स्पीकर को कांग्रेस-बीजेपी ने बनाया मामू!
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दिल्ली विधानसभा में अध्यक्ष (स्पीकर) और मुख्यमंत्री की टेबल के माइक तोड़ने और फाइलें फाड़ने वाले सदस्यों पर फिलवक्त कोई कार्रवाई नहीं हो सकेगी। सदस्यों ने दिल्ली विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियम 277, 278 और 293 को निलंबित कराने का प्रस्ताव सदन में पेश कर बहुमत से पास करा लिया है। प्रस्ताव पास होने के बाद अध्यक्ष को इसका आभास हुआ।
दिल्ली में बहुत कुछ अद्भुत हो रहा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केंद्र सरकार और उपराज्यपाल से अनुमति के बिना बिल पेश करना चाहते हैं तो भाजपा, कांग्रेस, जेडीयू व निर्दलीय विधायकों ने मिलकर एक प्रस्ताव के जरिए कई नियम निलंबित करा लिए और विस अध्यक्ष की कुछ शक्तियां ही छीन ली।
स्पीकर की कौन सी शक्ति छिन गई है?
जिन नियमों को निलंबित किया गया है, उसके तहत अध्यक्ष, सदस्यों को कार्यवाही में बाधा पहुंचाने के लिए नामित कर सकते हैं, अध्यक्ष या सदन के टेबल पर रखे कागज फाड़ने के लिए निलंबित कर सकते हैं और किसी संदर्भ में अध्यक्ष के निर्णय पर आपत्ति नहीं की जाएगी। प्रस्ताव पास होने के कारण अब ये तीनों नियम पूरे सत्र के लिए निलंबित माने जाएंगे।
नियम 277 व 278 को निलंबित करने का प्रस्ताव कांग्रेस विधायक अरविंदर सिंह ने रखा और भाजपा विधायक साहब सिंह चौहान ने नियम 293 को निलंबित करने का प्रस्ताव रखा। दोनों प्रस्ताव पर अध्यक्ष ने खुद ही वोटिंग कराई। प्रस्ताव पास होते ही प्रो. जगदीश मुखी ने अध्यक्ष को बताया कि उनकी कार्रवाई और अंतिम निर्णय की शक्तियां छिन गई हैं।
तब जाकर नियम समझ पाए स्पीकर
विधानसभा नियमों के जानकार बताते हैं कि नियमों का निलंबन इसलिए कराया गया ताकि फाइल फाड़ने और माइक तोड़ने वाले विधायक आसिफ मोहम्मद खान के खिलाफ कार्रवाई न हो सके। लेकिन विधानसभा अक्ष्यक्ष इस बात से भली-भांति परिचित नहीं थे।
जानकारों ने बताया कि प्रस्ताव लाए जाने से पूर्व सरकार पक्ष की तरफ से हंगामा करने वाले विधायकों को नामित करने के निकालने की तैयारी चल रही थी। अब अध्यक्ष सदस्यों को निकाल भी नहीं सकेंगे।