असम में सोनवाल के चेहरे के सामने आने बाद नेताओं में बढ़ी उत्सुकता
असम में सर्वानंद सोनवाल का चेहरा सामने करने के बाद अन्य चुनावी राज्यों में भी भाजपा नेताओं की उत्सुकता बढ़ गई है। जल्द ही उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब सरीखे चुनावी राज्यों से भी चेहरा सामने करने की मांग उठ सकती है। जिसके कारण भाजपा आलाकमान को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सियासी खरोंच से बचाने की कवायद में भाजपा ने अपनी चुनाव रणनीति में बदलाव तो कर दिया है। लेकिन यह रणनीति आने वाले समय में भाजपा आलाकमान के गले की फांस बन सकती है। उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के भाजपा नेताओं में में पहले से ही नेतृत्व को लेकर सिरफुट्टौवल जारी है।
अब यदि पार्टी ने किसी एक नेता का चेहरा आगे कर चुनाव की रणनीति बनाई तो बाकी नेता दल की संभावनाओं को पलीता लगा सकते हैं। प्रदेश स्तर पर नेताओं के सिरफुट्टौवल को रोकने के लिए ही भाजपा नेतृत्व ने पीएम मोदी का चेहरा सामने कर चुनाव में जाने का फार्मूला अपनाया था। लेकिन बिहार की हार ने उसे रणनीति बदलने पर मजबूर किया है।
आगामी चुनावों में चाहिए जिम्मेदारी
बताया जा रहा है कि बदली परिस्थितियों में राज्य के नेताओं ने नए सिरे से अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। चुनावी राज्यों में नेतृत्व की लालसा पाल रहे नेता अब संगठन चुनावों के जरिए प्रदेश की कमान अपने हाथ में लेना चाह रहे हैं। ताकि सियासत चमकाने का उन्हें मौका मिल सके।
उत्तराखंड में नेतृत्व की चाहत रखने वाले एक नेता का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में 60 प्रतिशत संभावनाएं स्वत: ही बन जाती हैं। नेताओं की इस सोच के बाद संगठन को लेकर रस्साकस्सी तेज होने की भी उम्मीद है।
मोदी के नाम पर चुनाव लड़े जाने के कारण राज्य के नेताओं की चुनाव से पहले चेहरा बनने की मंशा पर लगाम लगी हुई थी। लेकिन असम में सोनवाल को चेहरा बनाने के बाद अन्य राज्यों के नेताओं की मंशा एक बार फिर से जाग गई है।