भाजपा ने उच्च जाति के गरीबों को आरक्षण के समर्थन का संकेत दिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजस्थान में आरक्षण पर जारी विवाद के बीच भाजपा ने संकेत दिए हैं कि वह सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को लाभ दिए जाने के लिए सकारात्मक कदम का समर्थन करेगी। हालांकि पार्टी वर्तमान आरक्षण नीति में किसी तरह के बदलाव के खिलाफ है।
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को कहा कि एससी, एसटी और पिछड़ा वर्ग के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण पर बात नहीं की जा सकती। इस सीमा को ध्यान में रखकर दलित और पिछड़ा वर्ग के साथ समाज के उन लोगों का विकास करना, जिन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है, हमारी चिंता और योजना का मुख्य पहलू है।
जब उनसे यह पूछा गया कि क्या पार्टी संविधान में संशोधन चाहती है ताकि आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर उच्च जाति के लोगों को भी आरक्षण का लाभ मिल सके तो उन्होंने कहा कि अभी यह मुद्दा नहीं है।
उन्होंने इससे इनकार किया कि राजस्थान सरकार द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने से सामान्य वर्ग का घाटा होगा। केंद्रीय मंत्री के अनुसार यह कोटा सामान्य वर्ग के गरीब लोगों के लिए भी है।
उन्होंने याद दिलाया कि वसुंधरा राजे ने बतौर मुख्यमंत्री अपने पिछले कार्यकाल में भी इसी तरह का कदम उठाया था। तब मामला न्यायपालिका में उलझ गया था। पार्टी को विश्वास है कि इस बार ऐसा नहीं होगा।
कांग्रेस ने कहा हास्यास्पद कदम
राजस्थान में विशेष पिछड़ा वर्ग (एसबीसी) और आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) को आरक्षण देने पर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने राज्य सरकार के कदम को हास्यास्पद करार देते हुए कहा है कि संविधान में ईबीसी के लिए आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। वहीं सरकार ने उन राज्यों का उदाहरण देकर अपने फैसले का बचाव किया है, जहां आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से अधिक है।
गुर्जर समेत एसबीसी में शामिल अन्य जातियों को पांच फीसदी तथा ईबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए मंगलवार को राजस्थान विधानसभा में दो बिल पारित किए गए थे। ईबीसी के तहत सभी वर्गों को लाभ मिलेगा।
सरकार के निर्णय पर इसलिए अंगुलियां उठ रही हैं क्योंकि नए नियमों से राज्य में आरक्षण की सीमा 68 फीसदी पहुंच जाएगी, जबकि सुप्रीम कोर्ट का साफ निर्देश है कि यह आंकड़ा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
बुधवार को कांग्रेस की तरफ से सचिन पायलट ने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि संविधान में केवल सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए आरक्षण का प्रावधान है।
ऐसे में ईबीसी को कैसे लाभ दिया जा सकता है। उन्होंने सरकार के फैसले को ढकोसला करार दिया और कहा कि कांग्रेस संविधान के अनुसार आरक्षण का समर्थन करती है।
दूसरी ओर राज्य के संसदीय कार्य मंत्री आरएस राठौर ने कहा है कि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में भी आरक्षण की अधिकतम सीमा लांघी गई है। अब सरकार को दोनों बिलों पर राज्यपाल कल्याण सिंह की सहमति का इंतजार है ताकि अधिसूचना जारी की जा सके।