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मास्टर स्ट्रोक: शिवसेना पर भाजपा की रणनीतिक जीत

Fri, 26 Sep 2014 08:04 AM IST
Updated Fri, 26 Sep 2014 08:04 AM IST
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BJP's strategic victory on Shiv Sena.

25 बरस की दोस्ती 22 दिनों में टूट गई। महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा के रिश्तों की यह नई इबारत है।

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सीटों के बंटवारे और मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवसेना की जिद जिस तरह से संघर्ष को लंबा खींच रही थी, वही उसके गले की फांस बन गई।

27 तारीख को विधानसभा चुनावों के नामांकन का आखिरी दिन है और भाजपा ने छोटे सहयोगियों को लेकर अपनी राह बढ़ जाने का फैसला करके मास्टर स्ट्रोक लगाया है।

असल में भाजपा ने शिवसेना को दादागिरी करने पर करारा सबक सिखाया है। भाजपा सूत्रों के अनुसार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उद्धव के रवैये को काफी गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र चुनाव के लिए काफी पहले रणनीति तैयार कर ली थी।

बीजेपी ने पहले ही बना ली थी रणनीति

BJP's strategic victory on Shiv Sena.

नई दिल्ली में हुई भाजपा संसदीय बोर्ड और चुनाव समिति की बैठकों में पार्टी ने पहले ही राज्य की सभी 288 सीटों के लिए उम्मीदवार तय कर लिए थे।

भाजपा राज्य में अपनी स्थिति का आकलन कर चुकी है और उसे छोटे सहयोगी दलों को 20 से 25 सीटें देने में कोई गुरेज नहीं होगा, जबकि ‘महायुति’ के अपने समीकरणों में शिवसेना ने इन दलों 10 सीटों तक समेट दिया था।

ऐन मौके पर शिवसेना की मुश्किल यह है कि वह कैसे सभी सीटों के लिए उम्मीदवार तलाशे। ऐसे में खिलाड़ियों को बिना परखे ही उसे मैदान में उतारना होगा।

भाजपा के फैसले ने शिवसेना को बैकफुट पर ला दिया है। जहां वह भविष्य में गलती पर गलती कर सकती है। यही आज भाजपा के नेता चाहते हैं। उद्धव के सामने अब पार्टी को बिखरने से बचाने का संकट भी खड़ा होगा। ‘बाघ’ के सिर पर अब शिकार हो जाने का संकट मंडरा गया है।

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क्या होगी विधानसभा की शक्ल?

BJP's strategic victory on Shiv Sena.

चुनाव पूर्व सर्वे बता रहे हैं कि राज्य में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिलेगा। भाजपा को सबसे ज्यादा सीटें मिलेंगी। राज ठाकरे को इसी बात का इंतजार है।

भाजपा भी यदि राज से बात करती है तो लोकसभा चुनावों की तरह उद्धव शिकवा नहीं कर सकेंगे। यह संगम शिवसेना के लिए बड़ा झटका होगा।

जानकारों का मानना है कि शरद पवार की एनसीपी में नाखुश चल रहे उनके भतीजे अजित पवार तक मौका आने पर पार्टी तोड़ के भाजपा को बाहर से समर्थन दे सकते हैं।

वैसे इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि चुनाव के दौरान भाजपा-शिवसेना के बीच कड़वाहट नहीं बढ़ी तो दोनों परिणामों के बाद फिर गले मिल जाएं। तब शिवसेना को उपमुख्यमंत्री पद देकर संतुष्ट किया जा सकता है।

ऐसे में तय हो जाएगा कि उद्धव की पार्टी ने भाजपा को ‘बिग ब्रदर’ मान लिया है। यहां से महाराष्ट्र की राजनीति हमेशा के लिए बदल जाएगी।

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