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आडवाणी-जोशी को लेकर बीजेपी में मंथन

Wed, 14 May 2014 06:06 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 14 May 2014 06:06 PM IST
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BJP puzzle over Advani-Joshi

भले ही अभी चुनाव परिणाम नहीं आए हैं। लेकिन चुनावों के बाद आए एग्जिट पोल ने जो तस्वीर दिखाई है उसमें बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन की बल्ले-बल्ले नजर आ रही है। ऐसे में पार्टी को बस इसके हकीकत में बदलने के इंतजार है।

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रिजल्ट्स से पहले ही बीजेपी ने नई सरकार को लेकर अपनी तैयारी शुरू कर दी है। किसे कौन सा विभाग देना है इस पर माथापच्ची का दौर जारी है। इन सबके बीच पार्टी की टेंशन वरिष्ठ नेताओं को लेकर भी है।
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बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी की भूमिका को लेकर पार्टी ने अबतक कोई फैसला नहीं लिया है। आखिर नई सरकार में उनकी जिम्मेदारियां क्या होंगी इसको लेकर बैठकों का दौर शुरू हो चुका है।

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सीनियर-जूनियर का विवाद!

BJP puzzle over Advani-Joshi

बीजेपी के लिए यह मामला इसलिए भी पेचीदा है, क्योंकि चुनाव परिणाम में अगर बीजेपी को जीत मिलेगी तो सत्ता नरेंद्र मोदी के ही हाथ में जाएगी। ऐसे हालात में एक बार फिर से सीनियर और जूनियर की जंग नजर आ सकती है।

यानी पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के लिए मोदी की सरकार में काम करना थोड़ा मुश्किल होगा। दोनों नेताओं ने पहले भी मोदी की पीएम उम्मीदवारी का विरोध किया था।

फिलहाल पार्टी ने इस मामले को संभालने की जुगत शुरू कर दी है। किसी भी विवाद से निपटने के लिए पार्टी ने आडवाणी को एनडीए का चेयरमैन बनाने पर विचार कर रही है। हालांकि ऐसा होने पर क्या आडवाणी की वही हैसियत और ताकत रहेगी जो वाजपेयी सरकार के दौरान रही थी। इसको लेकर आशंका जताई जा रही है।

इस बीच नितिन गडकरी ने पार्टी के दोनों वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से मंगलवार को अलग-अलग मुलाकात की। पार्टी सूत्रों का कहना है कि गडकरी ने दोनों दिग्गजों से नई सरकार में उनकी भूमिका को लेकर बात की है।

आरएसएस लेगा फैसला?

BJP puzzle over Advani-Joshi

इससे पहले सोमवार को नितिन गडकरी ने अहमदाबाद में नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। वहीं बुधवार को गडकरी, राजनाथ सिंह और अरूण जेटली के साथ गांधीनगर में मुलाकात है। जिसमें इस मुद्दे पर कोई आखिरी फैसला लिया जा सके।

वहीं पार्टी के एक गुट के मुताबिक इस मामले को आरएसएस को संभालना चाहिए। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर आरएसएस में बैठक हो सकती है। जिसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत समेत संघ से जुड़े दूसरे नेता इस मुद्दे पर कोई फैसला ले सकते हैं।

हालांकि संघ इन दोनों वरिष्ठ नेताओं के बारे में क्या तय करेगा ये तो कहना मुश्किल है। लेकिन आरएसएस ने पहले ही साफ कर दिया था कि पार्टी के उम्रदराज नेता नए लोगों के लिए जगह खाली करें।

ऐसे में नई सरकार में आडवाणी-जोशी की भूमिका पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।

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