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बिहार के लिए भाजपा ने तय किया 'मिशन 185'

Mon, 12 Jan 2015 08:57 AM IST
Updated Mon, 12 Jan 2015 08:57 AM IST
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BJP set mission 185 for Bihar

लोकसभा चुनाव के बाद चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में दमदार प्रदर्शन करने के बाद भाजपा ने बिहार के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है। रविवार को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में बिहार इकाई की कोरग्रुप की बैठक में इसी साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए मिशन 185 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। शाह ने राज्य इकाई के नेताओं को सूबे में हर हाल में 75 लाख सदस्य बनाने का निर्देश दिया है।

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सदस्यता अभियान में तेजी लाने के लिए शाह खुद 23 और 24 जनवरी को बिहार दौरे पर होंगे। पूरी तरह से चुनावी मोड़ में आने के लिए पार्टी ने सूबे की राजधानी पटना में 14 अप्रैल को बड़ी रैली करने की योजना बनाई है। इस रैली को शाह भी संबोधित करेंगे। बैठक में जनता परिवार में विलय की कोशिशों और खास कर जदयू-राजद में विलय के बाद की स्थिति पर भी गंभीर मंथन हुआ।
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इस दौरान बैठक में उपस्थित संगठन सह महासचिव सौदान सिंह, राज्य के प्रभारी भूपेंद्र यादव, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, राजीव प्रताप रूडी, रामकृपाल यादव, प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडे, पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी ठाकुर,  पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने भी भावी रणनीति पर अपनी अपनी राय पेश की। बैठक में खासतौर पर जदयू-राजद विलय की स्थिति में जातिगत समीकरण साधने पर चर्चा हुई।

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शाह खुद करेंगे बिहार का दौरा

BJP set mission 185 for Bihar

इसी साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सूबे की 243 में से 185 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। कोरग्रुप की बैठक में शाह ने मिशन 185 पूरा करने के लिए शिद्दत के साथ सदस्यता अभियान चलाने और जून महीने तक हर बूथ पर चाकचौबंद व्यवस्था करने की हिदायत दी है।

सदस्यता अभियान में कोई कमी न रहे, इसलिए शाह खुद बिहार का दौरा कर स्थिति का जायजा लेंगे। पार्टी सूत्रों ने बताया कि सदस्यता अभियान के अलावा बैठक में जनता परिवार में विलय पर चर्चा हुई। इस दौरान तय किया गया कि नीतीश और लालू के भावी मिलन को जनता के बीच अवसरवादियों का मिलन कह कर प्रचारित किया जाय।

इसके अलावा मतदाताओं को लालू राज के दौरान कथित अराजकता की भी याद दिलाई जाए। बैठक में शामिल एक नेता ने बताया कि दरअसल लालू-नीतीश का मिलन का असर अगर जमीनी स्तर पर मजबूती से दिखेगा तो पार्टी के लिए मुश्किल होगी। यही कारण है कि पार्टी भी जातिगत समीकरण को साधने खासतौर पर राजद के मुस्लिम-यादव समीकरण और नीतीश के कुर्मी-महादलित समीकरण को ध्वस्त करने के लिए पूरी ताकत लगाएगी।

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