महाराष्ट्र के सीएम के मुद्दे पर बात ठनी!
महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद के लिए अब भाजपा के भीतर राजनीति गरमाती जा रही है। हालांकि भाजपा में देवेंद्र फडनवीस का नाम सबसे आगे है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की पहली पसंद भी फडनवीस ही हैं, लेकिन पूर्व भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी इसके लिए तैयार नहीं हैं। गडकरी ने पिछड़े वर्ग के नेता सुधीर मुनगंटीवार का नाम आगे बढ़ा दिया है।
इससे पहले विदर्भ क्षेत्र के 40 से अधिक विधायकों ने गडकरी से उनके निवास स्थान पर मिलकर मुख्यमंत्री पद संभालने की मांग की। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मुनगंटीवार ने भी उनसे यही अपील की। मंगलवार को संघ मुख्यालय नागपुर पहुंचे गडकरी ने देवेंद्र की जगह सुधीर को कमान सौंपने की वकालत की।
गडकरी ने तर्क दिया है कि मुंडे की मौत के बाद राज्य में भाजपा के पास कोई बड़ा पिछड़ा नेता नहीं है। इसलिए सुधीर को मुख्यमंत्री बनाकर पिछड़ों को जोड़े रखना जरूरी है। गडकरी ने यह भी कहा कि अगर आगे चलकर विदर्भ को अलग राज्य बनाने का फैसला हुआ तो नागपुर के विधायक देवेंद्र फडनवीस विदर्भ चले जाएंगे और शेष महाराष्ट्र में भाजपा के सामने नेतृत्व का संकट पैदा हो जाएगा। गडकरी का तर्क यह भी है कि महाजन, मुंडे के बाद राज्य की राजनीतिक हकीकत वही समझते हैं, इसलिए उनकी राय मानी जानी चहिए।
प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं मुनगंटीवार
सुधीर मुनगंटीवार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रह चुके हैं। गडकरी के करीबी महाराष्ट्र के एक भाजपा नेता के मुताबिक गडकरी की दूसरी पसंद विनोद तावड़े हैं, जो मराठा हैं। तावड़े के पक्ष में संघ के बुजुर्ग नेता मदनदास देवी भी हैं। एक अन्य दावेदार एकनाथ खडसे सेहत की वजह से दौड़ से बाहर हैं।
मुनगंटीवार से पार्टी हाईकमान नाराज
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाने के लिए विधायकों के एक समूह द्वारा छेड़ी गई मुहिम को भाजपा आलाकमान ज्यादा तवज्जो देने के मूड में नहीं है। हाईकमान गडकरी के समर्थन में विधायकों के एक समूह को एकजुट करने वाले प्रदेश के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार से खासा नाराज है।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस तरह की मुहिम को नेतृत्व कोई अहमियत नहीं देगा। मुनंगटीवार ने गडकरी के समर्थन में विधायकों को एकजुट करने की कोशिश में अपने पांव पर कुल्हाड़ी मार ली है। उन्हें देर सबेर इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।