{"_id":"1a8bf4279b532568d4e091fd83fc03b2","slug":"bjp-will-call-former-leaders-in-party","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपने बिखरे कुनबे को जोड़ने में जुटी भाजपा","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
अपने बिखरे कुनबे को जोड़ने में जुटी भाजपा
हरीश लखेड़ा/नई दिल्ली
Updated Fri, 20 Sep 2013 03:49 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चुनावी महाभारत की कमान नरेंद्र मोदी को सौंपने के बाद भाजपा अब अपने बिखरे कुनबे को जोड़ने में जुट गई है।
विज्ञापन
उमा भारती व कल्याण सिंह के पार्टी में लौटने के बाद भाजपा की नजर बीएस येदियुरप्पा और बाबूलाल मरांडी पर है, जबकि एनडीए के कुनबे को बढ़ाने का मामला भाजपा ने चुनाव बाद के लिए छोड़ दिया है।
भाजपा की प्राथमिकता अपने दम पर लोकसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा संख्या बल जुटाना है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि यदि मोदी के नेतृत्व में भाजपा 200 का आंकड़ा पार कर जाती है, तो एनडीए के कई पुराने साथी लौट आएंगे।
विज्ञापन
अभी धर्मनिरपेक्षता का राग अलाप रहे दलों व नेताओं के लिए तब भाजपा ही नहीं बल्कि मोदी भी ‘सेक्युलर’ हो जाएंगे। इसलिए भाजपा अब एनडीए के विस्तार की योजना को तवज्जो देने की बजाए पार्टी छोड़कर बाहर गये नेताओं की घर वापसी पर ज्यादा जोर दे रही है।
विज्ञापन
येदियुरप्पा सार्वजनिक तौर पर अभी भाजपा में वापसी को लेकर इंकार कर रहे हैं, लेकिन भाजपा नेताओं का मानना है कि उनकी घर वापसी लगभग तय है और अब उचित समय का इंतजार हो रहा है।
अब झारखंड में बाबूलाल मरांडी की भी भाजपा में घर वापसी की कोशिशें शुरू हो गई हैं।
मरांडी के भाजपा से बाहर जाने को लेकर पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह का प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के प्रति खास प्रेम को मुख्य वजह माना जाता रहा है, लेकिन अब चुनाव की कमान मोदी के हाथ आ जाने से मरांडी की वापसी की संभावना बढ़ गई है।
दूसरी तरफ भाजपा ने तय कर लिया है कि अब एनडीए का कुनबा बढ़ाने के लिए ज्यादा समय बर्बाद नहीं किया जाएगा।
सूत्रों का कहना है कि हरियाणा में ओमप्रकाश चौटाला की इनेलो तथा असम में अगम गण परिषद के साथ लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन की कोशिशें चल रही हैं।
पार्टी का मानना है कि चुनाव में 200 सीटों का आंकड़ा आंकड़ा पार करते ही जयललिता के साथ ही चंद्र बाबू नायडू, नवीन पटनायक भाजपा के साथ आ जाएंगे।
जयललिता को तो मोदी से कोई परहेज भी नहीं है। भाजपा के साथ अभी शिवसेना, शिरोमणि अकाली दल, हरियाणा जनहित कांग्रेस, आरपीआई (अठावले) व पीए संगमा की पार्टी ही हैं।