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वाजपेयी की ही लाइन पर चलेगी भाजपा
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा
Updated Sat, 29 Sep 2012 11:09 PM IST
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भले ही अस्वस्थता के कारण अब सियासत में सक्रिय न हों, लेकिन भाजपा उन्हीं की राजनीतिक लाइन पर चलती रहेगी। आगामी चुनाव के लिए कमर कस चुकी पार्टी की सूरजकुंड बैठक से तो यही संकेत मिला है। वाजपेयी की लाइन पर चलते हुए भाजपा ने एनडीए प्लस की योजना पर अमल करने के लिए सूरजकुंड बैठक में विवादित मुद्दों से दूरी बना ली।
अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का संकल्प हो या कश्मीर में धारा 370 हटाने का मामला, सूरजकुंड में इन विवादित मुद्दों को लेकर एक शब्द भी सुनाई नहीं दिया। भाजपा का सबसे ज्यादा जोर केंद्र की यूपीए सरकार को कोसने पर रहा। इसी के साथ एनडीए शासन में अटल सरकार की उपलब्धियों का भी बखान होता रहा।
चुनाव के लिए ताल ठोक रही भाजपा अब लोगों के बीच जाकर अटल के नाम का सहारा लेगी। पार्टी जनता के बीच अटल सरकार बनाम मनमोहन सरकार की तुलना करेगी। भाजपा ने वैसे तो राम मंदिर के मुद्दे पर पिछले साल लखनऊ में हुई कार्यकारिणी की बैठक से ही दूरी बनानी शुरू कर दी थी, लेकिन तब बैठक में भव्य मंदिर के निर्माण का मामूली जिक्र जरूर किया गया था।
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सूरजकुंड में भाजपा का राजनीतिक प्रस्ताव हो या पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी अथवा वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के भाषण, कहीं भी राम मंदिर जैसे विवादित मुद्दों का जिक्र नहीं हुआ। राम मंदिर के लिए कभी रथयात्रा निकालने वाले आडवाणी ने अलबत्ता सूरजकुंड में अपने लिखित भाषण में भाजपा की धर्म निरपेक्षता के प्रति अपनी वचनबद्धता दोहराई।
एनडीए का कुनबा बढ़ाने के लिए भाजपा ने मुंबई सम्मेलन में भी जोर दिया था। वाजपेयी की लाइन के समर्थक नेता लगातार कहते रहे हैं कि एनडीए का विस्तार करने के लिए जरूरी है कि वे सभी विवादित मुद्दे छोड़ दिये जाएं जो इसके रास्ते में बाधा हैं। सूरजकुंड में राष्ट्रीय परिषद व कार्यकारिणी की बैठक में भाजपा ने अब यही लाइन पकड़ ली है।
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अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का संकल्प हो या कश्मीर में धारा 370 हटाने का मामला, सूरजकुंड में इन विवादित मुद्दों को लेकर एक शब्द भी सुनाई नहीं दिया। भाजपा का सबसे ज्यादा जोर केंद्र की यूपीए सरकार को कोसने पर रहा। इसी के साथ एनडीए शासन में अटल सरकार की उपलब्धियों का भी बखान होता रहा।
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चुनाव के लिए ताल ठोक रही भाजपा अब लोगों के बीच जाकर अटल के नाम का सहारा लेगी। पार्टी जनता के बीच अटल सरकार बनाम मनमोहन सरकार की तुलना करेगी। भाजपा ने वैसे तो राम मंदिर के मुद्दे पर पिछले साल लखनऊ में हुई कार्यकारिणी की बैठक से ही दूरी बनानी शुरू कर दी थी, लेकिन तब बैठक में भव्य मंदिर के निर्माण का मामूली जिक्र जरूर किया गया था।
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सूरजकुंड में भाजपा का राजनीतिक प्रस्ताव हो या पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी अथवा वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के भाषण, कहीं भी राम मंदिर जैसे विवादित मुद्दों का जिक्र नहीं हुआ। राम मंदिर के लिए कभी रथयात्रा निकालने वाले आडवाणी ने अलबत्ता सूरजकुंड में अपने लिखित भाषण में भाजपा की धर्म निरपेक्षता के प्रति अपनी वचनबद्धता दोहराई।
एनडीए का कुनबा बढ़ाने के लिए भाजपा ने मुंबई सम्मेलन में भी जोर दिया था। वाजपेयी की लाइन के समर्थक नेता लगातार कहते रहे हैं कि एनडीए का विस्तार करने के लिए जरूरी है कि वे सभी विवादित मुद्दे छोड़ दिये जाएं जो इसके रास्ते में बाधा हैं। सूरजकुंड में राष्ट्रीय परिषद व कार्यकारिणी की बैठक में भाजपा ने अब यही लाइन पकड़ ली है।