घुसपैठ पर केंद्र ने चीनी राजदूत से जताई नाराजगी
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चुमार सेक्टर और डेमचक में एलएसी पर बीते करीब एक पखवाड़े से जारी तनातनी के बीच भारत ने चीन के राजदूत ली यूचेंग को तलब कर कड़ा ऐतराज जताया है।
चीन स्थित भारतीय दूतावास ने बीजिंग में भी इस मामले में विदेश मंत्रालय के सामने इस मामले में विरोध जताया है।
सूत्रों का कहना था कि यूचेंग से हुए विचार विमर्श में भारत ने घुसपैठ पर चिंता जताने के साथ ही अपनी नाराजगी जाहिर की। यूचेंग से पूछा गया कि शांतिपूर्ण तरीके से विवाद का हल निकालने पर सहमति जताए जाने के बावजूद चीनी सैनिक चुमार सेक्टर और डेमचक में क्या कर रहे हैं?
सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत ने युचेंग के साथ-साथ बीजिंग में भी अपने दूतावास के माध्यम से कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
घुसपैठ पर दर्ज कराया विरोध
खासतौर से चीनी सेना के टेंट गाड़े जाने और एलओसी के अंदर घुसने के मामले को उठाते हुए कहा गया है कि शांतिपूर्ण ढंग से विवाद का हल निकालने की सहमति के बाद चीन की ओर से उठाए गए ऐसे कदम से विश्वास बहाली की प्रक्रिया को ठेस पहुंचेगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना था कि सीमा पर हाल में हुई कुछ घटनाओं को लेकर बीते दिनों दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने बातचीत की थी। उसके बाद की कई घटनाओं को लेकर दोनों देशों में अलग-अलग मंचों पर बात हो चुकी है।
सार यह है कि कूटनीति जारी है, यह खामोशी से अपना काम कर रही है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा के ठीक पहले चुमार सेक्टर और डेमचक में चीनी सेना की घुसपैठ पर विवाद खड़ा हो गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले को जिनपिंग के समक्ष दो बार उठाया था। इसके बाद पीएलए जिनपिंग के निर्देश के बाद पीछे तो हट गई, मगर थोड़े समय बाद वापस उसी जगह पर आ गई। तब से इस मामले में एलओसी पर चीन के 1000 और भारत के 1500 सैनिक आमने-सामने हैं।