बदलने वाले हैं इन राज्यों में भाजपा के चेहरे
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भाजपा राज्यों में नए नेतृत्व और नई रणनीति अपनाएगी। खास तौर पर उन राज्यों में अगले एक-दो वर्षों में सरकार का नेतृत्व बदलेगा, जहां पार्टी लगातार चुनाव जीत रही है। इस पर अमल हुआ तो मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार की कमान नए हाथों में दी जा सकती है।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में राज्यों की रिपोर्टिंग के दौरान विभिन्न राज्यों की वर्तमान राजनीतिक स्थिति का व्यापक विश्लेषण किया गया। माना जा रहा है कि दक्षिण भारत में पार्टी नेतृत्व एक बार फिर से पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा पर भरोसा जता सकता है।
येदियुरप्पा ने इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को संगठन की कमान मिलने पर विधानसभा में हर हाल में जीत दिलाने की गारंटी भी दी है। बैठक में व्यापक विचार विमर्श के बाद टीएमसी सांसद मुकुल राय को पार्टी में न लेने का फैसला किया है।
येदियुरप्पा को फिर मिल सकती है कर्नाटक की कमान
पार्टी का मानना है कि इस सूबे में भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बनाने की राह में राय बड़ा सियासी रोड़ा बन सकते हैं। कार्यकारिणी की बैठक में लोकसभा चुनाव से पहले जिन सूबों में पार्टी जीती है, वहां चरणबद्ध तरीके से नया नेतृत्व उभारने का फैसला हुआ है।
अगर इसे लागू किया गया तो कुछ समय बाद मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के मुख्यमंत्री केंद्रीय संगठन या केंद्र सरकार में शामिल किए जा सकते हैं। वैसे भी मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह कई मुद्दों को लेकर विवादों में हैं। नेतृत्व की नजर इस मामले में राजस्थान पर भी है।
मालूम हो कि लोकसभा के बाद जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव में पार्टी को जीत हासिल हुई है, वहां मोदी-शाह की जोड़ी ने सरकार की कमान नए हाथों में दी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस साल के अंत में इन राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन की शुरुआत हो सकती है।