भाजपा की बैठक में आज टूटेंगी ये पुरानी परंपराएं
भाजपा में बदलाव और विस्तार का एक और नजारा दक्षिण भारत में दिखने जा रहा है। दक्षिण के द्वार कर्नाटक में दस्तक देकर सत्ता से विदा होने वाली भाजपा की बंगलूरू में शुक्रवार से राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक शुरू हो रही है।
इसमें वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर मंथन के साथ-साथ भावी रणनीति का तानाबाना बुना जाएगा। सरकार और संगठन में हुए पीढ़ी परिवर्तन के बाद होने वाली कार्यकारिणी की पहली पूर्ण बैठक में बदलाव की आहट साफ महसूस की जा सकती है।
बैठक शुरू होने से पहले ही पार्टी ने पुरानी परंपराओं और तौर तरीकों को छोड़ने का साफ संकेत दे दिया है। मसलन, करीब एक दशक से बैठक के अंत में मार्गदर्शन भाषण देने वाले वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का नाम वक्ताओं की सूची में शामिल नहीं है।
पीढ़ी परिवर्तन का साफ दिखेगा असर
पुरानी परंपराओं को पीछे छोड़ते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कार्यकारिणी का एजेंडा तय करने के लिए होने वाली बैठक में शिरकत की है। पार्टी ने दो प्रस्तावों के जरिए मोदी और अध्यक्ष अमित शाह के जबरदस्त गुणगान की तैयारी की है।
राजनीतिक प्रस्ताव में लोकसभा चुनाव के बाद चार राज्यों में सरकार बनाने के लिए पार्टी जहां शाह की पीठ थपथपाएगी। वहीं विदेश नीति पर प्रस्ताव के बहाने सरकार के कामकाज की चर्चा कर पीएम मोदी की शान में कसीदे पढ़े जाएंगे।
इस बार बैठक का नजारा बेहद बदला-बदला सा होगा। एजेंडा तय करने केलिए कार्यकारिणी से पहले होने वाली बैठक में खुद मोदी ने शिरकत कर इसका संकेत दे दिया है। वक्ताओं की सूची में मार्गदर्शक मंडल में शामिल किए गए दो वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का नाम नहीं है।
बदला बदला से होगा नजारा
इससे पहले आडवाणी अरसे से बैठक के अंत में मार्गदर्शन भाषण देते थे जबकि जोशी को विभिन्न प्रस्तावों में से किसी एक प्रस्ताव पर बोलने का मौका हासिल होता था। बैठक के अंतिम दिन होने वाली रैली भी इस बार बैठक के पहले ही दिन होगी।
पीएम मोदी सहित वरिष्ठ नेता शुक्रवार को ही जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके अलावा पहली बार बैठक में महज दो ही प्रस्ताव पेश किए जाएंगे।
विदेश नीति पर प्रस्ताव केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद रखेंगे तो इसका समर्थन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज करेंगी। राजनीकि प्रस्ताव वैंकेया नायडू पेश करेंगे और वित्त मंत्री अरुण जेटली इसका समर्थन करेंगे।
भूमि अधिग्रहण बिल की चिंता
पीएम मोदी ने भूमि अधिग्रहण बिल को प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। इस मुद्दे पर सरकार और संगठन के मोर्चे पर अभियान चलाने का फैसला किया गया है।
पार्टी के सचिव श्रीकांत शर्मा के मुताबिक, विपक्ष के दुष्प्रचार को दूर करने के लिए पार्टी अपने नौ करोड़ सदस्यों के माध्यम से अभियान चलाएगी।
सदस्यता अभियान के दूसरे चरण में सदस्यों से संपर्क कार्यक्रम के तहत पार्टी बिल पर अपना पक्ष रखेगी। खुद मोदी शनिवार को समापन भाषण में इस बिल पर अपनी रणनीति का खुलासा करेंगे।
बिहार पर होगा खास चिंतन
इस साल बिहार में होने जा रहे विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा नेतृत्व खासा चिंतित है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली करारी पराजय के बाद सचेत पार्टी बिहार के बारे में खास रणनीति बनाएगी।
पार्टी का दावा है कि सदस्यता अभियान के तहत बिहार में पार्टी के सदस्यों की संख्या में 10 गुना बढ़ोत्तरी हुई है।
इन्हें चुनाव अभियान से जोड़ने के लिए शाह खुद इसी महीने पटना में कार्यकर्ताओं से सीधे मुखातिब होंगे। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनाव की भी रणनीति तैयार होगी।