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अविश्वास प्रस्ताव लाने पर दुविधा में भाजपा

Wed, 20 Mar 2013 11:39 PM IST
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा Updated Wed, 20 Mar 2013 11:39 PM IST
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bjp in dilemma to bring no confidence motion

यूपीए के किले की लगातार दरकती दीवारों के बावजूद भाजपा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर दुविधा में है।

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ममता की तृणमूल कांग्रेस और करुणानिधि की द्रमुक के अलग होने के बावजूद भाजपा की यह हिचक कायम है क्योंकि पार्टी को सरकार के सामने सपा और बसपा के तौर पर दो मजबूत कंधे दिखाई दे रहे हैं, जो सियासी भूकंप आने पर सरकार को सहारा दे सकते हैं।

इसके अलावा भाजपा चुनावी साल में सरकार को गिराने से बचना चाहती है। पार्टी को आशंका है कि अविश्वास प्रस्ताव से सरकार गिरने पर यूपीए के पाप तो धुल जाएंगे, लेकिन केंद्र में अस्थिरता फैलाने का ठीकरा भाजपा के सिर फूटेगा। सरकार को जनता की सहानुभूति मिलने लगेगी। इसलिए भाजपा बजट सत्र के दौरान सियासी तापमान के बढ़ जाने के बावजूद खामोश है।
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हालांकि पार्टी ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की संभावना से इंकार नहीं किया है। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अमर उजाला से कहा कि यह सरकार अपने ही अंतरविरोधों से गिरेगी, भाजपा की नीति नहीं है कि किसी सरकार को अस्थिर किया जाए। लेकिन अब मौजूदा परिस्थितियों में क्या किया जाए, पार्टी जल्दी ही फैसला करेगी।
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अविश्वास प्रस्ताव पर राजनाथ ने कहा कि जल्दी ही बैठक कर अंतिम निर्णय कर लिया जाएगा। उन्होंने माना कि द्रमुक के बाहर होने पर भी सरकार को ज्यादा खतरा नहीं है क्योंकि उसे बचाने के लिए सपा और बसपा जो हैं।

दरअसल, परमाणु करार के उदाहरण को याद कर भाजपा मान रही है कि सरकार के लिए संसद में बहुमत जुटाना कठिन नहीं है। अविश्वास प्रस्ताव लाने पर अगले छह माह के लिए सरकार को ऑक्सीजन मिल जाएगी।


एक राय यह भी है कि अविश्वास प्रस्ताव लाकर सपा और बसपा को कांग्रेस के पाले में खड़ा किया जाए। इससे खासतौर पर उत्तर प्रदेश में पार्टी को लाभ मिल सकता है और यूपीए सरकार के बहुमत जुटाने के तौर-तरीकों का भी लोगों तक प्रचार किया जा सकता है।

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