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..तो फीकी पड़ने लगी बंगाल में भाजपा की चमक

Mon, 13 Jul 2015 12:21 AM IST
Updated Mon, 13 Jul 2015 12:21 AM IST
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पिछले साल हुए लोकसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन के जरिये पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपनी धमाकेदार उपस्थिति दर्ज कराने वाली भाजपा के कदम तेजी से लड़खड़ाने लगे हैं। इसके पीछे नेतृत्व का अभाव, अंदरुनी कलह और तृणमूल कांग्रेस के साथ कथित नजदीकियों को ही प्रमुख वजह माना जा रहा है।

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बीते लोकसभा चुनावों से पहले तक राज्य में पार्टी को राजनीति की दौड़ से बाहर माना जाता था। लेकिन लोकसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन करने के बाद उसने उसके बाद ही विधानसभा उपचुनावों में भी यह सिलसिला जारी रखा।
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दो सीटों के लिए हुए उपचुनाव में उसने अकेले अपने बूते बशीरहाट दक्षिण सीट पर कब्जा कर लिया जबकि दूसरी सीट पर वह नंबर दो के स्थान पर रही। धीरे-धीरे उसे माकपा की अगुवाई वाले लेफ्ट फ्रंट की जगह राज्य की नंबर दो पार्टी समझा जाने लगा।

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अंदरुनी कलह और तृणमूल के साथ नजदीकियां बनी मुश्किल

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उसके बाद शारदा चिटफंड घोटाले और इसमें तृणमूल नेताओं की कथित भागीदारी के मुद्दे पर अपने आंदोलन से भाजपा ने खुद को वर्ष 2016 के विधानसभा चुनावों में एक मजबूत दावेदार के तौर पर खड़ा कर दिया था।

इसी दौरान वनगांव लोकसभा सीट के लिए होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस सरकार के एक मंत्री मंजुल कृष्ण ठाकुर को अपने पाले में कर तृणमूल नेतृत्व को एक जोरदार झटका दे दिया। लेकिन बीते साल की शुरुआत शानदार तरीके से करने के बावजूद धीरे-धीरे भाजपा की चमक धुंधली पड़ने लगी।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा भी मानते हैं कि बीते लोकसभा चुनावों में प्रदर्शन के बाद पार्टी को जो छवि बनी थी उसकी चमक फीकी पड़ चुकी है।

वे बताते हैं कि विपक्ष की ओर से होने वाला कुप्रचार इसकी एक प्रमुख वजह है। पार्टी के एक अन्य नेता मानते हैं कि शारदा घोटाले पर रुख में नरमी और तृणमूल कांग्रेस से करीबी की अफवाहों ने भाजपा की साख पर असर डाला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ताजा दोस्ती ने विपक्ष को कुप्रचार का एक मौका दे दिया।

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सिद्धार्थ नाथ सिंह भी मानते हैं कि इन अफवाहों से भाजपा की साख पर बट्टा लगा है। लेकिन उनको भरोसा है कि पार्टी इनसे निपट कर एक बार फिर पहले जैसी मजबूत स्थिति में पहुंच जाएगी। सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने भी पिछले सप्ताह यहां भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक मैच फिक्सिंग का आरोप लगाया था।


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