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नीतीश बोले, गंभीर नेता हैं राहुल गांधी

Sat, 10 Aug 2013 08:46 AM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Sat, 10 Aug 2013 08:46 AM IST
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bjp lost its importance says nitish kumar

भाजपा से अलग होने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कांग्रेस और भाजपा विरोधी खेमे के करीब आते जा रहे हैं। भाजपा को वह बुझते दिए की लौ बताते हैं तो राहुल गांधी को एक गंभीर नेता मानते हैं। मुलायम सिंह यादव भी उनकी नजर में राष्ट्रीय दृष्टि वाले बड़े नेता हैं। पेश है नीतीश कुमार से अमर उजाला के सलाहकार संपादक विनोद अग्निहोत्री की विशेष बातचीत।

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क्या आपको भाजपा और एनडीए का साथ छोड़ने का कोई अफसोस है?

- हमने विवादित मुद्दों और विवादित व्यक्तित्व दोनों का विरोध किया। ऐसे में हमें दोस्ती टूटने का कोई अफसोस नहीं है।

क्या गैर कांग्रेसवाद का रास्ता बदलेंगे?

- देश में गैर कांग्रेसवाद का जो माहौल बना था, उसे भाजपा ने खत्म कर दिया। महंगाई, भ्रष्टाचार को लेकर पूरे देश में बदलाव का वातावरण बन रहा था, लेकिन भाजपा ने एक व्यक्ति की जिद के चलते इस पर पानी फेर दिया।
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अगर यूपीए सरकार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देती है तो क्या आप कांग्रेस के साथ जाएंगे?
- अगर यूपीए सरकार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देती है, तो मैं इसका स्वागत करूंगा। अगर केंद्र सरकार बिहार की जनता की भावना का आदर करती है तो यहां की जनता के साथ उसे भी फायदा होगा।
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लोकसभा चुनाव में आप किसके साथ जाएंगे?
- अभी हमने एनडीए से अलग होने का बड़ा कदम उठाया है। अब हमारी प्राथमिकता अपने संगठन और सरकार को मजबूत करने की है। कुछ महीने बाद पार्टी की बैठक में इस मुद्दे पर फैसला होगा।

क्या आपने कांग्रेस से गुप्त सहमति के बाद एनडीए से अलग होने का फैसला किया?

- यह बेबुनियाद बात है।

राहुल गांधी के बारे में आपकी क्या राय है?
- देश को लेकर राहुल गांधी का अपना नजरिया है। उनकी राजनीति और कामकाज में गंभीरता दिखती है। उनमें सीखने की ललक है। उन्होंने संगठन की जिम्मेदारी संभाल ली है, लेकिन लगता है कि अभी वह तय नहीं कर पाए हैं कि चुनावों में पार्टी का नेतृत्व करेंगे या नहीं।

क्या पुराने समाजवादियों को एकजुट नहीं किया जा सकता?
- (हंसते हुए) समाजवादी नैनो तकनीक जैसे हो गए हैं। बिखर कर जहां भी हैं ताकतवर हो गए हैं। अगर एकजुट हो जाएं तो देश में सबसे बड़ी ताकत उनकी होगी। अलग-अलग होकर भले ही उनकी ताकत क्षेत्रीय रह गई है, लेकिन सोच राष्ट्रीय है। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव जैसे बड़े नेता हैं, जिनकी सोच राष्ट्रीय सोच है। लेकिन समाजवादियों की एकता अब कल्पना की बात हो गई है।

क्या चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी को दरकिनार करने पर भाजपा से दोस्ती हो सकती है?
- भाजपा जहां जा चुकी है, वहां से उसके लौटने की गुंजाइश नहीं है। अब उसके साथ जाने की बात सोचना उचित नहीं है।

विकास के गुजरात और बिहार मॉडल में कौन भारी पड़ेगा?
- बिहार का विकास मॉडल समावेशी विकास का है। इसमें न्याय के साथ विकास है। सद्भावना और कानून का राज मूल तत्व है। सबका समग्र विकास ही देश को आगे ले जा सकता है, सिर्फ कुछ घरानों का विकास से विकास दर तो बढ़ सकता है, लेकिन देश आगे नहीं बढ़ा सकता है।


आप नरेंद्र मोदी और भाजपा के हमले का मुकाबला कैसे करेंगे?
- भाजपा की मौजूदा आक्रामकता बुझते दिए की आखिरी लौ जैसी है। जब तक वह राजनीति की मुख्यधारा में थी आगे बढ़ी। अब वह फिर से अपनी पुरानी वैचारिक सीमाओं में कैद हो गई है, इसलिए फिर से सिमट कर रह जाएगी।

क्या तीसरे मोर्चे की कोई संभावना है और आप उसका नेतृत्व करेंगे?
- संभावना हर चीज की होती है। अगले कुछ महीनों में स्थिति साफ हो जाएगी। जहां तक मेरा सवाल है तो मेरी प्राथमिकता बिहार का विकास है।

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