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कांग्रेस के लिए गुजरात की हार पर मरहम जैसी हिमाचल जीत

Fri, 21 Dec 2012 12:13 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 21 Dec 2012 12:13 AM IST
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 bjp leading in gujarat congress in himachal

हिमाचल प्रदेश की जीत की टॉनिक में कांग्रेस ने गुजरात की लगातार पांचवीं हार का गम गीला कर लिया है। मोदी के सामने धराशायी होने के बाद भी हिमाचल के बेहतर नतीजों को लेकर कांग्रेस मान रही है कि महंगाई और भ्रष्टाचार की बदनामी चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया।

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लिहाजा, 2014 के आम चुनाव में पार्टी की नैया पार लगना असंभव नहीं है। कांग्रेस और सरकार के मैनेजरों का चुनावी आकलन इसी थ्योरी पर आगे बढ़ रहा है। खासकर रसोई गैस सिलेंडर की कैपिंग के मुद्दे को भाजपा ने हिमाचल प्रदेश चुनाव में जिस तरह से उछाला था, उसके बावजूद अपने पक्ष में आए नतीजों से कांग्रेस बड़ी राहत महसूस कर रही है।
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पेट्रोल और डीजल के बढ़े दामों के बाद रसोई गैस सिलेंडर की संख्या पर पाबंदी लगाकर यूपीए सरकार ने आम जनता का गुस्सा मोल ले दिया था। उसके बाद माना जा रहा था कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश में पार्टी को इसका खामियाजा उठाना पड़ेगा। वहीं भाजपा ने प्रदेश में रसोई गैस की समस्या को तूल देने के लिए जनता को इंडक्शन कूकर देने का वायदा किया था।
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कांग्रेस के रणनीतिकार मान रहे है कि हिमाचल चुनाव के नतीजे से साफ हो गया है कि जनता कांग्रेस और यूपीए सरकार से इतनी खफा नहीं, जितना मीडिया और भाजपा बता रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि गुजरात में नरेंद्र मोदी के सामने पार्टी पहले ही खुद को कमजोर मान रही थी। इसलिए वहां यूपीए सरकार की महंगाई और भ्रष्टाचार की वजह से पार्टी को हार मिलने का सवाल ही पैदा नहीं होता। पार्टी का मानना है कि हिमाचल में महंगाई और भ्रष्टाचार को भाजपा ने बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की।


पूर्व केंद्रीय मंत्री और अब मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार वीरभद्र सिंह से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले को खूब तूल दिया गया। मगर यह सब कुछ काम नहीं आया। कांग्रेस प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पार्टी की जीत का साफ संकेत है कि देश में यूपीए सरकार के राज में जनता खुश है। हिमाचल के नतीजे को ख्याल में रखकर पार्टी का मानना है कि अगर सरकार अगले डेढ़ साल में बढ़िया होमवर्क करती है तो 2014 के लोकसभा चुनाव में यूपीए सरकार के लिए फिर से सत्ता हासिल करना संभव है।

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