बंगाल-बिहार में चुनाव हों तो क्या होगा बीजेपी का?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगामी सिंतबर-अक्टूबर में बिहार में विधानसभा चुनाव संभावित माने जा रहे हैं। अगले साल बंगाल में चुनाव होंगे, लेकिन ओपिनियन पोल का दौर अभी से शुरू हो गया है।
एबीपी न्यूज़- नीलसन के सर्वे में ये बात सामने आई कि बिहार और बंगाल दोनों जगह बीजेपी कमजोर पड़ती दिख रही है।बंगाल के ओपिनियन पोल की बात करें तो यहां अगले विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस सबसे आगे दिख रही है।
294 सीटों वाली विधान सभा में 198 सीटें केवल तृणमूल के खाते में जा रही है, वहीं कांग्रेस को कुल 40 सीटें मिल सकती हैं। लेफ्ट बंगाल में फिर उभरता हुआ नहीं दिखाई दे रहा है। इसे सर्वे केवल 36 सीटें दे रहा है।
बिहार में थोड़ी बेहतर है स्थिति
बंगाल में भाजपा कांग्रेस औऱ लेफ्ट दोनों से पीछे दिख रही है। सर्वे में बताए गए आंकड़ों के मुताबिक भाजपा को आगामी बंगाल विधानसभा चुनावों में केवल 12 सीटें मिलेंगी। वहीं अन्य को केवल 8 सीटें मिल सकती हैं।
बंगाल में यह सर्वेक्षण 42 में से 16 लोकसभा सीटों पर किया गया। जिसमें 2501 वोटर शामिल थे। बिहार में भाजपा की स्थिति थोड़ी बेहतर नजर आ रही है। यहां अगर अभी चुनाव होते हैं तो भाजपा, राम विलास पासवान की पार्टी लोकजनशक्ति पार्टी और उपेंद्र कुशवाहा की आरएसएलपी मिल कर चुनाव लड़े तो उन्हें बहुमत के करीब 112 सीटें मिल सकती हैं।
यह तब हो सकता है जब लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाइटेड गठबंधन में चुनाव लडे़। अगर राजद और जदयू एक साथ चुनाव नहीं लड़ते तो इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा और वो वहां बहुमत की सरकार बनाने में सफल हो जाएगी। बिहार में यह सर्वे 40 में से 16 लोक सभा सीटों पर किया गया जिसमें 2465 वोटर शामिल थे।
कांग्रेस को केवल दो सीटें
सर्वे ने बिहार को कांग्रेस में केवल 2 सीटें दी है। सर्वे के अनुसार अगर राजद अकेले चुनाव लड़े तो उसे बिहार में 42 सीटें मिलेंगी वहीं जदयू को 64 सीट मिलेगी। सर्वे में ये बात सामने आई है कि बिहार में लोगों का मानना है कि मोदी सरकार के एक साल में बिहार के अच्छे दिन आएं हैं।
ऐसा मानने वाले कुल 73 प्रतिशत लोग हैं, वहीं 25 प्रतिशत लोगों का ये मानना है कि मोदी सरकार के एक साल में बिहार का विकास नहीं हुआ है। बिहार में सबसे लोक प्रिय नेता का दर्जा नीतिश को मिला है,ऐसा मानने वाले 52 प्रतिशत लोग हैं।
वहीं नीतीश और उनकी पार्टी के लिए मुसीबत का सबब बने जीतन राम मांझी को केवल 8 प्रतिशत लोगों ने ही लोकप्रिय नेता के तौर पर माना है। भाजपा के सुशील को मोदी को केवल 17 प्रतिशत लोग लोकप्रिय मानते हैं।
बिहार में नीतीश कर रहे हैं अच्छा काम
सर्वे में ये भी सवाल पूछा गया कि नीतिश और मोदी में कौन सबसे बेहतर नेता है तो यहां मोदी हर बार की तरह बाजी मार गए। मोदी को नीतीश से बेहतर 64 प्रतिशत लोग मानते हैं।
सर्वे में ये कहा गया है कि 20 प्रतिशत लोगों को नीतिश कुमार का काम बहुत अच्छा लगा है, वहीं नीतीश कुमार का काम बहुत ही खराब मानने वाले केवल 5 प्रतिशत है। सर्वे के मुताबिक बिहार में अगर भाजपा और जदयू एक साथ मिलकर चुनाव लड़े तो सीटों का आंकड़ा 207 के पार हो जाएगा।
बिहार की राजनीति में फिलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा है।इस बार आम आदमी पार्टी अपना शासनकाल पूरा करेगी इसमें कोई गुंजाइश नहीं है लेकिन सर्वे में जो बात निकल कर सामने आई है वो केजरीवाल और उनकी पार्टी दोनों के लिए चिंताजनक है।
100 दिनों में बदली दिल्ली की पसंद?
दिल्ली के संबंध में देखें तो 'आप' के प्रबल समर्थक झुग्गी और झोपड़ी वाले माने जाते रहे हैं लेकिन वो सर्वे के मुताबिक वो केजरीवाल के काम से संतुष्ट नहीं है।
दिल्ली के लोगों से जब ये सवाल किया गया कि दिल्ली मेें सबसे लोकप्रिय नेता कौन है? तो यहां प्रधानमंत्री मोदी बाजी मार गए। मोदी को अपना लोकप्रिय नेता मानने वाले 48 प्रतिशत लोग हैं, वहीं अरविंद केजरीवाल को सिर्फ 44 प्रतिशत लोग ही लोकप्रिय नेता मानते हैं। वहीं राहुल गांधी को सिर्फ 7 प्रतिशत लोग ही लोकप्रिय नेता मानते हैं।
वादे पूरा करने के सवाल पर कुछ लोगों ने माना कि कम से कम उन्होंने बिजली पानी के लिए जो वादा किया था उसे तो पूरा किया है जबकि ज्यादातर लोग मानते हैं कि केजरीवाल अपने वादे पूरा करने में असफल रहे हैं।