हार से लाचार कांग्रेस को अभी और झटके देगी भाजपा
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कांग्रेस अभी लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार से उबरी भी नहीं है कि भाजपा ने उसे और झटके देने के तैयारी कर ली है। इसके लिए भाजपा ने आंध्र प्रदेश और असम के कांग्रेसी नेताओं को हथियार बनाने की ठानी है।
भगवा दल इन दोनों राज्यों में वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को अपने पाले में लाकर कांग्रेस की जड़ें और कमजोर कर देने की योजना पर काम कर रहा है। आंध्र में तीन दशक से कांग्रेस के बडे़ नेताओं में शुमार रहे बोत्सा सत्यनारायण भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मिलकर भगवा दल में शामिल होने की इच्छा जता चुके हैं।
दूसरी ओर, असम में भाजपा की नजर मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के कट्टर विरोधी माने जाने वाले हेमंत बिश्वशर्मा पर है। बोत्सा जनवरी के मध्य तक भाजपा का दामन थाम सकते हैं। वे सूबे की प्रभावशाली कापू बिरादरी के बडे़ नेता माने जाते हैं।
दिग्गज कांग्रेसियों से संपर्क की कोशिश
सूत्रों के अनुसार अभिनेता से नेता बने चिरंजीवी के कांग्रेस में आने के बाद से सत्यनारायण अपने लिए राजनीतिक प्लेटफार्म की तलाश में हैं। इसी सिलसिले में वे पिछले दिनों शाह से मिले थे। अब भाजपा में आने की उनकी राह में रोड़ा उनकी शराब व्यवसाय से जुड़ी पृष्ठभूमि है।
बहरहाल, भाजपा आलाकमान ने सत्यनारायण पर फैसले का जिम्मा आंध्र प्रदेश के संघ पृष्ठभूमि वाले दिग्गज नेता के. हरीबाबू पर छोड़ दिया है। यदि बाबू ने हरी झंडी दी तो मकर संक्रांति के बाद कभी भी सत्यनारायण भाजपा का दामन थाम लेंगे।
पूर्वोत्तर में भाजपा को अपने लिए सबसे अधिक उपजाऊ असम की सियासी जमीन दिख रही है। इस भूमि पर सत्ता की फसल लहलहाने के लिए भाजपा की निगाह गोगोई के विरोधी हेमंत बिश्वशर्मा पर है। हेमंत भी अपने लिए नई जमीन तलाश रहे हैं।
बताया जा रहा है कि इस काम का जिम्मा उनके बडे़ भाई दिगंत बिश्वशर्मा ने संभाल रखी है। दिगंत का लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ाव रहा है। पुराने संबंधों की वजह से भाजपा के एक राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री भी इस अभियान में जुटे हुए हैं। उधर, हेमंत इस समय दिल्ली में हैं। वे अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस हाईकमान को आखिरी चेतावनी देने के लिए यहां आए हुए हैं।