बनारस में मोदी ने किया शक्ति-प्रदर्शन, सपाइयों का 'शुद्धिकरण'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बनारस से नामांकन दाखिल कर दिया। इस सीट पर पर्चा दाखिल करने का आज आखिरी दिन था। सबसे हाई-प्रोफाइल सीट में मोदी, कांग्रेसी नेता अजय राय और AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल के बीच त्रिकोणीय मुकाबले की उम्मीद है।
नामांकन दाखिल करने से पहले मोदी गुरुवार सवेरे बनारस पहुंचे। बीएचयू, काशी विद्यापीठ जाने के बाद उन्होंने रोड शो शुरू किया, जो करीब डेढ़ बजे कचहरी पहुंचा। इस दौरान भाजपा के हजारों-लाखों कार्यकर्ता बनारस में जुटे थे। पार्टी के आला कमान ने इसे भव्य बनाने के लिए पूरी ताकत झोंकी।
इस मौके पर अमित शाह ने कहा, "आज भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने वाराणसी नामांकन दाखिल किया और सुबह से नामांकन होने तक जो जनसैलाब उमड़ा, उससे यह तय हो चुका है कि अब तक उत्तर प्रदेश में जो मोदी की लहर थी, भाजपा की लहर थी, लेकिन आज मोदी के नामांकन के बाद यह लहर अब सुनामी में बदल गई है।" यहां 12 मई को वोटिंग होनी है।
सपाइयों ने गंगाजल से धोई प्रतिमा
नरेंद्र मोदी के नामांकन भरने वाले दिन बनारस में राजनीतिक पारा यूं तो सवेरे से गर्म था, लेकिन दोपहर होते-होते मौसमी गर्मी के साथ-साथ सियासी गर्माहट अपने चरम पर पहुंच गई। और इस मुकाबले में सपा भी कूदी।
जिस वक्त मोदी पर्चा दाखिल कर रहे थे, समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता महामना मदन मोहन मालवीय की उस प्रतिमा को गंगाजल से धो रहे थे, जिस पर मोदी ने अपने रोड शो के दौरान माल्यार्पण और पुष्प चढ़ाए थे। सपा कार्यकर्ताओं ने कहा, "यह महामना का शुद्धिकरण है, क्योंकि जिनके हाथ खून से सने हैं, उन्होंने इन पर फूल चढ़ाए हैं, इसलिए ऐसा किया गया।"
जाहिर है, अजय राय और अरविंद केजरीवाल के बाद मोदी ने आज प्रतीकों की राजनीति का नया चेहरा दिखाया और महामना, सरदार पटेल और स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। समाजवादी पार्टी भी इस मौके को हाथ से नहीं निकलने देना चाहती थी।
पर्चा भरने से पहले मोदी का इंतजार
इससे पहले रोड शो के दौरान कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ से उत्साहित नरेंद्र मोदी जब कचहरी पहुंचे, तो उन्हें उम्मीद थी कि वो जल्द से जल्द काम निपटाकर बिहार के लिए रवाना हो जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मोदी को नामांकन भरने से पहले कुछ वक्त इंतजार करना पड़ा। नामांकन का आखिरी दिन होने की वजह से उनसे पहले कई उम्मीदवार वहां पहुंचे हुए थे।
कचहरी में मोदी के साथ उनके प्रस्तावक बने डॉ गिरधर मालवीय, शास्त्रीय गायक पंडित छन्नू लाल मिश्र भी मौजूद हैं। इसके अलावा उनके साथ भाजपा नेता अमित शाह, रविशंकर प्रसाद और मुख्तार अब्बास नकवी मौजूद रहे। ये सभी नेता रोड शो में भी उनके साथ थे।
नरेंद्र मोदी ने जब गुजरात की वडोदरा सीट से पर्चा भरा था, तो सभी की निगाहें उनकी संपत्ति या आपराधिक मामलों पर नहीं थी, बल्कि दिलचस्पी इस बात को लेकर थी कि वो अपनी वैवाहिक स्थिति के बारे में क्या लिखते हैं। उन्होंने पत्नी के रूप में जशोदाबेन का नाम लिखा था।
कचहरी में बुनकरों और बनारस पर डाले डोरे
नरेंद्र मोदी को नामांकन दाखिल करने से पहले इंतजार करना पड़ा, तो उन्होंने मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की। उन्होंने समाचार एजेंसी से कहा, "काशीवासियों ने जो मुझे प्यार दिया है, उसे देखकर मैं अभिभूत हूं। आज यहां आने से पहले मेरे मन में विचार आया था कि भाजपा ने मुझे यहां भेजा है, लेकिन अब ऐसा लगता है कि मां गंगा ने मुझे यहां बुलाया है।"
उन्होंने गरीब मुस्लिम बुनकरों की सेवा करने का वादा किया और कहा, "गंगा-जमुनी तहजीब के लिए परमात्मा मुझे शक्ति दे कि यहां के लिए काम करने का मौका मिले।" उन्होंने इस मौके पर सभी समुदायों के साथ बनारस को नए दौर में ले जाने और गंगा की सफाई का वादा भी किया।
मोदी ने कहा, "मैं वडनगर में पला-बढ़ा हूं। और आज मैं मां की गोद में वाराणसी आया।" इस दौरान उन्होंने चीनी यात्री ह्वेनसंग का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वह भारत दौरे के दौरान बहुत समय तक वाराणसी के अलावा वडनगर में भी रहे थे।
मोदी के रोड शो में बनारस बोला नमो-नमो
गुरुवार सवेरे महामना मदन मोहन मालवीय और सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्पार्पण और माल्यार्पण करने के बाद नरेंद्र मोदी ने बनारस में अपना रोड शो शुरू किया। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं का हुजूम उनके साथ था। रोड शो जहां से शुरू हुआ, वहां से कचहरी तक की दूरी बहुत नहीं थी, लेकिन भीड़ के कारण इसकी रफ्तार काफी कम रही।
खुले वाहन में सवार नरेंद्र मोदी के साथ उनके सबसे करीबी उत्तर प्रदेश के पार्टी प्रभारी अमित शाह, प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी और भाजपा के दूसरे नेता भी रहे। यह रोड शो मलदहिया चौक से शुरू हुआ। रोड शो के दौरान ढाई से तीन लाख लोगों की भीड़ जुटने की बात कही गई।
मलदहिया चौक से शुरू हुआ रोड शो मिंट हाउस पर संपन्न हुआ। ऐसा कहा जा रहा था कि वहां पहुंचने के बाद मोदी समर्थकों को संबोधित कर सकते हैं, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। वक्त की कमी और समर्थकों की बेकाबू भीड़ के कारण मोदी रोड शो खत्म होने के तुरंत बाद ईडीएम ऑफिस चले गए।
मोदी ने महामना की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया
नरेंद्र मोदी ने रोड शो की शुरुआत से पहले मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यापर्ण किया और वहां मौजूद समर्थकों का अभिवादन स्वीकार किया। इससे पहले उनका स्वागत हुआ। बनारस को लेकर भाजपा ने खास तैयारियां की थीं। इंतजाम की कमान अमित शाह के हाथों में थी, जो खुद सवेरे से मलदहिया चौक पर मौजूद थे।
मोदी का स्वागत मालवीय के पौत्र डॉ. गिरधर मालवीय ने किया और वो उनके प्रस्तावकों में भी शुमार रहे। इस मौके पर आश्रम में रहने वाले बच्चों ने मोदी के लिए सामूहिक मंत्रोच्चार भी किया। माल्यापर्ण के बाद वो काशी विद्यापीठ के लिए रवाना हो गए, जहां से रोड शो शुरू होना था।
भाजपा के पीएम पद के दावेदार के नामांकन के लिए भाजपा ने खास इंतजाम किए हैं। इस मौके पर भारी भीड़ जुटने के कारण सुरक्षाकर्मियों को हालात काबू में करने को लेकर मुश्किल पेश आ रही है। भाजपा कार्यकर्ताओं को भी भीड़ को नियंत्रण में करने के लिए काफी पसीना बहाना पड़ा।
देर से पहुंचे मोदी, सवेरे से जुटी थी भीड़
भाजपा की तरफ से उत्तर प्रदेश के प्रभारी अमित शाह और मुख्तार अब्बास नकवी बनारस के मलदहिया चौक पर पहुंचकर इंतजाम कर रहे थे। चौक पर सवेरे से ही हजारों लोग जुट गए थे। नरेंद्र मोदी को यहां पहुंचने में देर हुई। बताया जाता है कि अहमदाबाद से ही उन्हें रवाना होने में कुछ देर हो गई थी। लेकिन भाजपाई उत्साहित थे।
तय कार्यक्रम में देरी के बीच नरेंद्र मोदी बाबरपुर एयरपोर्ट उतरे और वहां से वो हेलिकॉप्टर के जरिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के लिए रवाना हो गए। यहां उन्हें मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। यहां से वो दोबारा हेलिकॉप्टर में सवार होकर मलदहिया चौक पहुंचे।
भीड़ देखकर उत्साहित बनारस में मौजूद भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा, "यह नजारा गजब का है। इसे सिर्फ अनुभव किया जा सकता है। यहां लाखों की भीड़ जुट चुकी है। और सारे लोग मोदी के प्रति समर्थन दिखाने यहां पहुंचे हैं।"
गुरुवार का दिन मोदी के नाम
बुधवार को बनारस में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने नामांकन दाखिल करने से पहले रोड शो किया था और ऐसा बताया गया कि आम आदमी पार्टी बढ़िया भीड़ जुटाने में कामयाब रही। भाजपा के सामने आम आदमी पार्टी की भीड़ को कम दिखाने की चुनौती थी और यही वजह थी कि पार्टी नेताओं पर दबाव पहले से ज्यादा था।
बुधवार को केजरीवाल ने साफ कर दिया था कि मोदी या कांग्रेसी उम्मीदवार अजय राय के लिए यह लड़ाई इतनी आसान नहीं है। दूसरी ओर राय का कहना है कि बनारस की जनता यहीं के बाशिंदे को चुनकर लोकसभा भेजेगी।
बनारस में वोटिंग 12 मई को होनी है और नामांकन दाखिल करने के लिए गुरुवार आखिरी दिन था। भाजपा ने पर्चा दाखिल करने के लिए आखिरी दिन इसलिए चुना, ताकि अजय राय और केजरीवाल का शक्ति प्रदर्शन देख लिया जाए। वो बनारस में रो शो से समूचे पूर्वांचल में एक संदेश देना चाहती थी।
सबसे हाई-प्रोफाइल सीट बनी काशी
नरेंद्र मोदी ने यह सीट इसलिए चुनी, ताकि पूर्वांचल की बाकी सीटों पर इसका असर छोड़ा जा सके। इसके अलावा भाजपा को उम्मीद है कि 'मोदी लहर' का कुछ फायदा उसे इससे सटी बिहार की कुछ सीटों पर भी मिल सकता है। केजरीवाल ने मोदी के खिलाफ लड़ने का ऐलान कर इस मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
मोदी के खिलाफ किसे उतारा जाए, इसे लेकर कांग्रेस में लंबे वक्त तक कशमकश देखने को मिली। यह भी खबर आई है कि आनंद शर्मा और दिग्विजय सिंह जैसे पार्टी के वरिष्ठ नेता मोदी को चुनौती दे सकते हैं। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। मौका स्थानीय माने जाने वाले बाहुबलि नेता अजय राय को मिला।
केजरीवाल को उम्मीद है कि वो शीला दीक्षित की तरह मोदी को भी हरा पाएंगे और अजय राय, मोदी और केजरी दोनों को बाहरी बता रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि बनारस किसे लोकसभा भेजने का फैसला सुनाता है।
'बनारस से लड़वाने के लिए धन्यवाद'
बनारस पहुंचने से पहले ही मोदी ने सोशल मीडिया पर एक दांव खेला। उन्होंने बनारस पर एक ब्लॉग लिख डाला। इसमें उन्होंने कहा, "आज मैं सोमनाथ की धरती से भगवान विश्वनाथ की नगरी के लिए एक अनुपम और अविस्मरणीय यात्रा आरम्भ करने जा रहा हूँ। कुछ देर बाद मैं वाराणसी से भाजपा प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल करूँगा। मैं पार्टी नेतृत्व को धन्यवाद करना चाहूंगा।"
उन्होंने लिखा, "मैं अपने पार्टी कार्यकर्ताओं का अभिनंदन करता हूँ जो मेरी उम्मीदवारी घोषित होने के तुरंत बाद से ही जमीनी स्तर पर मेहनत कर रहे हैं और मैं नमन करता हूँ, देश भर के उन कार्यकर्ताओं एवं शुभचिंतकों को जो पिछले कई महीनों से मुझे अपना समर्थन और आशीर्वाद दे रहे हैं।"
मोदी ने ब्लॉग में लिखा, "वाराणसी पूजनीय संत रविदास की जन्मस्थली है। बनारस में ही महात्मा कबीर का भी जन्म हुआ, परवरिश हुई और यहीं से उन्होंने अपने ज्ञान का उजियारा दुनिया भर में फैलाया।"
'बिस्मिल्लाह के बिना बनारस अधूरा'
बनारस की नब्ज पकड़ने की कोशिश करते हुए नरेंद्र मोदी ने ब्लॉग में लिखा, "मिर्जा ग़ालिब ने बनारस को ‘काबा-ए-हिन्दुस्तान’ और ‘चिराग-ए-दैर’ यानी दुनिया की रोशनी कहा था। जब पंडित मदन मोहन मालवीय को शिक्षण केंद्र की स्थापना के लिए स्थान का चयन करना था, उन्होंने बनारस को ही चुना। गंगा-जमुनी तहज़ीब के महान दूत उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का जिक्र किये बिना वाराणसी का परिचय अधूरा सा लगता है।"
उन्होंने लिखा, "सच में वाराणसी और यहाँ के लोगों में कुछ तो ख़ास है। इस देवभूमि का हर निवासी अपने अन्दर कहीं न कहीं देवत्व लिए हुए है। इसी सत्प्रेरणा और भगवान विश्वनाथ के आशीर्वाद के साथ शानदार अतीत वाले वाराणसी के वैभवशाली भविष्य के निर्माण के लिए हम निकल पड़े हैं।"
पीएम पद के दावेदार ने लिखा, "हमारी सोच है कि वाराणसी विश्व विरासत स्थल के तौर पर उभरे जो उपासकों के साथ साथ भारत की संस्कृति को समझने और आत्मसात करने वाले लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित करे। हमें वाराणसी के लिए अत्याधुनिक पर्यटन सुविधाओं का निर्माण करना होगा।"
गंगा की सफाई पर जोर दिया
भाजपा के पीएम पद के दावेदार ने लिखा, "मेरा दृढ़ विश्वास है कि एक बार अगर हम पर्यटन को आवश्यक प्रोत्साहन देने में सक्षम हो जाते हैं, तो इससे न केवल अधिक से अधिक पर्यटक यहाँ आयेंगे बल्कि गरीब से गरीब व्यक्ति अपनी आजीविका में इज़ाफ़ा कर सकेगा। ज्यादा सैलानी आएंगे तो यह उन लोगों के लिए लाभप्रद होगा जो मंदिरों से जुड़े हैं, घाटों पर रह रहे हैं, जो गंगा के घाटों से सवारियों का परिवहन करते हैं।"
उन्होंने गंगा पर भी खास ध्यान दिया। उन्होंने लिखा, "गंगा वाराणसी की जीवन रेखा है, यहाँ की पहचान का मूल आधार है – यह हमारी माँ है। दुर्भाग्यवश हम गंगा के प्रति उतना ध्यान नहीं दे सके हैं, जितना कि देना चाहिए था। उत्तर प्रदेश के कई भागों में गंगा की हालत दयनीय है।"
मोदी ने लिखा, "1986 में तत्कालीन सरकार गंगा एक्शन प्लान लेकर आई थी, लेकिन यह केवल प्लान बनकर ही रह गया, इसमें एक्शन हर प्रकार से नदारद था। बजट आवंटित हुआ लेकिन निर्धारित उद्देश के लिए कभी उपयोग नहीं किया गया। वरुणा की स्थिति भी ऐसी ही है।"
बुनकरों की भी बात उठाई
नरेंद्र मोदी ने लिखा, "जब मैं गंगा की सफाई के लिए अपनी प्रतिबद्धता की बात करता हूँ, तब वह केवल एक वादा मात्र नहीं होता है। जब मैं 2001 में गुजरात का मुख्यमंत्री बना तब साबरमती की हालत भी ऐसी ही थी। आज 2014 में समूचा दृश्य ही बदल गया है।"
उन्होंने लिखा, "हम नर्मदा से पानी लेकर आए जो अब साबरमती में बह रहा है। एक विश्व स्तरीय साबरमती रिवर फ्रंट का निर्माण किया गया, जो कि अहमदाबाद का सबसे लोकप्रिय मनोरंजन और सांस्कृतिक स्थल बन गया है।"
बुनकरों पर उन्होंने लिखा, "वाराणसी के बुनकर इस शहर के इतिहास, वर्तमान और भविष्य का अभिन्न अंग हैं। दुर्भाग्यवश दिल्ली और लखनऊ सरकारों की उदासीनता से उनका काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस क्षेत्र को नवीनतम प्रौद्योगिकी और गुणात्मक मूल्य संवर्धन के साथ बढ़ावा देने के लिए मैं दृढ़ संकल्पित हूँ ताकि वाराणसी के बुनकर विश्वस्तर पर हमारी शान बन सकें।"