फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   BJP Lost to SP in Kairana Seat

यूपी: सपा के हाथों क्यों हारी भाजपा, जानिए वजह

Mon, 20 Oct 2014 01:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Mon, 20 Oct 2014 01:02 PM IST
विज्ञापन
BJP Lost to SP in Kairana Seat

हरियाणा में मजबूती से चुनाव लड़ने की जद्दोजहद में भाजपा ने कैराना सीट को बिसरा दिया। यही कारण रहा कि भाजपा हरियाणा में ऐतिहासिक प्रदर्शन करने में सफल रही, जबकि कैराना सीट उससे सपा ने छीन ली।

विज्ञापन


कैराना विधानसभा सीट से भाजपा के हुकुम सिंह विधायक थे। यह सीट उनके सांसद बनने के बाद रिक्त हो गयी थी। उपचुनाव में तय था कि मुकाबला भाजपा और सपा के बीच होना है। सपा ने इस सीट पर अपने महारथियों की पूरी टीम मैदान में उतारी थी।
विज्ञापन


कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव सहित कई राज्यमंत्री यहां डटे रहे। पार्टी के सारे जाट नेता कैराना सीट पर लगा दिये गये थे। जबकि भाजपा की तरफ से सांसद हुकुम सिंह के ऊपर पूरा भार रहा, तो प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी और व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक विनीत अग्रवाल शारदा एक-एक बार यहां प्रचार आए।
विज्ञापन
विज्ञापन


इनके अलावा प्रदेश मंत्री अश्वनी त्यागी को यहां चुनाव की जिम्मेदारी दी गयी थी। दोनों पार्टियों की नीति साफ बता रही थी कि सपा जहां इसे प्रतिष्ठा से जोड़ कर चल रही थी, तो भाजपा ने इस सीट से लगभग मुंह मोड़ लिया था।

हरियाणा चुनाव में भाजपा ने झोंकी सारी ताकत

BJP Lost to SP in Kairana Seat

दूसरी तरफ हरियाणा चुनाव को लेकर भाजपा नेतृत्व पूरी तरह गंभीर नजर आ रहा था। बात अगर मेरठ क्षेत्र के नेताओं की करें, तो प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, सांसद राजेंद्र अग्रवाल, विधायक रविंद्र भड़ाना, झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के सुनील भराला, पूर्व विधायक अमित अग्रवाल, क्षेत्रीय महामंत्री जयकरण गुप्ता, मंत्री संजीव जैन सिक्का, विनीत अग्रवाल शारदा समेत तमाम नेता हरियाणा चुनाव में लगाये गये थे। यूपी बॉर्डर के इस प्रदेश में जीत को लेकर पार्टी नेतृत्व पूरी ताकत झोंके हुए था। यही कारण रहा कि कैराना सीट पर सपा मात्र 1099 वोट से जीत सकी।

भाजपा के नेता इसे सधी हुई रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं। क्योंकि उत्तर प्रदेश में सपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार है। ऐसे में एक सीट जाने से किसी पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। लेकिन हरियाणा में एक-एक सीट पर भाजपा के लिए करो या मरो की स्थिति थी।

भाजपा के क्षेत्रीय महामंत्री जयकरण गुप्ता का कहना है कि पार्टी नेतृत्व की सोच थी कि यूपी के उपचुनाव में कैराना सीट कोई मायने नहीं रखती, लेकिन हरियाणा और महाराष्ट्र का चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल था। यही कारण रहा कि सभी नेताओं को हरियाणा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसमें हम कामयाब भी हुए। यूपी का हमारा अगला लक्ष्य 2017 है।

कैराना सीट पर सपा का परचम लहराया

BJP Lost to SP in Kairana Seat

कैराना विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में लंबे अरसे बाद सपा भाजपा के गढ़ को ढहाने में कामयाब हो गई। सपा प्रत्याशी नाहिद हसन ने भाजपा प्रत्याशी अनिल चौहान को 1099 मतों से हराया। इसी के साथ इस सीट पर सन् 1996 से चला आ रहा भाजपा का वर्चस्व टूट गया।

रविवार को शामली के नई मंडी परिसर में सुबह आठ बजे कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुई मतगणना के पहले चक्र में सपा के नाहिद हसन ने भाजपा के अनिल चौहान से 1330 मतों से बढ़त बना ली। हालांकि दूसरे राउंड में भाजपा प्रत्याशी अनिल चौहान 1718 मतों से आगे हो गए। 15वें राउंड तक ऊन और झिंझाना क्षेत्र में भाजपा की बढ़त रही। कैराना शहर की ईवीएम खुलते ही भाजपा के अनिल पिछड़ने शुरू हो गए।

17 वें राउंड में भाजपा प्रत्याशी अनिल चौहान 478 मतों से पिछड़ गए। अंतिम राउंड पूरा होने पर सपा प्रत्याशी ने अनिल चौहान को 1099 मतों से मात देकर इस सीट पर 1996 से चला आ रहा भाजपा का वर्चस्व तोड़ दिया। सपा प्रत्याशी को 83,984 मत मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 82,885 मत हासिल हुए। कांग्रेस प्रत्याशी अरशद हसन सिर्फ 16,906 मत ही ले सके। उनकी जमानत जब्त हो गई। चुनाव अधिकारी सुरेश मिश्रा ने नाहिद हसन को निर्वाचित होने का प्रमाण-पत्र थमाया।

चुनाव आयोग के प्रेक्षक मतगणना केंद्र पर बराबर निगरानी करते रहे। डीएम एनपी सिंह, एसपी पवन कुमार भी व्यवस्थाओं पर निगरानी करते रहे। जीत के बाद सपा प्रत्याशियों के समर्थकों ने नाहिद हसन, जिला पंचायत अध्यक्ष मनीष चौहान के साथ  शामली शहर में जुलूस निकाला। उधर, हार के बाद भाजपा प्रत्याशी और उनके समर्थक काफी मायूस थे। इस सीट पर सन् 1996 से भाजपा के हुकुम सिंह का कब्जा था। वह लगातार चार बार यहां से विधायक रहे। उनके सांसद बनने के बाद खाली हुई सीट पर उपचुनाव हुआ था।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed