अपने ही सांसदों की गुगली से चकराए मंत्री
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खेल मंत्री सर्वानंद सोनोवाल को संसद में मंगलवार को खिलाड़ी और खेल प्रशासक सांसदों की गुगली का सामना करना पड़ा। कीर्ति आजाद ने तो यहां तक कह दिया कि वह 13वीं लोकसभा से सदस्य हैं और खेल मंत्री के जवाब के शब्दों को छोड़ दें तो पहले की तरह इनमें कोई अंतर नहीं है।
वहीं, भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने यूपीए सरकार की ओर से जाते-जाते नेशनल चैंपियनशिप की ग्रांट में कटौती के मामले को उठा दिया। इसका खुलासा दो माह पूर्व अमर उजाला ने किया था।
बृजभूषण ने यूपीए सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि एक नेशनल चैंपियनशिप के आयोजन पर 50 लाख से एक करोड़ का खर्च आता है। लेकिन मंत्रालय सब जूनियर के लिए छह, जूनियर के लिए चार व सीनियर के लिए दो लाख की ग्रांट देता था। इस पर भी यूपीए सरकार जाते-जाते सभी के लिए यह ग्रांट दो लाख कर गई।
खेल मंत्री ने इस पर ध्यान देने का आश्वासन दिया। कीर्ति और बृजभूषण की ओर से पूछे गए प्रश्नों की स्पीकर सुमित्रा महाजन ने भी सराहना की। मुलायम सिंह यादव ने तो खेलों पर चर्चा करने की भी वकालत की।
स्टेडियमों में नहीं होंगे धार्मिक, राजनीतिक आयोजन
कीर्ति आजाद ने पूछा कि स्टेडियमों का खेल और खिलाड़ियों के लिए किस तरह उपयोग होगा। इस पर खेल मंत्री ने जवाब दिया कि स्टेडियमों में अब से न ही कोई राजनीतिक आयोजन होगा और न ही किसी धार्मिक आयोजन को अनुमति दी जाएगी। इनका उपयोग सिर्फ खेल के लिए होगा।
राज्यवर्धन राठौड़ ने पूछा कि मंत्रालय का 2020 और 2024 ओलंपिक के लिए क्या लक्ष्य है। इनके लिए खेल विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। खेल मंत्री ने जवाब दिया कि ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन के लिए एक स्पोर्ट्स कमेटी का गठन किया जा रहा है। इसमें खिलाड़ियों को शामिल किया जाएगा। साथ ही खेलों की रोजाना समीक्षा के लिए एक मॉनीटरिंग कमेटी बनाई जाएगी। इसमें भी खिलाड़ियों को रखा जाएगा।