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मोदी में ओबीसी पीएम देने का ख्वाब देख रही BJP

Sat, 21 Dec 2013 12:17 PM IST
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, दिल्ली
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 21 Dec 2013 12:17 PM IST
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bjp strategy on narendra modi

हरदनहल्ली डोडेगौडा देवगौड़ा भले ही ओबीसी समुदाय के पहले प्रधानमंत्री रहे हों, लेकिन भाजपा का कहना है कि पार्टी 2014 में जीती तो अन्य पिछड़ी जाति से वास्तव में पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही होंगे।

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लोकसभा की सियासी जंग में उतरी भाजपा ने ओबीसी वोट को अपने पाले में लाने के लिए मोदी को लेकर ओबीसी कार्ड खेलना शुरू कर दिया है।

खासतौर पर जातिवाद के गढ़ उत्तर प्रदेश व बिहार की 120 सीटों पर नजर गड़ाए भाजपा इन प्रदेशों में मोदी को ‘हिंदू हृदय सम्राट’ या विकास पुरुष की बजाए चुपके-चुपके ओबीसी नेता के तौर पर प्रचारित करने लगी है।
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मुलायम सिंह यादव, नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव के मजबूत गढ़ों में भाजपा अब जातिवाद के कांटे से ही कांटा निकालने की रणनीति अपना रही है। मोदी गुजरात के तेली समुदाय से हैं।
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भाजपा नेताओं का दावा है कि बिहार में तो अब तेली और कलवार समुदायों में इस बात की होड़ शुरू हो गई है कि मोदी उनके समुदाय से हैं।

वैसे तो मोदी खुद को चाय वाले के तौर पर ज्यादा प्रचारित कर रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश और बिहार के नेता उनकी  ओबीसी पहचान को ज्यादा प्रचारित करने में जुटे हैं।

जैसे-जैसे चुनाव प्रचार तेज पकड़ेगा, भाजपा के नेता ओबीसी बहुल राज्यों में जोरशोर से प्रचारित करेंगे कि देश को पहला ओबीसी प्रधानमंत्री देने का समय आ गया है।

इसी रणनीति के तहत खुद मोदी ने पिछले दिनों कहा था कि काश पं. जवाहर लाल नेहरू की बजाए सरदार बल्लभ भाई पटेल देश के पहले पीएम होते।

अब यह भी प्रचारित किया जाने लगा है कि सरदार पटेल तो नहीं बन पाए लेकिन मोदी पहले ओबीसी पीएम बन सकते हैं। सरदार पटेल को भी कुर्मी समुदाय से जोड़ा जाने लगा है। जबकि गुजरात के पटेल कहीं से भी कुर्मी नहीं हैं।

बहरहाल, देवगौड़ा कर्नाटक के ताकतवर लिंगायत समुदाय से हैं, इसलिए भाजपा उन्हें ओबीसी मानने  से इनकार कर रही है। चौधरी चरण सिंह जाट थे और जाटों को अभी तक केंद्र में ओबीसी में शामिल करने का मामला लटका है।


इसलिए मोदी को पहले संभावित ओबीसी पीएम के तौर पर भाजपा प्रचारित कर रही है। इस ओबीसी कार्ड के प्रचार में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान से लेकर कल्याण सिंह व उमा भारती, गोपीनाथ मुंडे आदि नेता भी मददगार साबित हो रहे हैं, जो खुद ओबीसी हैं।

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