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भाजपा ने कार्यकर्ताओं को जेल में सड़ने के लिए छोड़ा

Thu, 10 Jul 2014 08:08 AM IST
Updated Thu, 10 Jul 2014 08:08 AM IST
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bjp left party workers on their fate

कांठ में धर्मस्थल पर लाउडस्पीकर के मुद्दे को लेकर महापंचायत का ऐलान करने वाली भाजपा को न तो अब धर्मस्थल याद रहा और न ही लाउडस्पीकर।

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आलम ये है कि पार्टी ने कांठ थाने की लॉकअप में पुलिस के हाथों पिटे जिलों के अपने अहम ओहदेदारों समेत बाकी 60 कार्यकर्ताओं को भी उनके हाल पर छोड़ दिया है। पार्टी इस मुद्दे को तूल देने के मूड में नहीं है। छोटे मोटे नेताओं के आने का सिलसिला जारी है ताकि कार्यकर्ताओं को एकदम से ये एहसास न हो कि उन्हें पार्टी ने तन्हा छोड़ दिया है।
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जिला जेल की बैरकों में गर्मी में सड़ रहे भाजपा के इन सभी साठ पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने पार्टी की कॉल पर ही कांठ के लिए कूच किया था। रास्ते में पकड़े गए, थाने में पुलिस के हाथों बेरहमी से पिटे, जख्मी हुए और जेल पहुंच गए। लेकिन इसके बावजूद पार्र्टी ने मुद्दे को उस गरमजोशी से नहीं उठाया जिसकी उम्मीद जेल गए कार्यकर्ताओं को थी।

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भाजपा मामला को तूल देने के मूड में नहीं

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प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी के आदेश पर मामले की जांच करने आई भाजपा विधायकों की समिति तो यहां तक कह गई कि भाजपा ने कांठ महापंचायत कॉल की ही नहीं थी। पार्टी के इस कदम से साफ है कि वो सांप्रदायिकता के आधार पर किसी भी मुद्दे को तूल देने के मूड में नहीं है।

दिल्ली में उसकी सरकार है और यदि उसी के नेताओं की वजह से हालात बिगड़े तो सरकार दिल्ली में घिरेगी। पार्टी के आला ओहदेदारों की मानें तो यही वजह है कि प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी मुरादाबाद आने से कतरा रहे हैं। साठ भाजपाइयों को जेल गए छह दिन बीत गए और प्रदेश अध्यक्ष या कोई भी बड़ा नेता मुरादाबाद नहीं पहुंचा, इससे साबित है कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर बहुत गंभीर नहीं है।

ऐसे में अपने जेल जाने पर किसी बड़े आंदोलन की उम्मीद लगाए बैठे भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता निराश हैं। धर्मस्थल और लाउडस्पीकर समेत दलित महिलाओं की पिटाई को तो भाजपा नेताओं ने ठंडे बस्ते में डाल ही दिया है।

रेलवे एक्ट में जमानत, बलवे में तारीख

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कांठ बवाल में जेल में बंद भाजपा के साठ कार्यकर्ताओं को बुधवार को रेलवे एक्ट में तो जमानत मिल गई, लेकिन बलवे में कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। बलवे में भाजपाइयों की जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए अदालत ने अगली तारीख चौदह जुलाई तय की है। इससे पहले अदालत भाजपा नेताओं की अंतरिम जमानत की अर्र्जी को भी नामंजूर कर चुकी है।

भाजपा नेताओं पर दर्ज बलवे के मुकदमे में बुधवार को अदालत में सुनवाई थी। सभी साठ कार्यकर्ताओं की ओर से स्थायी जमानत के लिए जिला जज की कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई थी। जनपद न्यायाधीश ने इस जमानत अर्जी को एडीजे-टू की कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया। एडीजे-टू की अदालत ने जमानत पर सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख तय कर दी है। इससे पहले सात जुलाई को भाजपा नेताओं ने जिला जज की अदालत में अर्जी दाखिल कर अंतरिम जमानत पर रिहा करने की गुहार लगाई थी। जनपद न्यायाधीश ने उस अर्जी को एडीजे-तृतीय की अदालत में ट्रांसफर कर दिया था।

एडीजे तृतीय ने भाजपा नेताओं की अंतरिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी थी। बुधवार को कांठ बवाल में जेल में बंद सभी साठ भाजपा कार्यकर्ताओं को रेलवे मजिस्ट्रेट की कोर्ट में भी पेश किया गया। कांठ में रेलवे ट्रैक जाम करने के मामले में जीआरपी द्वारा दर्ज रेल एक्ट के मुकदमे में सुनवाई हुई। भाजपा नेताओं ने जमानत अर्जी दाखिल की जिसे रेलवे मजिस्ट्रेट ने मंजूर कर लिया।

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