पर कांग्रेस को बुरा लग जाता है कि यह छोटी पार्टी होकर हमें सीट देने की बात कर रही है।

अब हम साठ सीटों पर तैयारी कर रहे हैं और इनमें से कम से कम 15 सीटें ऐसी हैं जिन पर कांग्रेस और यूडीएफ़ की टक्कर से बीजेपी को फायदा मिल सकता है, वह सीट निकाल सकती है।लेकिन कांग्रेस को इसकी परवाह नहीं है वह तो बस यह चाहती है कि यूडीएफ़ को खत्म कर दे।

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