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बीजेपी-शिवसेना की 25 साल पुरानी दोस्ती टूटी

Fri, 26 Sep 2014 08:06 AM IST
Updated Fri, 26 Sep 2014 08:06 AM IST
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bjp-shivsena 25 years old friendship break now.

बीजेपी-शिवसेना की 25 साल पुरानी दोस्ती टूट गई है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष देवेंद्र फड़वनीस ने पत्रकार वार्ता में कहा कि शिवसेना के साथ हमारी कई दिनों से बातचीत चल रही थी। पर इस पर कोई फैसला नहीं हो पाया है।

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फड़वनीस ने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में हम शिवसेना के खिलाफ प्रचार नहीं करेंगे। पर छोटे सहयोगियो को अपने साथ रखकर चुनाव लड़ेगे। उन्होंने साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र में अब युक्ति के साथ चुनाव नहीं लड़ेगी।
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महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन शनिवार है पर अभी तक भाजपा-शिवसेना ने गठबंधन की तस्वीर साफ नहीं की थी।

उधर शिवसेना के नेता दिवाकर राउते ने कहा कि 148 सीटों पर शिवसेना राजी थी। दिवाकर राउते ने कहा कि महाराष्ट बीजेपी अध्यक्ष देवेंद्र फणनवीस से मिलने आए थे पर महराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष बिना बताए ही चले गए।
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दिवाकर राउते ने कहा कि अगर उनके मन में कुछ था तो बताना चाहिए। राउते ने कहा कि हमने अपने सहयोगी दलों की सीटें बढ़ाई थी। शिवसेना ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर बीजेपी कुछ कड़ा निर्णय करती है तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में नामांकन दाखिल करने में 48 घंटे से भी कम का समय बचा है। पर अभी तक भाजपा-शिवसेना अपने गठबंधन की तस्वीर साफ नहीं कर पाई है।

भाजपा के लिए हो सकती है मुसीबत

bjp-shivsena 25 years old friendship break now.

पिछले कई दिनों से शिवसेना और भाजपा में मचा घमासान थमता दिख रहा था। पर सूत्रों की मानें तो सीटों के बंटवारे पर दोनों दलों और घटक दलों में सहमति नहीं बन पाई है। दोनों राजनीतिक पार्टियां पिछले 25 सालों से एक साथ हैं।

पहले यह खबर आ रही थी कि नए फॉर्मूले के तहत महाराष्ट्र की कुल 288 सीटों में शिवसेना 150 सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि भाजपा 124 सीटों पर चुनाव लड़ने को राजी हो गई है। इसके अलावा घटक दलों को भी सात की बजाय 14 सीटों का ऑफर दिया गया है। पर आज दोनों का गठबंधन टूटने के संकेत मिलने लगे।

इससे पहले बुधवार को बैठकों का दौर चलता रहा। मंगलवार को शिवसेना ने नए प्रस्ताव के तहत भाजपा को 130 सीटों का ऑफर दिया था, लेकिन घटक दलों के लिए सिर्फ सात सीटें ही छोड़ी गई थीं।

इसके चलते घटक दलों की तीन पार्टियों ने अलग होने की धमकी भी दे डाली थी। इसके बाद दिन भर मान मनौव्वल का दौर चलता रहा। बाद में शिवसेना और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को भी बीच में आना पड़ा।

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने खुद घटक दलों के नेताओं महादेव जानकर, राजू शेट्टी और विनायक मेटे से मातोश्री में बात की, जिसके बाद उनके तेवर नरम पड़ गए।

भाजपा-शिवसेना के लिए राहत की बात यह रही कि आरपीआई अध्यक्ष रामदास अठावले ने महागठबंधन में बने रहने के संकेत पहले ही दे दिए थे।

शिवसेना ने घटक दलों को अपने कोटे की एक और सीट का ऑफर देते हुए भाजपा से अतिरिक्त सीट मांगने की सलाह दी थी।

कांग्रेस-एनसीपी का भी गठबंधन टूटा

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भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना का गठबंधन टूटे हुए आधे घंटे का समय नहीं बीता था कि अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने कांग्रेस से अपना गठबंधन तोड़ दिया है।

राष्ट्रीयवादी कांग्रेस पार्टी ने कहा कि वह अपने बूते पर चुनाव लड़ेगी। भाजपा-शिवसेना गठबंधन टूटने के बाद महाराष्ट्र के अगले विधानसभा चुनाव साथ में भाजपा-एनसीपी के बीच गठबंधन के कयास लगाए जा रहे थे, पर एनसीपी ने कहा है कि वह अपने बूते ही चुनाव लड़ेगी।

गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनसीपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ने का ऐलान किया। राज्य के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार बोले कि वह राज्यपाल से मिलने वाले हैं और उन्हें सरकार से अलग होने की सूचना देंगे।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि देश और महाराष्ट्र को धर्म निरपेक्ष सरकार देने के लिए हम कांग्रेस पार्टी के साथ गए थे। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने कांग्रेस नेतृत्व से बार-बार अनुरोध किया कि विधानसभा के लिए अधिक सीटें देने पर जल्दी फैसला लिया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पटेल ने कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने हमें 124 सीटों का प्रस्ताव दिया था, लेकिन हमने बार-बार कहा कि हमें सीटें आधी-आधी ही चाहिए।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर को 288 विधानसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। 19 अक्टूबर को साफ हो जाएगा कि महाराष्ट्र में किसकी सरकार बनेगी। पिछली दो बार से महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी सरकार बन रही है।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन टूटने पर कहा कि देखते हैं कि एनसीपी के नेता वाकई जाकर राज्यपाल से मिलते हैं या यह सिर्फ उनका स्टंट है। प्रफुल्ल पटेल का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। हम अकेले ही चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।

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