भागवत के बयान पर BJP में बवाल, जमकर बरसे बिहारी नेता
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आरक्षण की समीक्षा का संघ प्रमुख मोहन भागवत का बयान बीजेपी के लिए बवाल बन गया है। बिहार चुनावों में हार के बाद स्थानीय नेता बयान के विरोध में आवाज उठाने लगे हैं। मधुबनी से सांसद हुकुमदेव नारायण ने आरक्षण के मसले पर संघ प्रमुख मोहन भागवत को खरी-खरी सुनाई है।
एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख ने बयान ने लोगों को अंदर से हिला दिया, नरेंद्र मोदी के प्रति उनकी आस्था थी लेकिन उन्हें लगा कि संघ अपने किसी गुमनाम कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री बनाकर आरक्षण खत्म कर सकता है।
उन्होंने कहा, 'सामाजिक शोषण के विरुद्घ बिहार के लोगों ने काफी संघर्ष किया है, कुर्बानी दी है। मोहन भागवतजी का ऐसे समय बयान आना, दलित समाज के जो लोग थे उनके मन में भाजपा के प्रति अविश्वास पैदा किया, नरेंद्र मोदी के प्रति उन्होंने अपनी आस्था व्यक्त की है, क्योंकि जहां कहीं भी जाते थे उनकी रैली में लाखों की संख्या में गरीब किसान आते थे। आरक्षण के मामले में संघ प्रमुख के बयान ने बिहार के लोगों ने अंदर से हिला दिया। लोगों को ये लगा कहीं ना कहीं संघ के द्वारा ऊंची जाति के गुमनाम व्यक्ति को मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा, और कर्पूरी ठाकुर ने जो राज्य सेवा में 26 फीसदी का आरक्षण दिया था, वो खत्म कर दिया जाएगा। और जब ये उनकी धारणा बन गई तो उसको हम निर्मूल नहीं कर पाए।'
लोगों को लगा, बीजेपी संघ की गुलाम
हुकुमदेव नारायण ने कहा, 'आरक्षण के सवाल पर बिहार में कर्पूरी ठाकुर के समय में गृहयुद्घ की स्थित बनी थी, खूनी संघर्ष हुए थे। कितने कठिन संघर्ष के बाद पिछड़े वर्गों को आरक्षण मिला। किन्हीं के लिए केवल वो नौकरी हो, पिछड़े और दलित के लिए आरक्षण केवल रोटी का जरिया नही सामाजिक सम्मान का सबसे बड़ा साधन है।'
बिहार में भाजपा की हार का सबसे बड़ा कारण मोहन भागवत के बयान को मानते हुए हुकुमदेव ने कहा, 'आरक्षण ने पिछड़ी जाति के 90 फीसदी लोगों को एकजुट किया, मुस्लिम समुदाय ने भी अपने को इस एकता से जोड़ लिया और ये दो समुदाय जुड़ जाए तो बिहार में वोट बचता कहां है। भाजपा को जितनी सीट मिल गई उसके लिए उसे धन्यवाद देना चाहिए कि उसने अपने प्रचार और प्रबंधन से इतनी सीटें बचा लिया, नहीं तो इस हवा में कुछ बचता कहां।'
मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित न किए जाने के मसले पर उन्होंने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ा, लेकिन दलित और पिछड़ी जाति के मन में ये संशय बैठ गया कि भाजपा द्वारा ऊंची जाति को कोई न कोई व्यक्ति थोप दिया जाएगा। वो आएगा तो हमारा सब अधिकार छीन लेगा।
उन्होंने कहा कि दलितों और पिछड़ों के मन में ये विश्वास पैदा हो गया कि भाजपा वही करेगी, जो संघ कहेगा। और संघ प्रमुख ने कह दिया कि आरक्षण की समीक्षा होनी है। किसी भी सफाई का असर नहीं हुआ, क्योंकि लोगों ने मान लिया कि संघ ने कह दिया है और भाजपा संघ की गुलाम है, इसलिए इन लोगों के कहने का कोई मतलब नहीं है।
सीपी ठाकुर ने भी कहा, भागवत के बयान से हुआ नुकसान
बिहार में भाजपा के वरिष्ठ नेता सीपी ठाकुर ने भी कहा कि संघ प्रमुख के बयान से भाजपा को नुकसान हुआ। इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने कहा कि लालू और नीतीश ने आरक्षण का इस्तेमाल भाजपा को नुकसान पहुंचाने के लिए किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीसरे चरण से पहले सफाई दी, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।
उल्लेखनीय है कि गुजरात में पटेल समुदाय द्वारा मांगे जा रहे आरक्षण के मुद्दे पर पांचजन्य और ऑर्गेनाइजर को दिए साक्षात्कार में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सितंबर में कहा 'हमारा मनाना है, ऐसे लोगों की एक कमेटी बनाई जाए, जो वास्तव में पूरे देश के हितों की चिंता करते हों और सामाजिक एकता के लिए प्रतिबद्घ हों। उन्हें निर्णय करना चाहिए कि किसी वर्ग को आरक्षण की आवश्यकता है और कब तक है?'
संघ प्रमुख के बयान को राजद सीप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने मुद्दा बना लिया और मोदी सरकार को चुनौती दे डाली थी कि वे आरक्षण खत्म करके दिखाए। उन्होंने चुनावों को 'अगड़ा बनाम पिछड़ा' की लड़ाई बनाकर मतों का ध्रुवीकरण भी किया।