नेताओं की लगी कतार, भाजपा थमा रही वेटिंग टिकट
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महाराष्ट्र में अक्तूबर के दूसरे सप्ताह में संभावित विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आयाराम-गयाराम का खेल शुरू हो गया है। चूंकि राज्य में सत्ताधारी कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के खिलाफ बयार चल रही है इसलिए भाजपा और शिवसेना में शामिल होने वाले नेताओं की कतार लग गई है।
शिवसेना हालांकि दूसरे दल से आने वाले लोगों को कंफर्म टिकट दे रही है लेकिन भाजपा में कंफर्म टिकट के लाले पड़े हैं इसलिए आगंतुकों को वेटिंग टिकट ही थमाया जा रहा है।
शिवसेना में दूसरे दलों के नेताओं के शामिल होने का सिलसिला जारी है। अब तक एनसीपी में हाशिए पर गए कुछ उत्तर भारतीय नेता भी जल्द शिवसेना में शामिल होने वाले हैं।
इसी तरह भाजपा में भी पश्चिम महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और मुंबई से कांग्रेस-एनसीपी के तकरीबन दो दर्जन से अधिक नेता बीजेपी में शामिल होना चाहते हैं। शिवसेना में आने वाले नेताओं का टिकट लगभग कंफर्म है। पर, भाजपा में वेटिंग टिकट देने की अपनी मजबूरियां हैं।
भाजपा में 'एकला चलो' की मांग
शिवसेना से गठबंधन के चलते राज्य में भाजपा की राजनीतिक हिस्सेदारी सिर्फ 40 फीसदी ही है। इससे दूसरे दलों से आने वालों को मुमकिन जगह नहीं मिल पा रही है।
यही वजह है कि प्रदेश भाजपा में एकला चलो का सुर अलापा जाने लगा है लेकिन पार्टी के कुछ नेता चाहते हैं कि शिवसेना से सीट बंटवारे में कुछ अधिक सीटें लेकर गठबंधन जारी रखा जाए।
फिलहाल, महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में से 169 शिवसेना और 119 भाजपा के कोटे में हैं।
महाराष्ट्र भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुधीर मुनगंटीवार यह मानते हैं कि पार्टी में आने वालों की बड़ी संख्या है जिन्हें विधानसभा का टिकट चाहिए, इसलिए आने वाले नेताओं को पार्टी में शामिल तो कर सकते हैं लेकिन टिकट देने में दिक्कत है। पर, खुशी की बात यह है कि बहुत से नेता बगैर टिकट के लालच में ही नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर बीजेपी ज्वाइन करना चाहते हैं।