राज के तीर से शिवसेना के शिकार का मोदी प्लान
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भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना में फिलहाल संघर्ष विराम हुआ है, पूर्ण रूप से शांति नहीं हुई है। गठबंधन में तनातनी पैदा करने वाली भाजपा नेता नितिन गडकरी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे की दोस्ती की जड़ें खासी गहरी हैं और नितिन गडकरी व नरेंद्र मोदी की रणनीति महाराष्ट्र में शिवसेना और मनसे के टकराव का फायदा उठाकर भाजपा को मजबूत करना है।
इसके लिए राज ठाकरे के तीर से शिवसेना का सियासी शिकार करके महाराष्ट्र में उसके जनाधार को अपने साथ लाने की कोशिश है। भाजपा यह काम महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों तक करना चाहती है, जिससे शिवसेना कमजोर पड़े और 48 लोकसभा सीटों वाले इस बड़े राज्य पर भाजपा की पकड़ मजबूत हो।
सूत्रों के मुताबिक राज ठाकरे के जरिए शिवसेना को कमजोर करके जहां गडकरी महाराष्ट्र में अपने प्रमुख प्रतिद्वंदी और भाजपा शिवसेना गठबंधन की डोर गोपीनाथ मुंडे का कद छांटना चाहते हैं, वहीं महाराष्ट्र के ज्यादातर मागों पर टोल वसूलने वाली कंपनी के साथ राज्य भाजपा के कुछ नेताओं से बेहद दोस्ताना रिश्ते हैं।
टोल नाकों को बंद करने की राजनीति
राज्य में शिवसेना-भाजपा सरकार के दिनों में इस कंपनी को सड़क निर्माण का खासा काम मिला। टोल नाकों के खिलाफ मनसे के उग्र आंदोलन से परेशान ये भाजपा नेता अपने मित्र की कंपनी के हितों की सुरक्षा भी मनसे से चाहते हैं। बदले में भाजपा नेता राज ठाकरे को मुंबई में शिवसेना के मुकाबले पूरी मदद देने का भरोसा दे रहे हैं।
शिवसेना ने जब राज्य की सड़कों पर टोल खत्म करने को मुद्दा बनाकर आंदोलन शुरु किया और राज्य में शिवसेना भाजपा सरकार बनने पर सड़कों को टोल मुक्त करने का वादा भी जनता से कर दिया। मुद्दे को तूल पकड़ता देख उससे मुकाबले के लिए मनसे ने भी टोल नाकों को बंद करने का उग्र आंदोलन छेड़ दिया।
कोल्हापुर नगर निगम और आईआरबी के बीच हुए सड़क निर्माण और टोल करार के खिलाफ शिवसेना ने खासा उग्र आंदोलन किया और टोल नाके तक जला दिए। मुकाबले में मनसे ने भी मुंबई में टोल नाकों को बंद करवाया।
मोदी का झुकाव राज ठाकरे की तरफ
टोल के खिलाफ शिवसेना के इस कदम का समर्थन करते हुए राज्य में उसकी सहयोगी भाजपा ने भी ऐलान किया कि उनकी सरकार बनने पर टोल खत्म कर दिया जाएगा। लेकिन एक स्थानीय मराठी अखबार में गडकरी का बयान छपा कि राज्य में टोल खत्म करना मुमकिन नहीं है। इससे शिवसेना असहज हो गई।
बताया जाता है कि मनसे के प्रति गडकरी का रुख पहले से ही नरम है। दरअसल बाल ठाकरे के वक्त से ही शिवसेना नेतृत्व की निकटता शुरु से ही प्रमोद महाजन और गोपीनाथ मुंडे के साथ रही है। महाजन-मुंडे की वजह से ही महाराष्ट्र की राजनीति में गडकरी लंबे समय तक हाशिए पर रहे। महाजन के निधन केबाद शिवसेना भाजपा युति (गठबंधन) की डोर मुंडे ही हैं। जबकि पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद गडकरी ने मुंडे को हाशिए पर डालने की इस कदर कोशिश की थी कि मुंडे कांग्रेस में जाते जाते बचे।
उधर भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का झुकाव भी राज ठाकरे की तरफ है। मोदी और गडकरी राज ठाकरे से दोस्ती बढ़ाकर मुंबई में शिवसेना को बांधना चाहते हैं। इसीलिए नरेंद्र मोदी का समर्थन करने के बावजूद मनसे ने मुंबई में शिवसेना के उम्मीदवारों केखिलाफ अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं।