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परिकर के बाद शिवराज-रमन भी केंद्र में आएंगे!

Fri, 14 Nov 2014 08:06 PM IST
Updated Fri, 14 Nov 2014 08:06 PM IST
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BJP Plans to move Shivraj-Raman in Cabinet

केंद्रीय रक्षा मंत्री मनोहर परिकर की केंद्रीय राजनीति में नई पारी की शुरुआत कराने के बाद भाजपा अपने दो अन्य मुख्यमंत्रियों के लिए भी भावी भूमिका की पटकथा तैयार रही है।

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राज्यों में नए नेतृत्व को उभारने की योजना के तहत मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सीएम शिवराज सिंह चौहान और डॉ रमन सिंह को फिर से केंद्रीय राजनीति में उतारा जा सकता है।
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ये दोनों नेता देर-सबेर या तो मोदी मंत्रिमंडल का हिस्सा बन कर या पार्टी के केंद्रीय संगठन से जुड़ कर राष्ट्रीय राजनीति में दूसरी पारी की शुरुआत कर सकते हैं। दरअसल परिकर को केंद्रीय राजनीति में उतारे जाने संबंधी फैसले के दौरान आलाकमान ने चौहान के भी नाम पर गंभीरता से विचार किया था।
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हालांकि तब सुरेश प्रभु को भी मंत्रिमंडल का सदस्य बनाने और किसी भी तरह से राज्यसभा की अतिरिक्त सीट का जुगाड़ न हो पाने की स्थिति के कारण इस योजना पर विराम लगा दिया गया।

देर-सबेर केंद्रीय संगठन का बनेंगे हिस्सा

BJP Plans to move Shivraj-Raman in Cabinet

हालांकि मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद संगठन विस्तार के मद्देनजर एक बार फिर से इन दोनों मुख्यमंत्रियों की भावी भूमिका पर मंथन शुरू हुआ है। फिलहाल राज्यों में नए नेतृत्व को उभारने की आलाकमान की योजना से राजस्थान को दूर रखा गया है।

उल्लेखनीय है कि मंत्रिमंडल विस्तार में संगठन के कई दिग्गजों के जगह बनाने के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की टीम में 5 महासचिवों और तीन उपाध्यक्षों की कमी हो गई है। बड़ी सच्चाई यह भी है कि ये दोनों ही मुख्यमंत्री पार्टी में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के दौर की फसल हैं।

जहां तक मध्यप्रदेश की बात है तो वहां सरकार में शामिल कैलाश विजयवर्गीय आलाकमान की पहली पसंद हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अमित शाह ने विजयवर्गीय को हरियाणा का चुनाव प्रभारी बनाया था। हरियाणा में शानदार नतीजे दिलाने के बाद विजयवर्गीय की पार्टी अध्यक्ष से नजदीकी और बढ़ी है।

उधर, छत्तीसगढ़ में पार्टी को लगातार तीसरी जीत दिलाने वाले डॉ रमन सिंह बिलासपुर में नसबंदी कैंप में डाक्टरों की लापरवाही से एक दर्जन से भी अधिक महिलाओं की मौत के बाद निशाने पर हैं। सिंह के सामने इसी महीने निगम चुनाव की बड़ी चुनौती आने वाली है। अगर निगम चुनाव के नतीजे पार्टी के अनुकूल न रहे तो रमन की परेशानी में और इजाफा होना तय है।

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