मांझी के कंधे पर रख बंदूक चलाना चाहती है भाजपा
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बिहार के मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच शुरू हुई खटपट भाजपा को रास आ रही है। मांझी को पद से हटाने संबंधी अटकलों के बीच भाजपा ने जरूरत पड़ने पर मांझी सरकार को बचाने का संकेत दिया है।
दरअसल, भाजपा महादलित बिरादरी के मांझी के प्रति सहानुभूति जताकर जदयू की कट्टर समर्थक इस बिरादरी में सियासी सेंध लगाना चाहती है।
पार्टी के रणनीतिकारों को लगता है कि मांझी आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की चुनावी नैया पार लगाने में अहम योगदान दे सकते हैं। राज्य की जातिगत राजनीति को साधने की कसरत में जुटी भाजपा ने इसी रणनीति के तहत अति पिछड़ी जाति के बड़े नेता रहे कर्पूरी ठाकुर का जन्म दिवस भी मनाने जा रही है।
नीतिश को क्या सता रही चिंता?
उधर, बड़बोले और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले मांझी के बयानों से आजिज जदयू महादलित वोट बैंक के छिटकने की आशंका से सहमति के बावजूद उनकी जल्द छुट्टी नहीं कर पा रही।
भाजपा की मांझी सरकार को बचाने की घोषणा ने भी नीतीश की परेशानी बढ़ा दी है। केंद्रीय राज्य मंत्री गिरिराज सिंह ने बुधवार को संकेत दिया कि मांझी को हटाने की कोशिशों में भाजपा अड़ंगा लगा सकती है।
उन्होंने कहा कि जातिगत समीकरण के तहत राजद मुखिया लालू प्रसाद और नीतीश दोनों ही मांझी को हटाना चाहते हैं। मगर समस्या यह है कि महादलित बिरादरी को मुख्यमंत्री पद से हटाने का ठीकरा अपने सिर फोड़ने के लिए कोई तैयार नहीं है।
खुद को अनाड़ी कहने वाले मांझी फिलहाल दोनों नेताओं को सियासी मात दे रहे हैं। सिंह ने कहा कि अगर मांझी को हटाने की कोशिश हुई तब समय बताएगी कि इस परिस्थिति में भाजपा क्या करती है।