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'आप' के खिलाफ चल पाएगा भाजपा का यह दांव

Thu, 15 Jan 2015 07:06 PM IST
Updated Thu, 15 Jan 2015 07:06 PM IST
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BJP's big bet to defeating Kejriwal

दिल्ली चुनावों में आम आदमी से मिल रही कड़ी टक्कर को देखते हुए भाजपा ने केजरीवाल की पुरानी साथी किरण बेदी को पार्टी में शामिल कराकर बड़ा दांव चल दिया है।

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दिल्ली चुनावों को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना चुकी भाजपा दिल्ली में बहुत दिनों से केजरीवाल के मुकाबले किसी दमदार चेहरे की तलाश में थी ऐसे में अन्ना आंदोलन का बड़ा चेहरा रही किरण बेदी के रूप में उसकी यह तलाश पूरी हो गई है।
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माना जा रहा है पार्टी आगामी दिल्ली चुनावों में किरण को मुख्यमंत्री के तौर पर भी प्रोजक्ट कर सकती हैं। वहीं भाजपा के इस कदम से दिल्ली में उसकी प्रमुख प्रतिद्वंदी आम आदमी पार्टी को भी बड़ा झटका लगा है क्योंकि अभी तक केजरीवाल किसी ईमानदार और काबिल चेहरे को लेकर भाजपा को चुनौती देते रहे थे, उनके इस दांव से भाजपा कई बार खुद को असहज भी महसूस करती रही है लेकिन अब शायद केजरीवाल का यह दांव न चल पाए।

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भाजपा ने आप पर बनाई मनोवैज्ञानिक बढ़त

BJP's big bet to defeating Kejriwal

दूसरी ओर भाजपा ने इस दांव के साथ ही एक तरह से अरिंवद केजरीवाल पर मनोवैज्ञानिक बढ़त भी ले ली है क्योंकि किरण बेदी भी उसी अन्ना आंदोलन के बाद दुनियाभर में ज्यादा प्रसिद्ध हुई जिससे ऊर्जा पाकर अरविंद केजरीवाल ने राजनीतिक पारी की शुरूआत की।

वहीं किरण बेदी को पार्टी में आने से भाजपा को बड़ा फायदा मिल सकता है क्योंकि अपने 40 साल के प्रशासनिक जीवन में किरण बेदी ने लंबा समय दिल्‍ली में बिताया है। जहां वह अपनी दबंग और बेदाग छवि को लेकर काफी प्रसिद्ध भी हुई।

ऐसे में अपनी बेदाग और जुझारू छवि के चलते दिल्‍ली की राजनीति में करिश्मा करने वाले अरविंद केजरीवाल की तरह ही पूर्व आईपीएस किरण बेदी से भी भाजपा को ऐसी ही उम्‍मीदें हैं।

दूसरे ओर इस कदम के सहारे भाजपा उस उलझन से भी निकल सकती है जिसमें केजरीवाल अपने सामने भाजपा का कोई चेहरा न होने का तंज कसते रहते थे। ऐसे में किरण बेदी भाजपा को दिल्‍ली में वह ऊर्जा भी दे सकती हैं जिसकी उसे लंबे समय से जरूरत थी। हालांकि भाजपा में अंदरखाने इस निर्णय को लेकर विरोध शुरू होने की भी आशंका है क्योंकि पूर्व में दिल्‍ली के भाजपा नेता और सांसद प्रवेश वर्मा आदि इस निर्णय की मुखालफत करते रहे हैं।

बोली किरण बेदी, 'मैं अभी मिशन मोड में हूं'

BJP's big bet to defeating Kejriwal

हालांकि किरण बेदी के भाजपा में आने की अटकलें काफी समय से लगाई जा रहीं थी, लेकिन दोनों ओर से इस मामले में कोई पुख्ता पहल नहीं हो सकी थी। किरण बेदी को शुरू से ही भाजपा समर्थक माना जाता रहा है।

अन्ना आंदोलन के दौरान भी किरण बेदी का अन्य पार्टियों के मुकाबले भाजपा के प्रति रुख नरम रहा था। केजरीवाल और आंदोलन के बाकी साथियों द्वारा मिलकर राजनीतिक दल बनाने के बाद किरण बेदी कुछ अलग थलग सी हो गई थीं।

इसके बाद उन्होंने 2012 में इंडिया अंगेस्ट करप्सन संगठन से भी नाता तोड़ लिया था। ऐसे में भाजपा के साथ नई पारी शुरू करने के साथ ही किरण बेदी ने राजनीति में पूरे दमखम के साथ उतरने की घोषणा कर दी है।

पार्टी की ओर से उन्हें प्रत्याशी भी बनाया जाएगा, ऐसे में यह भी तय है कि उन्हें जल्द ही कोई बड़ी जिम्मेदारी भी दी जा सकती है। इस बात का एहसास किरण बेदी को भी है इसका अंदाजा उनकी इस बात से ही हो जाता है कि जब उन्होंने पार्टी ज्वाइन करते ही कह दिया कि अभी वह मिशन मोड में हैं और दिल्‍ली चुनाव उनका पहला लक्ष्य है।

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