भूमि बिल पर विरोधियों से ऐसे निपटेगी भाजपा
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सोमवार से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र के दूसरे हिस्से में भूमि अधिग्रहण बिल पर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी तकरार जमकर दिखेगी। बिल पर कांग्रेस केसख्त तेवर देख सरकार के रणनीतिकार पलटवार की तैयारी में हैं।
सरकार भूमि बिल पर जवाहर लाल नेहरू के बयानों और प्रमुख भाषणों को ढाल बनाकर कांग्रेस का वार धराशायी करेगी। वहीं वाम दलों का विरोध कुंद करने के लिए रूस और चीन के जमीन अधिग्रहण नियमों का हवाला दिया जाएगा।
संसदीय मामलों के राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी का कहना है कि भूमि बिल गांव के विकास के लिए है। वहीं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि कांग्रेस को आइना दिखाने के लिए हम नेहरू के भाषणों को खंगाल रहे हैं।
हीराकुंड बांध पर नेहरू के भाषण को ढाल बनाएगी सरकार
सूत्र बताते हैं कि उनके सहयोगियों ने उड़ीसा में बने देश के पहले बांध हीराकुंड की विस्थापन की समस्या पर संसद में नेहरू के भाषण को निकाल लिया है। उस समय भी किसानों ने जमीन देने से हाथ खडे़ कर लिए थे।
सन 1948 में हीराकुंड बांध के विस्थापित ग्रामीणों से बातचीत में नेहरू ने कहा था कि यदि आप प्रभावित हो रहे हैं, तो देश हित में प्रभावित हो रहे हैं। वहीं नागार्जुन बांध के उद्घाटन पर नेहरू ने कहा था कि यह भारत में मानवता के मंदिर का उद्घाटन है।
हालांकि भूमि अध्यादेश पर सरकार की ओर से जोर आजमाइश सत्र के आखिरी दिनों में होगी। इससे पहले, सरकार जीएसटी सरीखे अहम बिलों को पारित कराने की तैयारी में है।