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भाजपा को सता रही चिंता, कहीं 'हीरो' न बन जाएं हार्दिक

Sat, 05 Dec 2015 09:44 AM IST
Updated Sat, 05 Dec 2015 09:44 AM IST
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BJP's concern elsewhere hardil may hero

गुजरात निकाय चुनाव में ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस को मिली बढ़त ने भाजपा को बेचैन कर दिया है। ग्रामीण इलाकों में हुए नुकसान के लिए पार्टी अब पटेल आंदोलन की भूमिका को दबी जुबान स्वीकार कर रही है। पार्टी की असली चिंता इस आंदोलन के अगुआ हार्दिक पटेल है। पार्टी को डर है कि कहीं जेल से बाहर आ जाने के बाद हार्दिक राज्य में सियासी हीरो न बन जाएं।

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पार्टी दबी जुबान यह भी स्वीकार कर रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अध्यक्ष अमित शाह के राज्य की सियासत से बाहर आने केबाद सूबे में स्थिति गड़बड़ाई है।
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मुश्किल यह है कि फिलहाल पार्टी के पास मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल का कोई ठोस विकल्प नहीं है। शाह को बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्ण कार्यकाल मिलना तय है। राज्य में अन्य कोई नेता ऐसा नहीं है जिसकी छवि कद्दावर हो।
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लेकिन खानी पड़ी मुंहकी

BJP's concern elsewhere hardil may hero

गौरतलब है कि निकाय चुनाव में भाजपा शहरी इलाकों में तो अपना प्रभाव कायम रखने में सफल रही, मगर ग्रामीण इलाकों में उसे कांग्रेस के हाथों मुंहकी खानी पड़ी। खासतौर से पटेल बाहुल्य ग्रामीण इलाकों में भाजपा को ज्यादा सियासी नुकसान उठाना पड़ा।

पार्टी को लगता है कि पटेल आरक्षण आंदोलन की मुहिम छेड़ने वाले हार्दिक के खिलाफ निपटने में ज्यादा सियासी चतुराई दिखानी चाहिए थी।

पार्टी के एक वरिष्ठ महासचिव के मुताबिक पटेल के खिलाफ देशद्रोह और सरकार के खिलाफ युद्घ छेड़ने जैसी धाराओं में केस दर्ज किया गया। इससे पटेल समुदाय की नाराजगी और बढ़ गई।

फिर झेल रहे हैं नाराजगी

BJP's concern elsewhere hardil may hero

अब निकाय चुनाव के बाद डर इस बात का है कि सरकार के खिलाफ युद्घ छेड़ने के आरोप से पहले ही बरी हो चुके पटेल जेल से निकलने के बाद कहीं सियासी हीरो न बन जाएं।

पार्टी के सामने ठीक ऐसी ही स्थिति तब आई थी तब पटेल बिरादरी के ही वरिष्ठ नेता केशुभाई पटेल ने बगावत का बिगुल फूंका था। हालांकि तब तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान पीएम मोदी का सियासी और रणनीतिक कौशल केशुभाई की बगावत पर भारी पड़ा था।

हालांकि अब जबकि पार्टी दूसरी बार फिर से पटेल समुदाय की नाराजगी झेल रही है तब राज्य में संगठन के कौशल से इस स्थिति से पार लगाने की ताकत रखने वाली सियासी शख्सियत पार्टी के पास नहीं है।

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