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हजकां से गठबंधन तोड़ने की तैयारी में BJP

Thu, 31 Jul 2014 10:33 PM IST
Updated Thu, 31 Jul 2014 10:33 PM IST
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bjp want to break alliance with haryana janhit congress

लोकसभा चुनावों में हरियाणा में सात सीटें जीतने के बाद आत्मविश्वास से भरी भाजपा अब राज्य में कुलदीप बिश्नोई की हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) से अपना रास्ता अलग करने की तैयारी में है।

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माना जा रहा है कि भाजपा हरियाणा के पूर्व दागी सीएम और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के नेता ओम प्रकाश चौटाला के संपर्क में है। हालांकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इसका विरोध कर रहा है।
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने गठबंधन का भविष्य तय करने के लिए हरियाणा में केंद्रीय पर्यवेक्षकों को भेजा है, जो उन्हें रिपोर्ट सौंपेंगे।

हजकां अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई ने कहा है कि उन्होंने इस संबंध में बात करने के लिए भाजपा अध्यक्ष से समय मांगा है। हमें गठबंधन को लेकर कोई समस्या नहीं है, लेकिन अब गेंद भाजपा के पाले में है।
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उन्होंने कहा, ‘मैं पूरे राज्य का दौरा कर रहा हूं और हमारी पार्टी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से भी मिलने की योजना बना रहा हूं।’

भाजपा के पास बिश्नोई की टक्कर का नेता नहीं

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भाजपा के लिए समस्या यह है कि हरियाणा में उनके पास ऐसा कोई चेहरा नहीं है, जिसके दम पर चुनाव लड़ा जा सके। पार्टी के वरिष्ठ नेता राम विलास शर्मा कई बार चुनाव हार चुके हैं और उनकी क्षमता पर पहले ही सवालिया निशान है।

बिश्नोई की टक्कर का कोई भी नेता फिलहाल भाजपा के पास नहीं दिख रहा है। दूसरे इनेलो से गठबंधन करने पर भाजपा की भ्रष्टाचार रोधी छवि को नुकसान पहुंच सकता है क्योंकि इस पार्टी के नेता पिता-पुत्र दोनों पर ही भ्रष्टाचार के आरोप हैं।

संघ भी इसी वजह से इसका कड़ा विरोध कर रहा है क्योंकि इनेलो से गठबंधन करने पर पार्टी को सत्ता हासिल करने के लिए मौकापरस्त के रूप में देखा जाएगा।

हरियाणा में इस साल 90 विधानसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। भाजपा और हजकां के बीच लिखित अनुबंध के मुताबिक राज्य में पहले ढाई साल हजकां का और बाद के ढाई साल भाजपा का मुख्यमंत्री होगा। लेकिन लोकसभा चुनावों में मिली सफलता के बाद भाजपा इस संबंध में फिर से विचार करने में लग गई है।

भाजपा-हजकां में चल रहा शीत युद्ध

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दोनों पार्टियां हालांकि सार्वजनिक मंच पर इस संबंध में कुछ नहीं कह रही हैं, लेकिन दोनों के बीच शीत युद्ध चल रहा है। इसी के चलते भाजपा जाट वोट बैंक को देखते हुए ओम प्रकाश चौटाला की इनेलो के साथ हाथ मिलाने की संभावनाएं तलाशने में जुटी हुई है।

जमीनी हकीकत यह भी है कि लोकसभा चुनावों के बाद मोदी लहर का असर कम हो चुका है और महंगाई व स्थानीय विधानसभा चुनावों में अहम भूमिका निभाएंगे।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का यह भी मानना है कि हाईकमान हजकां के साथ गठबंधन रखना चाहिए और गठबंधन धर्म के लिए यही सही फैसला होगा। सुषमा स्वराज भी गठबंधन बनाए रखने के पक्ष में है।

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