'कांग्रेस के मुंह से लोकतंत्र सुनना जैसे शैतान से बाइबिल सुनना'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कांग्रेसी सांसदों के निलंबन के सवाल पर सरकार और विपक्ष के बीच सुलह सफाई के आसार बनते नहीं दिख रहे। स्पीकर सुमित्रा महाजन की कार्रवाई के एक दिन बाद भाजपा ने न केवल इस फैसले का समर्थन किया, बल्कि सीधे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर हमला बोला।
पार्टी ने संसदीय दल की बैठक में कांग्रेस सांसदों के आचरण के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर विपक्ष के समक्ष न झुकने के साफ संकेत भी दे दिए।
हालांकि, लोकसभा में मंगलवार को बीजेडी और एआईएडीएमके ने स्पीकर से निलंबन वापस लेने की मांग की। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने भी इस दिशा में कोशिश की, मगर खुद स्पीकर अपना फैसला बदलने के लिए तैयार नहीं थीं।
फैसला बदलने की बीजेडी, अन्नाद्रमुक की मांग को स्पीकर ने किया अनदेखा
संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने भी यह कह कर विपक्ष के सामने न झुकने का संकेत दे दिया कि फैसला स्पीकर का है सरकार का नहीं। इसलिए इस संबंध में कोई भी फैसला स्पीकर को ही करना है।
संसदीय दल की बैठक के बाद पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रकाश जावड़ेकर ने निलंबन का इतिहास गिनाते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि महज इंदिरा गांधी ही हत्या की जांच रिपोर्ट सदन में पेश करने की मांग कर रहे विपक्ष के 63 सदस्यों को राजीव सरकार के दौरान निलंबित करने वाली कांग्रेस को दूसरों को लोकतंत्र का उपदेश नहीं देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मुंह से लोकतंत्र सुनना शैतान के मुंह से बाइबिल सुनने की तरह है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि जिस पार्टी में मां अध्यक्ष और बेटा उपाध्यक्ष हो, उससे भाजपा को लोकतंत्र सीखने की जरूरत नहीं है।
स्पीकर के फैसले को उचित ठहराते हुए उन्होंने कहा कि बिना वजह कृत्रिम मुद्दा खड़ा कर सदन की कार्यवाही न चलने देना गैरकानूनी है।
भाजपा ने तब यूपीए सरकार के मंत्रियों का इस्तीफा मांगा था, जब कैग की रिपोर्ट में मंत्रियों की भूमिका पर अंगुली उठी थी और सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को फटकार लगाई थी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की जिद बेहद अजीब है। उसका कहना है कि भाजपा ने विपक्ष में रहते यूपीए सरकार के छह मंत्रियों का इस्तीफा करवाया था, इसलिए मोदी सरकार के भी तीन मंत्रियों को जाना चाहिए। क्या संसद में 50 फीसदी का डिस्काउंट ऑफर चल रहा है।