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कांठ में भाजपा की सियासत हुई फेल

Wed, 16 Jul 2014 10:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद Updated Wed, 16 Jul 2014 10:03 AM IST
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bjp politics failed in kanth

केंद्र में सरकार बनी तो मंडल में भी सांसदों से सजी भाजपाई टीम का मनोबल उफान पर पहुंच गया। टुकड़ों में बंटी पार्टी की स्थानीय इकाई कमजोर तो थी लेकिन उत्साह के पंख लगे तो लंबी उड़ान को जी मचलने लगा। हाथ के हाथ कांठ में लाउडस्पीकर का मुद्दा मिल गया। फिर क्या था दलित वोटों पर पासा फेंकने के लिए बड़ी-बड़ी बातें शुरू हो गईं और लगे हाथ महापंचायत का ऐलान कर दिया गया। महापंचायत तो नहीं हो सकी लेकिन चार जुलाई की तारीख ने ऐसे बवाल को जन्म दे दिया जिसकी आंच अबतक महसूस की जा रही है।

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कांठ स्टेशन पर इस दिन जमकर बवाल हुआ। जिलाधिकारी की आंख की रोशनी चली गई जो अबतक ठीक नहीं हुई। पुलिस ने भी जिन्हें महापंचायत में शामिल होने से रोकने के लिए गिरफ्तार किया था उन्हीं 62 लोगों को बलवा और बवाल का अभियुक्त बनाकर जेल भेज दिया। भाजपाइयों पर थाने में अत्याचार भी जमकर हुआ था जिसकी एक-एक पीड़ा अब उन बड़े नेताओं के बयानों से जाहिर हो रही है जिन्होंने महापंचायत का ऐलान तो किया लेकिन जेल जाने से बच गए। कुछ अनुभवी तो ऐसे भी थे जिन्होंने बवाल का रुख भांपकर पहले ही शहर छोड़ दिया था।
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खैर भाजपा ने लाउडस्पीकर का मूल झगड़ा तो छोड़ दिया लेकिन कार्यकर्ता नाराज न हों इसलिए पार्टी के बड़े नेताओं को जेल पर लाने का सिलसिला शुरू हो गया। गाड़ियां आ रही हैं, जिंदाबाद...मुर्दाबाद हो रहा है और कुछ मिनट जेल में कार्यकर्ताओं के बीच बिताकर नेता बाहर निकल रहे हैं। उनके बयान कैमरों की फ्लैश लाइट के साथ शुरू हो रहे हैं और उसी के साथ बंद। इसी कड़ी में 12 जुलाई को यहां भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी पहुंचे।
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कांठ में इज्जत बचाने में लगी भाजपा

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पत्रकार वार्ता में एसएसपी को नागिन की तरह आंखों में उतारने की बात कही और जिलाधिकारी से मिलकर धरने का कार्यक्रम सौंपा। आंदोलन की यह रूपरेखा उन्होंने खुद तय की थी। इसी नए ऐलान से शासन और प्रशासन फिर घबराया और तैयारियों में जुट गया। इधर भाजपाइयों में धुकधुकी बढ़ गई क्योंकि पिछला झटका झेलने के बाद नया आघात झेलने को उनका मन तैयार नहीं था। इस थोपे गए धरने से स्थानीय नेता खुद ही किनारा करने के मूड में दिखने लगे। तभी तो धरने की अनुमति लेने के लिए कोई जोरदार पैरवी नहीं हुई। कोई नामी नेता भी अनुमति लेने नहीं पहुंचा।

पहले वकील के माध्यम से फिर एक पदाधिकारी के पैड पर शर्तों पर धरना देने को भाजपा तैयार हो गई थी। लेकिन 14 जुलाई की शाम को प्रशासन ने धरने की अनुमति देने से इंकार कर दिया। यही वह क्षण था जब भाजपा आंदोलन की कहानी में ट्विस्ट आ गया। जिस प्रदेश अध्यक्ष ने धरने का ऐलान किया उन्होंने कह दिया कि अब लोकल इकाई फैसला करे। देर रात जब लोकल भाजपाइयों से बात हुई तो सभी वेट एंड वाच की भूमिका में होने का बयान तो अखबार के लिए दिया लेकिन अंदरखाने साफ कर दिया कि यह धरना होने वाला नहीं। हुआ भी यही कलेक्ट्रेट और कमिश्नरी पुलिस छावनी में तब्दील कर दी गई थी क्योंकि अगर भाजपाई आएंगे तो उन्हें रोका जाएगा लेकिन किसी ने ऐलानिया जगह की ओर रुख नहीं किया। हां, इज्जत बचाने के लिए इतना जरूर कह दिया गया कि अब प्रदर्शन संभल में होगा।

अभी तक ये पहुंचे जेल
प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, सुल्तानपुर सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री वरुण गांधी, नगीना सांसद डा. यशवंत, रामपुर सांसद डा. नैपाल सिंह, संभल सांसद एडवोकेट सत्यपाल सैनी, मुरादाबाद सांसद कुंवर सर्वेश सिंह, अमरोहा सांसद कंवर सिंह तंवर, बिजनौर सांसद डा. भारतेंदु, प्रदेश महामंत्री पंकज सिंह, शाहजहांपुर विधायक सुरेश खन्ना, थाना भवन शामली विधायक सुरेश राणा, बरेली विधायक डा. अरुण कुमार सक्सेना, आंवला विधायक धर्मपाल सिंह, नूरपुर विधायक लोकेंद्र चौहान, भाजपा के क्षेत्रीय विभाग संगठन मंत्री प्रद्युमन, पूर्व सांसद चेतन चौहान, प्रदेश महामंत्री स्वतंत्र देव सिंह और अनुसूचित मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष गौतम चौधरी मुरादाबाद आकर बयानबाजी कर चुके हैं।

कमिश्नरी में पुलिस की सख्ती से घबराई भाजपा

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प्रशासन के प्रतिबंध और पुलिस की सख्ती से बैकफुट पर आई भाजपा मंगलवार को कमिश्नरी पर पूर्व घोषित धरना प्रदर्शन नहीं कर सकी। प्रदेश अध्यक्ष के जेल भरो आंदोलन के ऐलान के बावजूद भाजपा का कोई भी नेता और कार्यकर्ता मंडलायुक्त दफ्तर तक नहीं पहुंचा। कमिश्नरी के छावनी में तब्दील होने से भाजपाई घरों से निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सके। अलबत्ता संभल में प्रदर्शन कर भाजपा ने झेंप मिटाने की कोशिश की। लगे हाथ नेताओं ने ऐलान भी कर दिया कि अब आंदोलन नहीं प्रदर्शन होगा। संभल के बाद रामपुर, अमरोहा और बिजनौर जनपदों में भी कार्यकर्ता प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपेंगे।

कांठ के गांव अकबरपुर चैदरी में मंदिर से उतरे लाउडस्पीकर को मुद्दा बनाकर दलितों को साधने निकली भाजपा की महापंचायत का ऐलान चार जुलाई में कांठ को पहले ही जला चुका है। भाजपा के भी 60 कार्यकर्ता जेल में हैं। 12 जुलाई को मुरादाबाद आए प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा था कि एसएसपी को नागिन की तरह आंखों में उतार लिया है, बदला लेंगे, आंदोलन करेंगे और जेलें भरेंगे। उन्होंने घोषणा की थी कि 15 जुलाई से 30 जुलाई तक मुरादाबाद कमिश्नरी पर भाजपा धरना प्रदर्शन कर गिरफ्तारियां देगी। कांठ बवाल से सतर्क प्रशासन ने सोमवार रात को इसकी अनुमति देने से इंकार कर दिया था।

मंगलवार को सुबह से ही मंडलायुक्त दफ्तर छावनी में तब्दील कर दिया गया। शाम तक यहां फोर्स तैनात रही। लेकिन पूर्व घोषित कार्यक्रम में भाजपा का एक भी कार्यकर्ता झांकने तक नहीं पहुंचा। अलबत्ता संभल में भाजपा कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाला और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक का कहना है कि बदले हालात में भाजपा अब आंदोलन नहीं करेगी बल्कि 16 को रामपुर, 17 को अमरोहा और 18 जुलाई को बिजनौर में प्रदर्शन कर संभल की तरह ज्ञापन सौंपेगी। बुधवार को लखनऊ में भाजपा की बैठक है उसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।

निगहबानी में रही कमिश्नरी, मुस्तैद थी फोर्स

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मंगलवार को पूरी कमिश्नरी निगहबानी में रही। चप्पे चप्पे पर फोर्स लगाई गई थी। अंबेडकर पार्क से लेकर कलेक्ट्रेट तक अलर्ट नजर आया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दोपहर तक डटे रहे। वहीं शासन से भी पल पल की सूचना ली जाती रही।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने मुरादाबाद में 15 जुलाई से तीस जुलाई तक कमिश्नर दफ्तर पर लगातार धरना प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। इस ऐलान के बाद शासन ने मुरादाबाद प्रशासन को अलर्ट कर दिया था। कहा गया कि शांति व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों से सख्ती के साथ निपटा जाए। वहीं प्रशासन ने भी 15 जुलाई से होने वाले धरने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था। लेकिन माना जा रहा था कि प्रशासन के प्रतिबंध के बाद भी भाजपाई कमिश्नरी पर पहुंचेंगे। लिहाजा सुबह से ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने डेरा जमा लिया था।

अंबेडकर पार्क से लेकर कलेक्ट्रेट तक जबरदस्त किलेबंदी थी। समूह में आने वाले लोगों को रोककर पूछताछ की जा रही थी। कलेक्ट्रेट का गेट भी पूरे दिन बंद रहा। एडीएम सिटी और एसपी सिटी फोर्स के साथ गश्त करते रहे। प्रशासन को राहत तब मिली जब 11 बजे से धरने का ऐलान करने वाले भाजपाई दोपहर बाद तक भी नहीं पहुंचे। प्रशासन ने शासन को भी इसकी रिपोर्ट भेज दी है। रिपोर्ट में कहा गया कि मुरादाबाद में कोई धरना प्रदर्शन नहीं हुआ है।

हाईवे और ट्रैक पर भी रही पुलिस

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भाजपा का ऐलान भले ही कमिश्नरी घेरने का था लेकिन प्रशासन ने हाईवे और रेलवे ट्रैक पर भी चौकसी बरती। गजरौला से मूंढापांडे तक पेट्रोलिंग होती रही। आसपास के रेलवे स्टेशनों पर भी निगाह रखी जा रही थी। कांठ स्टेशन पर अतिरिक्त व्यवस्था की गई थी।

चार जुलाई को कांठ रेलवे स्टेशन पर हुए बवाल के बाद से ही प्रशासन सतर्क था। इस प्रकार की घटना कहीं दोबारा न हो इसका खास ख्याल रखा जा रहा था। भाजपा के धरने को लेकर शासन ने भी मुरादाबाद को अतिरिक्त पुलिस फोर्स दिया था। पीएसी के साथ ही आरएएफ भी भेजा गया था। हालांकि प्रशासन ने 14 जुलाई को भाजपा के धरने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था लेकिन फिर भी माना जा रहा था कि भाजपाई मुरादाबाद के आसपास में कहीं धरना प्रदर्शन कर सकते हैं।

लिहाजा कांठ से लेकर मुरादाबाद तक के सभी स्टेशनों पर अतिरिक्त चौकसी बरती गई। कई रेलवे स्टेशनों पर तो जीआरपी और आरपीएफ  शाम तक डटी रही। दिल्ली-लखनऊ हाईवे के साथ ही हरिद्वार मार्ग पर भी कई प्वाइंट बनाकर फोर्स को लगाया गया था। वहीं कांठ में भी पुलिस गश्त बढ़ा दी गई थी।

महाभिषेक पर अड़ी साधु परिषद

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अखिल भारतीय साधु परिषद ने अकबरपुर चैदरी गांव के शिवमंदिर पर शिवरात्रि के दिन महाभिषेक का ऐलान किया है। साध्वी प्राची और प्रभुदानंद को इस पूरे अभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साधु परिषद के लोग कांठ के इलाकों में डेरा जमा चुके हैं। गांव गांव जाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

साधु परिषद के राष्ट्रीय संयोजक और महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी महाराज ने अकबरपुर चैदरी गांव के शिवमंदिर पर शिवरात्रि के दिन जलाभिषेक का ऐलान किया था। साधु परिषद अपने इस ऐलान पर अड़ी है। कांठ क्षेत्र के गांवों में अलख जगाने के लिए साधुओं की टीम पहुंच गई है। फोन पर हुई बातचीत में स्वामी यतींद्रानंद गिरी महाराज ने बताया कि साध्वी प्राची और साधु परिषद के पदाधिकारी प्रभुदानंद को इस पूरे अभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

गांवों में जाकर लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। लोगों से कहा जा रहा है कि वह अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर जलाभिषेक करें। बड़ी संख्या में कांवड़ लेने के लिए जाएं। स्वामी यतींद्रानंद गिरी महाराज ने बताया कि वह भी कांठ क्षेत्र में जाने की तैयारी कर रहे थे लेकिन विहिप ने फिलहाल यह कहकर उन्हें रोक दिया है कि अभी इंतजार कीजिए। कई दूसरे हिंदू संगठनों से भी उनकी बात चल रही है।

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