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महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना का जबरदस्त प्रदर्शन

Fri, 16 May 2014 08:14 PM IST
वेद विलास उनियाल/अमर उजाला
वेद विलास उनियाल/अमर उजाला Updated Fri, 16 May 2014 08:14 PM IST
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BJP-Shiv Sena celebrates in Maharashtra

महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा गठबंधन के लिए उमड़ कर मतदान हुआ है। महाराष्ट्र में कांग्रेस और एऩसीपी का सूपड़ा साफ हुआ है। कांग्रेस और एनसीपी राज्य सरकार के प्रति लोगों में नाराजगी काफी समय से बनी हुई थी।

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लोगों की गहरी नाराजगी शिवसेना भाजपा के लिए वोटों के रूप में तब्दील हो, इसके लिए कारगर रणनीति की जरूरत थी। साथ ही इस गठबंधन को मनसे से भी पार पाना था।

आखिर शिवसेना भाजपा ने महाराष्ट्र के किले को फतह करने के लिए हर दांव सही चले।

बीजेपी-शिवसेना का कमाल

BJP-Shiv Sena celebrates in Maharashtra

मनसे नेता राज ठाकरे को नाराज न करना, रिपब्लिकन पार्टी के रामदास अठावले को गठबंधन से जोड़ना, शिवसेना भाजपा पार्टी में आतंरिक स्तर पर मतभेद को दूर करना और मुद्दों पर स्पष्ट रहना नीतिगत फैसले थे।

इसके साथ शिवसेना भाजपा गठबंधन ने इस बार उत्तर भारतीय मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने में सफलता पाई। खासकर उत्तर मध्य मुंबई में भाजपा की पूनम महाजन की जीत इस बात का पूरा संकेत करती है कि उत्तरभारतीयों ने भाजपा शिवसेना के लिए खुलकर मतदान किया।

महाराष्ट्र में इस बार कयास लग रहा था कि शिवसेना भाजपा  को बेहतर परिणाम मिलेंगे। हालांकि कुछ लोग इसे शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के निधन से उपजी सहानुभति की लहर मान सकते हैं।

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शिवसेना के प्रदर्शन में सुधार

BJP-Shiv Sena celebrates in Maharashtra

शिवसेना ने अपने प्रचार में बार-बार बाल ठाकरे को याद किया। मगर महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या, कुशासन, विदर्भ, मराठवाड़ा में सिंचाई के लिए पानी की कमी, विकास के काम ठप्प पड़ने और कहीं न कहीं कांग्रेसी नेताओं का अहंकार आड़े हाथ आया।

साथ ही आम लोगों तक यह बात पहुंचती रही कि एनसीपी और कांग्रेस में आपसे रिश्तों में तल्खी आई हुई है। यहां तक कि बीच बीच में कई बार एनसीपी के एनडीए सरकार में शामिल होने की बात होती रही।

आखिर कांग्रेस और एनसीपी साझे में चुनाव तो लड़े लेकिन उनके बीच सहजता नहीं दिखी। यहां तक कि जब मुंबई में एक सभा में सोनिया गांधी नहीं पहुंच सकीं तो उनकी जगह राहुल गांधी के आने की सूचना के बाद शरद पवार का जहाज भी उड़ान नहीं भर सका।

कहा यही गया कि शरद पवार, राहुल गांधी को  अपने नेता के रूप में इतनी अहमियत नहीं देना चाहते। आखिर लोगों को कांग्रेस और एनसीपी में कोई आस नजर नहीं आई।  महाराष्ट्र में नरेंद्र मोदी ने लोगों को झकझोरने में कोई कमी नहीं की। वे महाराष्ट्र के हर इलाके में अपनी सभाओं को करके लौटे।

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मोदी लहर का असर

BJP-Shiv Sena celebrates in Maharashtra

बहुत साफ है कि मोदी लहर और महाराष्ट्र में कांग्रेस शासन के कुशासन के खिलाफ वोट पड़े। सपा की उपस्थिति ने भी कांग्रेस को धक्का पहुंचाया। खासकर मुस्लिम वोट बंटने से प्रिया दत्त को हारना पड़ा।

इसी तरह संजय निरूपम अपने उत्तर भारतीय आधार को संजो कर नहीं रख सके। महाराष्ट्र में नतीजे पूरी तरह एकतरफा रहे। आने वाले विधानसभा चुनाव में इसकी थाह समझी जा सकती है। लोग यहां किसी भी तरह परिवर्तन चाहते थे।

भाजपा शिवसेना की लहर इस कदर दिखी कि जिस आरएसएस के गढ़ नागपुर में 1996 से कोई नहीं जीता, वहां भी पार्टी को सफलता मिली।

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