हिमाचल चुनावः कांटे की टक्कर में भी बीजेपी को बढ़त
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश में चुनावी संग्राम चरम पर है। चार नवंबर को होने वाले चुनाव के लिए सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है। हालांकि एक अनुमान के मुताबिक बीजेपी को इस मुकाबले में हल्की बढ़त मिलती दिख रही है लेकिन ये बढ़त पार्टी को 2007 में मिली बढ़त के मुकाबले कम है। इस बीच लोकहित पार्टी के संयोजन में भाकपा, माकपा और कुछ अन्य छोटे दल भी इस चुनाव को कई जगहों पर त्रिकोणीय बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने सभी 68 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए है, वहीं बसपा ने 66, माकपा ने 16, भाकपा ने 7, तृणमूल कांग्रेस ने 25, सपा ने 15, हिमाचल लोकहित पार्टी ने 36, लोक जनशक्ति पार्टी ने 18 और हिमाचल स्वाभिमान पार्टी ने 15 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किये हैं, जबकि 105 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
इस बार कुल 459 उम्मीदवारों का भाग्य दांव पर लगा है जिसमें 34 महिला प्रत्याशी हैं। प्रदेश में 46,08,359 मतदाताओं में 23,76,587 पुरूष और 22,31,772 महिला मतदाता हैं। राज्य के मतदाताओं में 74,646 सैन्यकर्मी भी शामिल हैं। लाहौल स्पीति (सुरक्षित) क्षेत्रफल के हिसाब से राज्य में सबसे बड़ा विधानसभा क्षेत्र है जबकि सूलाह मतदाताओं की संख्या के हिसाब से सबसे बड़ा क्षेत्र है। मतदाताओं की संख्या के हिसाब से लाहौल स्पीति सबसे छोटा विधानसभा क्षेत्र है।
इस बीच एक चैनल द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार राज्य में भाजपा को हल्की बढ़त मिलती दिख रही है। यह बढ़त 2007 में मिली बढ़त के मुकाबले कम है। बीजेपी को 41 फीसदी, कांग्रेस को 40 फीसदी और अन्य को 19 फीसदी वोट मिलने की उम्मीद है। यानी कांग्रेस को पिछले चुनाव के मुकाबले एक फीसदी वोटों का फायदा होगा जबकि बीजेपी को तीन फीसदी का नुकसान। अन्य को दो फीसदी का फायदा होता दिख रहा है।
सर्वे के अनुसार पूर्वी हिमाचल की 34 सीटों पर जहां शिमला में कांग्रेस आगे है, वहीं मंडी, सिरमौर और सोलन में कांटे की टक्कर है। पश्चिमी हिमाचल की 34 सीटों पर हमीरपुर में बीजेपी आगे है तो कांगड़ा और ऊना में कांटे की टक्कर है।