BJP-शिवसेना में जारी है शह मात का खेल
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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे के सवाल पर भाजपा और शिवसेना का मतभेद चरम पर पहुंच गया है।
शिवसेना ने 119 से ज्यादा सीटें देने से इनकार करते हुए जहां सभी सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची पर चर्चा की। वहीं भाजपा ने भी दो अलग-अलग सूची तैयार कर ली हैं। अब उसे सोमवार को शिवसेना के अगले कदम का इंतजार है।
भाजपा ने एक सूची 125 उम्मीदवारों की और एक सभी 288 उम्मीदवारों की सूची तैयार की है। सूत्रों की मानें तो शिवसेना सोमवार को अपनी पहली सूची जारी कर सकती है। शिवसेना के इस कदम के बाद ही भाजपा अपने पत्ते खोलेगी।
रविवार को देर रात तक चली केंद्रीय चुनाव समिति और संसदीय बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया है कि अगर शिवसेना अपने रुख पर अड़ी रहती है, तो पार्टी महाराष्ट्र अकेले ही ताल ठोकेगी। संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने महाराष्ट्र के शीर्ष नेताओं से पूरी स्थिति पर चर्चा भी की।
शिवसेना के फॉर्मूले से भाजपा का इंकार
इससे पहले भाजपा ने शिवसेना के फॉर्मूले को खारिज कर दिया। भाजपा इस बार 119 सीटों की जगह 135 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, जबकि शिवसेना 151 सीटों से कम पर चुनाव लड़ने के लिए किसी भी कीमत पर तैयार नहीं है।
दरअसल लोकसभा में सकारात्मक नतीजे आने के बाद दोनों ही दलों को पता है कि विधानसभा चुनाव में अधिक सीटें जीतने वाले दल का ही मुख्यमंत्री बनेगा। इसलिए दोनों ही दल अधिक से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ कर ज्यादा सीटें हासिल करना चाहते हैं।
वैसे भी राज्य इकाई ने बैठक से पूर्व संदेश भेज कर आत्मसम्मान के लिए अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला करने का अनुरोध किया। हालांकि सूत्रों का कहना है कि नई परिस्थितियों में न तो एनसीपी कांग्रेस का दामन छोड़ेगी और न ही शिवसेना और भाजपा अलग-अलग रास्ते पर चलेंगे।
दरअसल एनसीपी आम चुनाव में बेहद कमजोर हो चुकी कांग्रेस पर दबाव डाल कर अधिक सीटें हासिल करना चाहती है, जबकि शिवसेना अधिक सीटों पर चुनाव लड़कर भाजपा से अधिक सीटें जीत कर मुख्यमंत्री पद पर अपना दावा पुख्ता करना चाहती है।
चूंकि भाजपा को भी लगता है कि इस बार महाराष्ट्र में सरकार बनाने का सुनहरा मौका है, इसलिए वह भी शिवसेना की तरह ही अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने और जीतने के बाद मुख्यमंत्री पद अपने हक में सुरक्षित करना चाहती है।