फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   bjp leaders lost their glory against modi

वो पांच चमकदार चेहरे, जो मोदी के आगे पड़ गए फीके

Sat, 16 May 2015 08:35 AM IST
Updated Sat, 16 May 2015 08:35 AM IST
विज्ञापन
bjp leaders lost their glory against modi

नरेंद्र मोदी के लिए वो दिन बेहद खास था जब उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार समिति की कमान सौंपी थी लेकिन उस वक्त किसी ने यह नहीं सोचा था कि पार्टी भारी बहुमत से देश की सत्ता हासिल कर लेगी। अब इसे मोदी का करिश्मा ही कहेंगे कि भाजपा ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए एक नया चुनावी इतिहास लिख दिया।

विज्ञापन


धमाकेदार जीत के बाद प्रधानमंत्री की कुर्सी पर मोदी की ताजपोशी तो हो गई लेकिन ताजपोशी की इस चकाचौंध में भाजपा के वो दिग्गज नेता धुंधले पड़ गए जो कभी पार्टी का चेहरा हुआ करते थे। इनमें से कुछ चेहरे तो लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद के लिए कतार में भी थे लेकिन मोदी लहर में मिली जीत के बाद किसी मंत्रालय की कुर्सी तक भी नहीं पहुंच पाए।
विज्ञापन


कुछ चेहरों को मंत्री पद से नवाजा भी गया लेकिन हालात कुछ ऐसे हैं कि कभी मीडिया की सुर्खियों में रहने वाले भाजपा के ये दिग्गज नेता अहम मंत्रालय मिलने के बावजूद यदा-कदा ही नजर आते हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तो काफी हैं और विपक्षी इसपर चुटकियां भी लेते हैं लेकिन पार्टी के भीतर मोदी का 'रसूख' ही कुछ ऐसा है कि चाहकर भी कोई आवाज नहीं उठती। मोदी सरकार के एक साल पूरा होने के बाद आइए देखते हैं कुछ ऐसे ही चेहरे जो चमकदार तो हैं लेकिन आजकल जरा 'फीके' पड़ गए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

आडवाणी...वाकई उम्र का तकाजा है, या बात कुछ और है?

bjp leaders lost their glory against modi

माना कि वो 'पीएम इन वेटिंग' थे और वाजपेयी सरकार में उप-प्रधानमंत्री भी थे...ये भी माना कि रथयात्रा और राम मंदिर आंदोलन के जरिए उन्होंने भाजपा को एक अलग मुकाम तक पहुंचाया...चलिए ये भी मान लिया कि अहम मुद्दों पर हमेशा पार्टी के दिग्गज नेता के रूप में उनका ओजस्वी भाषण देश की संसद ने सुना, लेकिन अब वो दिन बीत गए।

लोकसभा चुनाव के दौरान चर्चा थी कि अगर भाजपा सत्ता में आई तो लालकृष्ण आडवाणी को वही भूमिका मिलेगी जो यूपीए सरकार में सोनिया गांधी की है और उन्हें एनडीए का अध्यक्ष बनाकर एक सम्मानजनक पद दिया जा सकता है। लेकिन... उम्र का हवाला देकर आडवाणी को भाजपा में एकदम किनारे कर दिया गया। हालांकि आडवाणी का पत्ता कटने के पीछे मोदी विरोध को बड़ी वजह माना गया।

भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक आडवाणी को इस कदर किनारे किया गया कि सरकार बनने के बाद बेंगलूरू में हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उनका संबोधन तक नहीं हुआ और ना ही भाजपा के स्थापना दिवस कार्यक्रम में आडवाणी आए।

प्रधानमंत्री पद पर नरेंद्र मोदी और भाजपा के अध्यक्ष पद पर अमित शाह के बैठने के बाद संसदीय बोर्ड सहित सभी महत्वपूर्ण भूमिकाओं से आडवाणी की छुट्टी हो गई। हालांकि आडवाणी को पार्टी के मार्गदर्शक की भूमिका में रखा गया है, लेकिन सियासी गलियारों में उन्हें 'मूकदर्शक' कहकर चुटकी ली जाती हैं।

कभी सुषमा ने ही उड़ाईं थी यूपीए सरकार की धज्जियां

bjp leaders lost their glory against modi

अब बात करते हैं सुषमा स्वराज की...अगर आपने यूपीए सरकार के शासनकाल के दौरान लोकसभा में दिया गया तत्कालीन नेता विपक्ष सुषमा स्वराज का वो भाषण सुना हो जिसमें उन्होंने एफडीआई के मुद्दे पर केंद्र सरकार की धज्जियां उड़ाई थी तो आप मान लेंगे कि वाकई ये चेहरा आजकल कुछ फीका-फीका सा है।

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले शिवसेना ने खुलेआम ऐलान तक कर दिया था कि दिवंगत बाला साहेब ठाकरे सुषमा स्वराज को ही प्रधानमंत्री पद के दावेदार के तौर पर देखना चाहते थे लेकिन इन दिनों आलम ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों के दौरान खुद विदेश मंत्री सुषमा ही उनके साथ दिखाई नहीं पड़ती।

दिल्ली में निर्भया गैंगरेप का मामला हो या अरुणाचली छात्र नीडो तानियान की हत्या, या फिर आतंकवाद के मुद्दे पर यूपीए सरकार का घेराव...सुषमा स्वराज हमेशा आगे बढ़कर अपनी उपस्थिति का एहसाह कराती रही हैं।

यूपीए सरकार के समय भाजपा का मुख्य चेहरा रहीं सुषमा स्वराज शायद ही कभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद की बैठकों में गैरहाजिर रही हों। हर मुद्दे पर पार्टी की तरफ से जवाब देने के लिए सुषमा हमेशा अगली पंक्ति की नेताओं में दिखती थीं लेकिन इन दिनों शायद ही किसी मुद्दे पर मीडिया में उनका चेहरा दिखाई देता हो।

तब भाजपा की ताकत माने जाते थे जोशी

bjp leaders lost their glory against modi

मोदी से पहले वाराणसी में भाजपा का झंडा लहराने वाले और वाजपेयी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्रालय जैसा अहम विभाग संभालने वाले भाजपा के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी भी इन दिनों पार्टी में अलग-थलग पड़े हैं।

कभी वाजपेयी, आडवाणी, और मुरली मनोहर जोशी की तिकड़ी भाजपा का चेहरा ही नहीं बल्कि पार्टी की ताकत भी मानी जाती थी। यूपीए सरकार के दौरान भी जोशी लोक लेखा समिति के अध्यक्ष के रूप में बड़ी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

लोकसभा चुनाव से पहले मोदी के लिए वाराणसी सीट छोड़ने के सवाल पर नाराजगी दिखाने वाले जोशी को उम्र का हवाला देकर मंत्रालय से महरूम रखा गया। यहीं नहीं, संसदीय बोर्ड से भी उनकी छुट्टी कर दी गई। जोशी इस समय कानपुर से भाजपा के सांसद हैं लेकिन शायद ही किसी अहम मौके पर वे पार्टी के कार्यक्रम में मौजूद रहते हैं।

राम मंदिर आंदोलन के दौरान भी मुरली मनोहर जोशी ने आडवाणी के कंधे से कंधा मिलाकर भाजपा को ताकत दिलाई लेकिन उन्हें भी आडवाणी के साथ मार्गदर्शक मंडल में डाल दिया गया है।

राजनाथ सिंह...अब ज्यादा नजर नहीं आते

bjp leaders lost their glory against modi

2014 के आम चुनाव से पहले मोदी की प्रधानमंत्री पद पर दावेदारी को लेकर रूठने-मनाने का जो दौर चला तो उसमें हर मौके पर भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह सामने खड़े नजर आए। जब-जब मीडिया में भाजपा के भीतर अंतर्कलह को लेकर कोई सुगबुगाहट हुई तो राजनाथ सिंह ने पुरजोर तरीके से पार्टी का बचाव किया।

भाजपा के सत्ता में आने के बाद राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह पर रिश्वतखोरी के आरोप लगे और सीधे-सीधे मोदी खेमे को शक की निगाहों से देखा गया। सियासी गलियारों में चर्चा यहां तक थी कि मोदी ने पंकज को बुलाकर उनसे पैसे लौटाने को कहा और इसके बाद राजनाथ किनारे लगने शुरू हो गए।

मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद सरकार में जब नंबर दो के नेता का सवाल उठा तो राजनाथ का ही नाम उभरकर सामने आया लेकिन हालात ये हैं कि मोदी के विदेश दौरों के दौरान कैबिनेट की मीटिंग तक नहीं हुई।

सरकार बनने से पहले पार्टी के हर मुद्दे पर खुलकर राय रखने वाले और यूपीए सरकार को अपने करारे हमलों से धराशाई करने वाले राजनाथ अब केवल गृह मंत्रालय से संबंधित मुद्दों पर ही मीडिया के सामने आते हैं। यानी मोदी की चमक के आगे इनका असर भी फीका पड़ गया है।

आखिर कहां चले गए हैं अनंत कुमार

bjp leaders lost their glory against modi

कभी भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा के प्रभारी रहे अनंत कुमार कर्नाटक में भी पार्टी का बड़ा चेहरा हुआ करते थे। यूपीए सरकार की नीतियों पर संसद से लेकर सड़क तक हमला बोलने वाले नेताओं में शामिल रहे अनंत कुमार इन दिनों रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय का कामकाज देख रहे हैं।

यूपीए सरकार के समय अनंत कुमार भाजपा के महासचिव थे और महंगाई, आतंकवाद व नक्सलवाद जैसे बड़े मुद्दों को लेकर उन्होंने कई बार सरकार को संसद में घेरा था ऐसे में चर्चा थी कि एनडीए सरकार में उन्हें कोई बड़ा मंत्रालय दिया जा सकता है लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

मोदी सरकार के कार्यकाल को एक वर्ष पूरा होने को है लेकिन इस एक साल में अनंत कुमार की पुरानी चमक कहीं खो गई है। कहीं ये लोकसभा चुनाव से पहले मोदी विरोधी खेमे में शामिल होने का असर तो नहीं?

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed