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BJP की शान ये मुख्यमंत्री ही बन रहे हैं पार्टी की मुसीबत

Tue, 30 Jun 2015 02:16 PM IST
Updated Tue, 30 Jun 2015 02:16 PM IST
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BJP Chief Minister's become the party trouble

यूपीए शासन के दौरान भाजपा की शान रहे पार्टी के अपने मुख्यमंत्री ही मोदी सरकार की मुसीबत बन गए हैं। लोकसभा चुनाव में पार्टी ने अपने मुख्यमंत्रियों के कामकाज का गुणगान कर ही देश में सुशासन की छवि को पुख्ता किया था। लेकिन उसके इस छवि में पलीता लगता दिख रहा है।

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एक-एक कर भाजपा के मुख्यमंत्री विवादों में घिर रहे हैं। ललित मोदी विवाद में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ विपक्ष के आरोपों की झड़ी थमती नहीं दिख रही है। तो मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज की चौहान व्यापम घोटाले की जद में फंसते जा रहे हैं।
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बहुचर्चित व्यापम घोटाले के आरोपियों एवं गवाहों की कथित तौर पर हो रही मौत से शिवराज पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि पार्टी इन आरोपों में दम नहीं देख रही है। पार्टी का मानना है कि उसके मुख्यमंत्रियों की चमक अब भी बरकरार है।

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'हमारे सभी मुख्यमंत्री सही काम कर रहे हैं'

BJP Chief Minister's become the party trouble

भाजपा उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे का कहना है कि हमारे सभी मुख्यमंत्री सही काम कर रहे हैं। हमारे किसी भी मुख्यमंत्री को न तो कोई राजनीतिक चुनौती है और न हीं किसी के लोकप्रियता पर आंच आई है। किसी भी मुख्यमंत्री पर अब तक कोई सीधा आरोप नहीं है। वर्तमान सियासी आरोपों से पार्टी चिंतित नहीं है।

व्यापम मामले में किन्हीं भी कारणों से हो रही मौत दु:खद है। अदालत की निगरानी में मामले की जांच चल रही है। शिवराज सिंह चौहान ने खुद से जांच की पहल की थी। दरअसल यूपीए शासन के दौरान भाजपा अपने मुख्यमंत्रियों के कामकाज का हवाला देकर ही उसे कटघरे में घेरती थी।

खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश-दुनिया के सामने सुशासन एवं विकास पुरूष के रूप में अपनी छवि गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए बनाई थी। लेकिन वर्तमान सियासी हालातों में मुख्यमंत्रियों के विवाद ने ही पीएम मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाया है।

पार्टी के शीर्ष नेता यह मान रहे हैं कि वर्तमान ललित मोदी विवाद से न सिर्फ सरकार की छवि पर असर पड़ा है। बल्कि बेदाग शासन की उसकी चुनौती भी कमजोर पड़ी है।

वसुंधरा पर कांग्रेस का एक और आरोप

BJP Chief Minister's become the party trouble

कांग्रेस राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी के बहाने घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही। पार्टी ने मुख्यमंत्री राजे और ललित मोदी पर मिलकर सरकारी संपत्ति को निजी संपत्ति में बदलने का नया आरोप लगाया है।

मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ी पार्टी ने कुछ दस्तावेजों के आधार पर यह साबित करने की कोशिश की है कि ललित मोदी और राजे ने मिलकर धौलपुर महल को निजी जायदाद में बदल दिया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि धौलपुर का महल सरकारी संपत्ति थी, मगर राजे ने मोदी के साथ मिलकर उसे निजी संपत्ति में बदलकर फायदा उठाया है।

उन्होंने कि ललित मोदी की कंपनी नियंत हेरिटेज होटल प्राइवेट लिमिटेड ने वसुंधरा के परिवार के साथ मिलकर धौलपुर महल पर कब्जा कर लिया है। हालांकि, अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में महल पर कब्जे के सवाल पर कांग्रेस ने भी चुप्पी साध ली है।

ये हैं आरोप

BJP Chief Minister's become the party trouble

जयराम ने आरोप लगाया है कि 1954 के दस्तावेज साबित करते हैं कि धौलपुर का महल निजी नहीं, सरकारी संपत्ति है। 1955 में राजस्थान में जमाबंदी हुई और उसमें भी लिखा गया कि यह महल सरकारी संपत्ति है।

1971 में इस महल का खसरा नंबर बदला गया, लेकिन इसके मालिकाना हक को लेकर स्थिति नहीं बदली। रमेश ने कहा कि 1977 की जमाबंदी में भी धौलपुर महल को सरकारी संपत्ति बताया गया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हम परिवार के झगड़े को बीच में लाना ठीक नहीं समझते। मगर यह बात बताना जरूरी है कि 1980 में वसुंधरा राजे के पति हेमंत सिंह ने कोर्ट में बयान दिया था कि यह महल निजी या राज परिवार की संपत्ति नहीं बल्कि सरकारी संपत्ति है। 2010 की जमाबंदी से भी साफ है कि धौलपुर महल सरकारी संपत्ति है।

रमेश ने आरोप लगाया कि 2013 के चुनाव में वसुंधरा ने चुनाव आयोग में जमा हलफनामे में कहा है कि नियंत हेरिटेज होटल प्राइवेट लिमिटेड में उनके 280 शेयर, उनके बेटे दुष्यंत सिंह के नाम 2200 और बहू निहारिका सिंह के नाम 3225 शेयर हैं।

इसमें ललित मोदी के भी 825 शेयर हैं। रमेश ने कहा कि नियंत कोई नया होटल नहीं बनाती, बल्कि वसुंधरा राजे के परिवार के साथ मिलकर राजस्थान में सरकारी संपत्तियों पर कब्जा करती है और मुनाफा कमाती है।

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