{"_id":"f288a962-b67e-11e2-811c-d4ae52bc57c2","slug":"bjp-wants-bansal-ashwani-to-quit-before-backing-key-bills","type":"story","status":"publish","title_hn":"सोनिया की सियासी मुहिम पंक्चर करने में जुटी सुषमा","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
सोनिया की सियासी मुहिम पंक्चर करने में जुटी सुषमा
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 07 May 2013 01:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खाद्य सुरक्षा और भूमि अधिग्रहण जैसे विधेयकों के सहारे अगले लोकसभा चुनाव की जंग में जाने की कोशिश कर रही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की मुहिम को लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज पंक्चर करने में जुट गई हैं।
विज्ञापन
सोमवार को लोकसभा में खाद्य सुरक्षा बिल पर चर्चा कराने के लिए प्रयास को विफल करने के बाद भाजपा नेता ने सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है।
सुषमा ने कहा है कि आरोपी मंत्रियों को बर्खास्त किए जाने के बाद ही कोई बिल सदन से पास हो सकेगा। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री के इस्तीफे की भी मांग की। उन्होंने कहा कि विपक्ष नहीं चाहता है कि सदन में कोई अप्रिय घटना घटित हो।
विज्ञापन
लोकसभा में विपक्ष की नेता ने आरोप लगाया कि खाद्य सुरक्षा बिल को चर्चा के लिए लाना वास्तव में सरकार का अपने काले कारनामों को छुपाने का प्रयास है। सरकार को समझ लेना चाहिए कि शोरशराबे के बीच विधेयकों को पारित कराने के विरोध में पूरा विपक्ष एकजुट है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि यह सरकार भ्रष्टाचारी व अत्याचारी भी हो गई है। संसद के बाहर सरकार भ्रष्टाचार कर रही है, जबकि संसद में लोकतंत्र पर अत्याचार।
सुषमा ने कहा कि यूपीए के मंत्रियों ने देश को लूटने का सिलसिला जारी रखा है और हम इसे जारी नहीं रखने दे सकते। उन्होंने कहा कि 10 मई तक संसद का सत्र चालू है। प्रधानमंत्री के इस्तीफा देने और दागी मंत्रियों को बर्खास्त करने के बाद ही इन विधेयकों पर संसद में चर्चा हो सकती है।
सुषमा के इस ऐलान के बाद अब इन विधेयकों के पारित होने को लेकर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। यह विधेयक सोनिया के इशारे पर लाने की चर्चा पर सुषमा ने कहा कि उनका आरोप सही साबित हो रहा है। सुषमा ने हाल में आरोप लगाया था कि सोनिया के इशारे पर ही उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया गया।
दरअसल, पिछले लोकसभा चुनाव में मनरेगा जैसे कानून बनाने से चुनाव में मिली सफलता को याद कर यूपीए इस बार खाद्य सुरक्षा और भूमि अधिग्रहण जैसे कानून बनाने के प्रयास में है, लेकिन संसद में भारी गतिरोध के चलते ऐसा कर पाना आसान नहीं दिख रहा है।
साथ ही अब सरकार के प्रयास के खिलाफ सोमवार को लगभग पूरा विपक्ष भी एकजुट दिखा। माना जा रहा है कि टूजी, कोल ब्लॉक से लेकर रेल घूस कांड जैसे मुद्दों पर मचे सियासी घमासान के बीच सरकार इस विधेयक को चर्चा के लिए पेश कर लोगों का ध्यान मुख्य मुद्दों से हटाना चाहती है।