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भाजपा के फॉर्मूले से टूटा उद्धव का सपना

Wed, 22 Oct 2014 12:45 PM IST
Updated Wed, 22 Oct 2014 12:45 PM IST
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महाराष्ट्र में भाजपा ने शिवसेना के समर्थन के बगैर सरकार बनाने की तैयारी कर अपने पुराने सहयोगी दल पर दबाव बनाने की राजनीति शुरू कर दी है। भाजपा सरकार गठन के लिए जिस एजेंडे पर आगे बढ़ रही है, उसमें शिवसेना के लिए कोई जगह नहीं है।

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संकेत साफ है कि भाजपा के पास शिवसेना के बगैर सरकार बनाने का अपना फॉर्मूला तैयार है। इसके अलावा राष्ट्रपति शासन का विकल्प भी भाजपा के पास खुला हुआ है। हालांकि पूरी तस्वीर दिवाली के बाद ही साफ हो पाएगी।
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इसी के तहत भाजपा ने विधायक दल की बैठक को टाल कर दबाव बढ़ाया है। शिवसेना नेता सुभाष देसाई और अनिल देसाई भी भाजपा नेतृत्व से बात करने के लिए मंगलवार देर रात दिल्ली पहुंच गए। चर्चा यह भी है कि दिवाली के बाद उद्धव ठाकरे खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर गिले शिकवे दूर कर सकते हैं।

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दिवाली बाद पत्ते खोलेगी पार्टी

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भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक पार्टी के 123 विधायकों सहित निर्दलियों और छोटे दलों के सहयोग से अब तक 135 विधायकों की संख्या जुटा ली गई है। सूत्रों की मानें तो इस संख्या बल के आधार पर भाजपा सरकार बनाने का दावा करेगी और सदन में एनसीपी को वॉकआउट करने के लिए मनाकर भाजपा बहुमत की परीक्षा पास कर लेगी।

इस ढंग से भाजपा अल्पमत की सरकार बना लेगी। ताजे घटनाक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और पार्टी महासचिव जेपी नड्डा का मुंबई दौरा मंगलवार को भी टल गया और पार्टी विधायकों को दीवाली मनाने को कह दिया गया है।

इससे समझा जा रहा है कि दीवाली के बाद राजनाथ सिंह और नड्डा के मुंबई आने पर ही भाजपा विधायक दल की बैठक होगी। उसके बाद सरकार बनाने की कवायद शुरू की जाएगी।

उद्धव की दीवाली फीकी

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विधानसभा चुनाव नतीजे ने उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने का सपना चकनाचूर कर दिया है और अब दीवाली भी बेकार जाने की संभावना दिखाई दे रही है।

पिछली बार (45) की तुलना में भले ही शिवसेना ने (63) अधिक सीटें जीती हैं लेकिन वह सत्ता के लिए पर्याप्त नहीं है। भाजपा जिस रणनीति के तहत आगे बढ़ रही है उससे पार्टी को पता है कि क्या करना है, लेकिन उद्धव ठाकरे यह नहीं समझ पा रहे हैं कि उन्हें आगे क्या करना है।

बिना शर्त शिवसेना का समर्थन चाहती है भाजपा
अंदरखाने चर्चा है कि शिवसेना 1995 के फॉर्मूले के तहत सरकार में हिस्सेदारी चाहती है। उपमुख्यमंत्री पद सहित मलाईदार मंत्रालय की मांग कर सकती है जबकि भाजपा बिना शर्त शिवसेना का समर्थन लेने की कोशिश में है।

लग सकता है राष्ट्रपति शासन
भाजपा ने पहले से ही तय कर रखा है कि उसे सरकार बनाने की कोई जल्दबाजी नहीं है। दरअसल, भाजपा के दोनों हाथ में लड्डू है, यदि सरकार बनती है तब भी और नहीं बनती है तब भी। महाराष्ट्र में प्रत्यक्ष और परोक्ष भाजपा का ही शासन है।

अंदर के सूत्रों का कहना है कि सरकार बनाने में अक्षम रहने पर महाराष्ट्र की स्थिति दिल्ली जैसी बन सकती है, इसलिए भाजपा के पास खोने के लिए कुछ नहीं है।

एनसीपी के प्रस्ताव पर शिवसेना का हमला

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महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार को बाहर से समर्थन करने के एनसीपी के फैसले पर करारा प्रहार करते हुए शिवसेना ने कहा है कि अपने भ्रष्ट नेताओं को बचाने के लिए उसने यह दांव चला है।

अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में शिवसेना ने लिखा है कि कल तक एनसीपी भाजपा को एक सांप्रदायिक ताकत मानती थी और उसे हाफ पैंट वालों की पार्टी बताकर उसका मजाक उड़ाती थी। उसने संघ के हाफ पैंट पहनने के फरमान का मजाक उड़ाकर हिंदुत्व का अपमान किया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या उसे सही मायने में आज राज्य में स्थायित्व की चिंता सता रही है। वह केवल यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उसके भ्रष्टाचार को जनता के सामने नहीं लाया जाए।

एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल को अवसरवादी करार देते हुए शिवसेना ने कहा कि उनकी पार्टी तो विपक्ष के नेता का पद हासिल करने लायक भी नहीं है। अखबार ने आगे लिखा है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने एनसीपी के खिलाफ जमकर प्रचार किया और उसे स्वाभाविक भ्रष्ट पार्टी करार दिया था। भाजपा नेता विनोद तावड़े ने कांग्रेस-एनसीपी के घोटालों को उजागर करने और भ्रष्ट नेताओं को जेल भेजने की बात कही थी।

एकीकृत महाराष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के बारे में भाजपा को याद दिलाते हुए शिवसेना ने कहा कि विदर्भ में भाजपा को मिली शानदार सफलता का मतलब यह नहीं है कि लोगों ने अलग राज्य के लिए वोट दिया है।

एनसीपी के दावे को कांग्रेस ने किया खारिज

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कांग्रेस ने एनसीपी के उस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि पार्टी ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए शिवसेना को संयुक्त रूप से समर्थन देने के लिए संपर्क किया था।

कांग्रेस ने कहा कि यह एनसीपी का बेतुका बयान है, जिसमें कोई दम नहीं है। कांग्रेस सांप्रदायिक ताकतों का कभी भी समर्थन नहीं कर सकती। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी अजय माकन ने एनसीपी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ ऐसी पार्टियां हैं जो बिना सत्ता के नहीं रह सकतीं। लेकिन कांग्रेस वह पार्टी है जो इससे पहले जिम्मेदार विपक्ष का दायित्व निभाती रही है।

माकन ने दावा किया कि कांग्रेस ने शिवसेना जैसी सांप्रदायिक पार्टियों का न तो पहले कभी समर्थन किया है और न ही भविष्य में समर्थन करेगी। मालूम हो कि एनसीपी नेता अजित पवार ने सोमवार को दावा किया था कि एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने उनसे फोन पर संपर्क कर सुझाव दिया था कि क्यों न महाराष्ट्र में एनसीपी-कांग्रेस मिलकर शिवसेना की सरकार का बाहर से समर्थन करें।

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