हार्दिक पटेल को सियासी नुकसान नहीं मान रही भाजपा
गुजरात में भड़के पटेल आरक्षण के विवाद से सियासी नफे नुकसान पर भाजपा आलाकमान बेशक मौन है। मगर सूबे के हालातों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजर लगातार बनी हुई है।
सूबे के हालातों को काबू में लाने में पीएम की भूमिका भी अहम बताई जा रही है। पीएमओ सूत्रों के अनुसार मंगलवार को संदेश जारी करने से पहले पीएम मोदी ने खुद सूबे के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर स्थिति की जानकरी लेते हुए हालातों पर काबू पाने के निर्देश दिए।
बुधवार देर रात सरकार के शीर्ष मंत्रियों के साथ गुजरात के हालातों पर पीएम ने बैठक कर स्थिति का आंकलन भी किया इसके अलावा भारत सरकार का गृह मंत्रालय और एनडीआरएफ प्रमुख सुबे के गृह मंत्रालय से विडियो कांफ्रेसिंग के जरिए लगातार संपर्क में हैं।
सियासी असर की चर्चा तेज
इस बीच आंदोलन के सियासी असर को भी लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
रातों-रात करीब 10 लाख की भीड़ जुटाकर नायक बने हार्दिक पटेल की सफलता के
राज को लेकर सियासी गलियारे में चर्चा जोरों पर है।
इसे भाजपा के अंदरूनी
राजनीति से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। हार्दिक की तस्वीर विहिप नेता
प्रवीण तोगड़ीया के साथ होने की दलील देकर उनके ओर इशारा जताया जा रहा है।
हालांकि विहिप ने इस बात से इंकार किया है। वैसे हार्दिक के पीछे भाजपा के
एक केंद्रीय नेता के हाथ होने की आशंका की चर्चा जोरों पर है। हार्दिक के
पटेल आंदोलन से भाजपा सियासी नुकसान नहीं मान रही है।
क्या बरकरार रहेगी हवा?
मगर आंदोलन ने विकास
के गुजरात मॉडल पर विपक्ष को सवाल उठाने का मौका थमा दिया है। बताया जा रहा
है कि बिहार विधानसभा चुनाव में इससे पार्टी के सियासी रणनीति पर भी असर
पडे़गा।
हालांकि भाजपा आलाकमान की ओर से हार्दिक के प्रभाव को कम करने
के प्रयास शुरू हो गए हैं। सरकार उनके इतिहास को खंगाल रही है। उनके पुराने
कारनामों को उभारकर मिल रहे जनसमर्थन को कमजोर बनाने का प्रयास होगा।
सियासी नफे-नुकसान पर पार्टी का आकलन है कि सूबे के विधानसभा चुनाव 2017 के
अंत में होने हैं। तब तक हार्दिक की हवा बरकरार नहीं रह पाएगी।
तर्क हो रहे खारिज
उग्र
आंदोलन की राह पकड़ने के कारण वे जल्द ही बेअसर हो जाएंगे। भाजपा की ओर से
इस बात के प्रचार पर अभी से जोर दिया जाने लगा गया है कि हार्दिक के पीछे
विकास की राजनीति को पटरी से उतारने वाले सियासी दल खडे़ हैं।
पार्टी के एक
शीर्ष नेता ने इस बात की ओर इशारा करते हुए कहा है कि आंदोलन के दौरान
पकड़े गए काफी लोग ऐसे हैं जोकि न तो पटेल समाज से हैं और न ही उनका संबंध
गुजरात से है। उक्तत नेता का कहना है कि अहमदाबाद रैली में पहुंची अधिकांश
भीड़ गुजरात के बाहर की थी।
भाजपा का इशारा साफ तौर बिहार के मुख्यमंत्री
नीतीश कुमार और विपक्षी कांग्रेस पर है। लेकिन सियासी जानकार भाजपा के तर्क
को मंजूर नहीं कर रहे। नीतीश और कांग्रेस दोनों में ही इतनी ताकत नहीं कि
वे अहमदाबाद में इतनी भीड़ किसी और जगह से भेज सकें।