मोदी की लहर, फिर भी मुश्किल में भाजपा
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नरेंद्र मोदी की लहर में चुनावी वैतरणी पार करने की उम्मीद लगाए भाजपा को लोकसभा की सियासी जंग के लिए ‘योग्य’ उम्मीदवार नहीं मिल पा रहे हैं।
खासतौर से उत्तर प्रदेश और बिहार से कम से कम 60 सीटें पाने की कोशिश में लगी भाजपा को उम्मीदवार ढूंढने में परेशानी हो रही है। इसी वजह से भाजपा दलबदलुओं अथवा जनता से कटे पूर्व नौकरशाहों को भी गले लगाने से परहेज नहीं कर रही है।
हालांकि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के उदय के कारण अब भाजपा पर भी साफ सुथरे उम्मीदवार उतारने का दबाव है। भाजपा महाशिवरात्रि से उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया शुरू करने जा रही है।
70 सीटों पर चाहिए जीतने वाले प्रत्याशी
भाजपा का मानना है कि यदि उत्तर प्रदेश और बिहार की 120 सीटों में से भाजपा कम से कम आधी सीटें अपनी झोली में डाल सकी, तो मोदी की ताजपोशी आसान हो जाएगी।
इसलिए उत्तर प्रदेश के लिए प्रत्याशी चयन करने का मामला खुद पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह, अमित शाह व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से सरकार्यवाहक कृष्ण गोपाल और शिवनारायण देख रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में पार्टी के अभी 10 सांसद हैं। इसलिए 70 पर उसे ‘जीतने योग्य’ प्रत्याशी चाहिए। कल्याण सिंह के भाजपा में लौट आने के बाद खुर्जा क्षेत्र की चार सीटों पर वही नाम देंगे।
दो दर्जन विधायक मांग रहे लोकसभा का टिकट
मोदी को वाराणसी से मैदान में उतारने की मांग हो रही है, जबकि डॉ. मुरली मनाहर जोशी फिर से मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। इसी तरह अयोध्या के लिए दमदार प्रत्याशी नहीं मिल पा रहा है। इसलिए संघ उमा भारती को यहां से मैदान में उतारना चाहता है, हालांकि उनके झांसी से लड़ने की संभावना ज्यादा है।
खास बात यह है कि मोदी की लहर देख प्रदेश के वे बुजुर्ग नेता भी फिर से मैदान में कूदना चाहते हैं, जो विधानसभा का चुनाव नहीं जीत पा रहे हैं। पार्टी के लगभग दो दर्जन विधायक भी टिकट मांग रहे हैं।
कुल मिलाकर प्रदेश में कलराज मिश्र, विनय कटियार, एसपी शाही, रमापतिराम त्रिपाठी, श्याम बिहारी मिश्र, लालजी टंडन, हुकुम सिंह, एलके वाजपेयी जैसे नाम सामने हैं।
इनके अलावा कुछ पूर्व नौकरशाह अथवा बसपा या सपा से आए नेता हैं। बिहार में भी जदयू से गठबंधन टूट जाने के बाद भाजपा को ज्यादा नये चेहरों की तलाश है।