यूपी: 'नरक से भी बदतर जेल में निर्वस्त्र घूमती हैं महिलाएं'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादाबाद जेल की महिला बैरक में दहलीज पर ही मानवाधिकार के उसूल दम तोड़ देते हैं। जेल मैनुअल और कानून की किताबों में बेशक कायदे कानून की लंबी फेहरिस्त हो। लेकिन यहां जेल के हाकिमों के मुंह से निकले अल्फाज ही आखिरी कानून हैं। इस बैरक के हालात ऐसे हैं कि यदि इसे नहीं तो नरक किसे कहेंगे।
जेल की ये बैरक 27 महिला बंदियों के लिए बनाई गई थी। जिसमें 200 महिलाएं अपने बच्चों के साथ कैद हैं। लेटना तो दूर बैठना तक मुमकिन नहीं है। जगह हो न हो रहना इसी बैरक की सलाखों में है क्योंकि जिला जेल में यही इकलौती महिला बैरक है। लिहाजा शाम ढलते ही महिला बंदियों को इस बैरक में ठूंस दिया जाता है, शायद जानवरों से भी ज्यादा बदतर हालत में। 28 मासूम बच्चे भी इसी बैरक में कैद हैं जिसमें सांस तक लेना मुश्किल है।
चार महीने तक इसी बैरक में किसी तरह सांसें लेकर आजाद हुई भाजपा महिला मोर्चा की महानगर अध्यक्ष मदालसा शर्मा ने जेल की महिला बैरक के जो हालात बयां किए वो रूह को कंपा देने वाले हैं।
हालात बताते हुए रो पड़ीं भाजपा नेत्री
भाजपा नेत्री को जेल अफसरों से कोई शिकायत नहीं लेकिन बैरक के हालात बताते-बताते उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। बोलीं, जो अकेली हैं फिर भी गनीमत है, सबसे ज्यादा बदतर हाल उन महिला बंदियों का है जिनके साथ उनके मासूम बच्चे भी हैं। बैरक में 27 की जगह 200 महिलाएं कैद हैं ऐसे में कदम रखने को भी जगह मुश्किल से ही मिलती है। इसी बैरक में 28 बच्चे भी हैं, जिन्हें गोद में लेकर महिलाएं पूरी - पूरी रात खड़ी रहती हैं। इंतजार करती हैं कि सूरज निकलेगा और वो बैरक से बाहर निकलकर बैठ सकेंगे, लेट सकेंगी।
भाजपा नेत्री बताती हैं कि बैरक तो छोड़ ही दीजिए उससे अटैच बैरक के दुर्गंध भरे टायलेट तक में महिलाएं खड़े होकर रात बिताती हैं। मासूम बच्चे रोते हैं बिलखते हैं लेकिन करें भी तो क्या, रात यहीं कटनी है, शाम होते ही बैरक में जाने के नाम से महिलाओं की रूह कांप उठती है। इसी बैरक में ऐसी महिला बंदी भी हैं जिनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। पहनने को कपड़े नहीं हैं और मानसिक हालत ठीक नहीं होने पर कई महिला बंदी तो निर्वस्त्र घूमती हैं।
बंदियों को खाना तो वक्त से दिया जाता है लेकिन कपड़े और जरूरत की दूसरी चीजें यहां उम्मीद करना भी बेमानी है। जिन्हें अस्पताल में होना चाहिए वो भी बैरक में कैद हैं। उस बैरक में जिसमें रात को हवा इतनी भारी हो जाती है कि सांस लेने के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ती है।