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2जी घोटाला: पीएम को क्लीन चिट पर गरमाई सियासत
नई दिल्ली/चेन्नई/एजेंसी
Updated Fri, 19 Apr 2013 07:52 PM IST
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टूजी मामले पर पीसी चाको की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट के लीक हो जाने के बाद सियासी तूफान खड़ा हो गया है।
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इस ड्राफ्ट रिपोर्ट में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम को क्लीन चिट दे दी गई और सारा दोष पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा के मत्थे जड़ दिया।
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इसके बाद शुक्रवार को राजा ने जहां एक ओर सफाई पेश की वहीं अन्य दलों ने भी नाराजगी जताई। ए. राजा ने कहा कि उन्होंने सभी काम प्रधानमंत्री से विचार-विमर्श करके ही किए।
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वह अपने बचाव में अगले सप्ताह समिति के समक्ष विस्तृत जवाब भेजेंगे।
सवाल
भाजपा ने इस रिपोर्ट को कांग्रेसी दस्तावेज बताते हुए इसके लीक होने पर सवाल उठा दिए।
भाकपा ने रिपोर्ट को पूर्वाग्रह से ग्रसित बताया तो कांग्रेस ने रिपोर्ट के संसद में पेश होने तक विपक्ष को इंतजार की सलाह दे डाली। जेपीसी अध्यक्ष चाको ने रिपोर्ट को तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष बताया।
पूरे मामले में डीएमके चीफ एम करुणानिधि ने सवाल उठाया कि एक मंत्री प्रधानमंत्री को कैसे गुमराह कर सकता है। संभावना जताई जा रही है कि विपक्ष सोमवार को इसे संसद में मु्द्दा बना सकती है।
पीएम को पता था
राजा ने मीडिया से कहा कि उन्होंने पद छोड़ने के बाद भी सभी लोगों को बताया कि उन्होंने जो किया वह प्रधानमंत्री से विचार-विमर्श कर ही किया।
उन्होंने कहा, अपनी गिरफ्तारी के बाद मैंने अदालत में भी वही बात कही और आरोप तय किए जाने के समय भी यही दलील दी।
दरअसल जेपीसी रिपोर्ट में कहा गया है कि टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में प्रधानमंत्री को दूरसंचार मंत्रालय की ओर से अपनाई जाने वाली प्रक्त्रिस्या के बारे में ‘गुमराह’ किया था।
एक सवाल के जवाब में राजा ने कहा कि उन्होंने हर प्रक्रिया की जानकारी तत्कालीन वित्त मंत्री और अधिकारियों को भी दी थी।
रिपोर्ट पूर्वाग्रह-ग्रस्त
वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने जेपीसी की रिपोर्ट को पूर्वाग्रह-ग्रस्त करार देते हुए कहा कि इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। भाकपा नेता डी. राजा ने कहा, यह रिपोर्ट हमें स्वीकार नहीं है।
यह पूर्वाग्रह-ग्रस्त है। इसमें कुछ लोगों को बचाने और एक व्यक्ति पर सारा दोष डालने की कोशिश की गई है। इस बीच भाजपा ने जेपीसी रिपोर्ट ‘लीक’ करने को संसदीय शिष्टाचार का उल्लंघन बताया।
भाजपा ने कहा कि यह रिपोर्ट कांग्रेस का दस्तावेज प्रतीत होती है जिसमें प्रधानमंत्री सहित उसके अन्य नेताओं को बचाने का प्रयास किया गया है।
भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने मीडिया से कहा कि इस मसौदा रिपोर्ट में कई लोगों को बचाने की इच्छा दिखाई दे रही है।
इस बड़े घोटाले के व्यापक प्रभाव पर तटस्थ भाव से विचार करना बाकी है जिसके कारण देश को शर्मसार होना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह मामला गहरे दुख और आश्चर्य का विषय है।
इस बारे में कोई चर्चा हो पाती, इससे पहले ही यह मीडिया के सामने आ गई। यह दुर्भाग्यपूर्ण है और हम इसकी निंदा करते हैं।
उन्होंने कहा कि इसके लीक होने को लेकर हम 25 अप्रैल को होने वाली जेपीसी की बैठक में अपनी आपत्ति जताएंगे।
रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा, मैं विपक्ष और मीडिया से अपील करता हूं कि वे अटकलें लगाने से परहेज करें और अंतिम रिपोर्ट आने तथा उस पर संसद में बहस होने तक इंतजार करें।
रिपोर्ट
- टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम की कोई भूमिका नहीं है।
- इन दोनों को पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा ने ‘गुमराह’ किया था। राजा ने जो आश्वासन दिए थे, वे ‘झूठे’ साबित हुए।
- रिपोर्ट में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के 1.76 लाख करोड़ रुपये के नुकसान का निष्कर्ष भी खारिज किया गया है।
‘पूरा टूजी मामला गड़बड़ी से भरा है। मुझे न्यायपालिका में विश्वास है और मैं अपने को निर्दोष साबित कर दूंगा। मैं जेपीसी को नोट भेजूंगा। मुझे उम्मीद है कि वे मुझे बुलाएंगे।’
- ए. राजा, पूर्व दूरसंचार मंत्री
करीब डेढ़ साल की कड़ी मेहनत के बाद मैंने मसौदा रिपोर्ट तैयार की है। यह पक्षपातपूर्ण रिपोर्ट नहीं है, बल्कि तथ्यों और लिखित दस्तावेजों पर आधारित है। मुझे उम्मीद है कि 25 अप्रैल को होने वाली बैठक में यह रिपोर्ट जेपीसी के सभी सदस्यों को स्वीकार होगी।
- पीसी चाको, अध्यक्ष, जेपीसी
अभी जेपीसी की बैठक होनी है और रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर उसे संसद में पेश किया जाना बाकी है। तभी हम चर्चा करेंगे कि रिपोर्ट में जो निष्कर्ष निकाला गया है उसका आधार क्या है, जिसके बारे में अभी तक हम नहीं जानते हैं।
- कपिल सिब्बल, दूरसंचार मंत्री