'बाबरी मस्जिद ढहाने के समय से चल रही है सपा-बीजेपी की दोस्ती'
सपा और भाजपा के बीच बढ़ती नदजीकियों के बीच कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के खिलाफ ताल ठोक दी है तो बसपा के साथ खड़े होकर अपनी भविष्य का राजनीतिक रास्ता बनाने का इरादा दिखाया है।
मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर जस्टिस (रिटायर्ड) विष्णु सहाय आयोग की रिपोर्ट में सपा और भाजपा पर सवाल उठाने की बात को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि दोनों पार्टियों की दोस्ती आज की नहीं बल्कि बाबरी मस्जिद ढहाने के समय से रही है।
आजाद ने सपा और भाजपा पर निशाना साधने के साथ ही 2013 के दंगों के समय रही यूपीए सरकार का बचाव भी किया है। आजाद ने कहा कि दंगों से निपटने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की थी। जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार मदद करती है।
दंगों के समय ही यह बात सामने आ गई थी कि दोनों पार्टियों के लोग राजनीतिक फायदे के लिए एक दूसरे से मिले हुए थे। आजाद ने अमर उजाला से कहा कि सब लोग मान कर चल रहे थे कि बिहार में मुलायम सिंह यादव लालू और नीतीश कुमार के साथ मिलकर महागठबंधन के जरिए मोदी सरकार को चुनौती देंगे।
सपा ने दिखा दिया की बीजेपी उसकी दोस्त है
मगर सपा ने अचानक पलटी खाकर दिखा दिया है कि उसकी सबसे बड़ी दोस्त भाजपा है। 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के समय कांग्रेस की केंद्र में सरकार थी तो उसने क्या किया?
इस पर आजाद कहते हैं कि कानून व्यवस्था का मुद्दा राज्य से संबंधित होता है। जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार हस्तक्षेप करती है। उस समय भी यह बात सामने आई थी कि भाजपा और सपा के लोग आपस में मिलकर राजनीतिक फायदे के लिए प्रदेश में दंगों को बढ़ावा दे रहे थे।
आजाद ने कहा कि मायावती के खिलाफ सीबीआई पूछताछ करने का फैसला बेहद निंदनीय है। मोदी सरकार विपक्षी पार्टियों को डराने धमकाने के लिए सीबीआई का इस्तेमाल कर रही है। आजाद ने कहा कि हम बसपा के साथ हैं और इसका विरोध किया जाएगा।
आजाद ने कहा कि कांग्रेस की सरकरों ने कभी भी अपने विरोधियों को डराने धमकाने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग नहीं किया है। मगर मोदी सरकार तो खुलेआम सीबीआई का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं। आजाद ने संकेत दिए कि इस मुद्दे पर कांग्रेस बसपा का पूरा समर्थन कर संसद के शीतकालीन सत्र में यह मामला जोर शोर से उठाएगी।