शिवसेना से गठबंधन को लेकर भाजपा की ये है रणनीति
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भाजपा निकट भविष्य में शिवसेना को घास डालने के बदले अधर में लटकाए रखेगी। इस रणनीति के तहत ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल शिवसेना के इकलौते प्रतिनिधि अनंत गीते को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न तो हटाएंगे और न ही इस्तीफा देने के लिए कहेंगे।
कड़वाहट के चरम पर पहुंचने के बावजूद भाजपा के रणनीतिकारों को जरूरत पड़ने पर शिवसेना का साथ हासिल होने का भरोसा है। दरअसल, भाजपा ने बंबई महानगर पालिका (बीएमसी) की सत्ता के रूप में शिवसेना के दुखती रग की पहचान कर ली है।
भाजपा जरूरत पड़ने पर बीएमसी में समर्थन वापस लेने का भय दिखा कर मुद्दागत समर्थन हासिल करती रहेगी। फडनवीस सरकार के विश्वास मत हासिल कर लेने के कारण शक्ति परीक्षण के लिए मिली छह महीने की मोहलत ने भाजपा को तनावमुक्त कर दिया है।
संसद में भी शिवसेना के अलग होन से भाजपा की सेहत पर कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला है। लोकसभा में पार्टी को जहां अपने दम पर बहुमत हासिल है, वहीं राज्यसभा में तीन सदस्यों वाली शिवसेना के साथ छोड़ने की स्थिति में भाजपा को 6 सदस्यों वाली एनसीपी का सहयोग मिलेगा।
बीएमसी की सत्ता छीन लेने का दिखाएगी डर
हालांकि पार्टी सूत्र अब भी शिवसेना से फिर से दोस्ती होने की संभावना को सिरे से खारिज नहीं कर रहे हैं, मगर इनका मानना है कि फडनवीस सरकार के विश्वास मत हासिल करने के बाद फिलहाल भाजपा इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाएगी।
विधानसभा चुनाव में अकेले दम पर मैदान में उतरी भाजपा महाराष्ट्र में सरकार चलाने के मामले में भी यही फॉर्मूला अपनाना चाहती है। एनसीपी से बाहर से समर्थन हासिल होते रहने की गारंटी के बाद भाजपा शिवसेना को अधर में ही लटकाए रखना चाहती है।
इस क्रम में प्रधानमंत्री न तो गीते का इस्तीफा मांगेंगे और न ही उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर ही करेंगे। दरअसल, भाजपा चाहती है कि शिवसेना खुद गीते को इस्तीफा देने केलिए कहे, जिससे उस पर शिवसेना से किनारा करने का आरोप न लगे।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, संबंधों की खाई चौड़ी होने के बावजूद शिवसेना भाजपा से इतनी दूर नहीं जा सकती कि जहां से उसे बुलाया न जा सके। चूंकि बंबई महानगर पालिका में शिवसेना की सत्ता भाजपा के रहमोकरम पर टिकी है, इसलिए इस स्थिति में शिवसेना को एमएनसी की सत्ता भी गंवानी होगी।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक,फिलहाल शिवसेना से दोस्ती बहाल करने का मामला अब लंबे समय तक के लिए टल गया है। शिवसेना के आत्मसमर्पण का संदेश आने के बाद भी पार्टी इस बारे में जल्दबाजी नहीं दिखाएगी।